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व्यापार जगत

2032 तक भारत में हर साल बिक सकते हैं 3.04 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहन, EV बाजार में आएगी बड़ी क्रांति: IESA रिपोर्ट!

सरकारी नीतियों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को मिला मजबूत समर्थन तो 2032 तक EV बिक्री में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का अनुमान, बैटरी की मांग 19 GWh से बढ़कर 362 GWh तक पहुंच सकती है।

NTN REPORT// नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार आने वाले वर्षों में अभूतपूर्व तेजी से बढ़ सकता है। इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (IESA) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि सरकार की नीतियों का लगातार समर्थन मिलता रहा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार हुआ और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला, तो वर्ष 2032 तक देश में हर साल लगभग 3.04 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में करीब 12 गुना तक वृद्धि होने की संभावना है।

यह रिपोर्ट कस्टमाइज्ड एनर्जी सॉल्यूशंस (CES) द्वारा तैयार की गई है, जिसमें भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के भविष्य और उससे जुड़ी संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

एक साल में EV बिक्री में 26 फीसदी की बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में लगभग 20 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 26 लाख यूनिट तक पहुंच गया। यानी सिर्फ एक वर्ष में EV बिक्री में 26 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

इसके साथ ही देश में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी भी बढ़कर 9.5 प्रतिशत हो गई, जबकि वर्ष 2024 में यह 8.1 प्रतिशत थी। यह संकेत है कि भारतीय उपभोक्ता अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना रहे हैं।

टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर बने EV बाजार की सबसे बड़ी ताकत

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का बाजार पर सबसे अधिक दबदबा रहा। कुल इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 60.1 प्रतिशत रही। वहीं इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ने 31.6 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की।

इस प्रकार दोनों श्रेणियों ने मिलकर देश में हुई कुल इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री में 91 प्रतिशत से अधिक योगदान दिया। इससे स्पष्ट है कि फिलहाल भारत की इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति का सबसे मजबूत आधार दोपहिया और तिपहिया वाहन हैं।

इलेक्ट्रिक कारों की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ी

रिपोर्ट में बताया गया है कि इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों यानी इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब उपभोक्ता बैटरी से चलने वाली कारों को भी तेजी से अपना रहे हैं।

वहीं इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 0.2 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी 0.4 प्रतिशत रही। इन दोनों श्रेणियों में बिक्री बढ़ाने में सरकारी खरीद और फ्लीट इलेक्ट्रिफिकेशन योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

2032 तक कई गुना बढ़ जाएगी बैटरी की मांग

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ बैटरी की मांग में भी भारी उछाल देखने को मिलेगा। वर्ष 2025 में जहां कुल बैटरी मांग 19 GWh रही, वहीं वर्ष 2032 तक इसके बढ़कर 362 GWh तक पहुंचने का अनुमान है।

इसका प्रमुख कारण अलग-अलग श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों में बड़े क्षमता वाले बैटरी पैक का उपयोग बढ़ना बताया गया है।

बैटरी डिमांड में सबसे आगे फोर-व्हीलर

वर्ष 2025 में कुल बैटरी मांग में सबसे बड़ा योगदान इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर का रहा, जिसकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत रही। इसके बाद इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर का योगदान 27 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का 23 प्रतिशत रहा।

हालांकि इलेक्ट्रिक बसों की बिक्री केवल 0.2 प्रतिशत रही, लेकिन बड़े बैटरी पैक के कारण कुल बैटरी मांग में उनका योगदान 7.8 प्रतिशत रहा। वहीं इलेक्ट्रिक ट्रकों की हिस्सेदारी 1.9 प्रतिशत दर्ज की गई।

2029 के बाद इन तीन क्षेत्रों पर निर्भर करेगा EV बाजार

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2029 के बाद भारत के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की रफ्तार मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी—

  • सरकार की प्रोत्साहनकारी नीतियां।
  • चार्जिंग नेटवर्क का व्यापक विस्तार।
  • घरेलू विनिर्माण क्षमता और स्थानीय उत्पादन।

यदि इन क्षेत्रों में लगातार निवेश और सहयोग मिलता रहा तो भारत का EV बाजार अनुमान से भी अधिक तेजी से विस्तार कर सकता है।

लोकल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग अब भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहन कंपोनेंट बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बैटरी पैक की है, जो कुल बाजार का 52 प्रतिशत है। इसके बाद मोटर 22 प्रतिशत, इन्वर्टर 12 प्रतिशत, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) 11 प्रतिशत तथा DC-DC कन्वर्टर 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सप्लाई चेन, घरेलू विनिर्माण और कंपोनेंट्स के स्थानीयकरण के क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। यदि इन बाधाओं को दूर किया जाता है तो भारत वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहन भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिशा बदल सकते हैं। सरकार की प्रभावी नीतियां, बेहतर चार्जिंग सुविधाएं, मजबूत स्थानीय उत्पादन और बैटरी तकनीक में निवेश इस बदलाव की सबसे बड़ी कुंजी होंगे। यदि वर्तमान रफ्तार बरकरार रही तो वर्ष 2032 तक भारत दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में शामिल हो सकता है।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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