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खेल

फीफा वर्ल्ड कप 2026: अर्जेंटीना ने इंग्लैंड को हराकर फाइनल में बनाई जगह, ‘माल्विनास’ बैनर और खिलाड़ियों की झड़प से बढ़ा विवाद!

26 फाउल, चार येलो कार्ड, मैच के बाद भी तनाव बरकरार; मेसी की टीम की शानदार वापसी, अब फाइनल में स्पेन से होगा मुकाबला

NTN REPORT// अटलांटा। फीफा वर्ल्ड कप 2026 का अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच खेला गया सेमीफाइनल सिर्फ एक फुटबॉल मुकाबला नहीं रहा, बल्कि खेल, इतिहास और राजनीतिक संवेदनशीलता का मिश्रण बन गया। बेहद आक्रामक अंदाज में खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में कुल 26 फाउल हुए, चार खिलाड़ियों को येलो कार्ड दिखाए गए और अंतिम सीटी बजने के बाद भी दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। रोमांचक मुकाबले में अर्जेंटीना ने 2-1 से शानदार वापसी करते हुए लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में जगह बना ली। हालांकि जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों द्वारा “द माल्विनास बिलॉन्ग टू अर्जेंटीना” लिखा बैनर लहराने से नया विवाद खड़ा हो गया है।

सोर्स, सोशल मीडिया

मैच से पहले अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी और इंग्लैंड के मैनेजर थॉमस टुखेल ने मुकाबले को केवल फुटबॉल तक सीमित रखने की अपील की थी। दोनों ने कहा था कि ऐतिहासिक विवाद और राजनीतिक पृष्ठभूमि का असर मैदान पर नहीं दिखना चाहिए, लेकिन खेल शुरू होते ही दोनों टीमों के खिलाड़ियों के तेवर कुछ और ही कहानी बयां करने लगे।

शुरुआत से ही दिखी आक्रामकता, 10 मिनट में आठ फाउल

मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक रवैया अपनाया। शुरुआती 10 मिनट के भीतर ही आठ फाउल हो चुके थे। पूरे मैच में कुल 26 फाउल दर्ज किए गए, जो इस विश्व कप के सबसे अधिक शारीरिक संघर्ष वाले मुकाबलों में शामिल रहा। रेफरी इस्माइल एलफाथ को स्थिति नियंत्रित रखने के लिए चार येलो कार्ड दिखाने पड़े, जिनमें तीन अर्जेंटीना और एक इंग्लैंड के खिलाड़ी को मिला।

मैच का पहला बड़ा विवाद अर्जेंटीना के एंजो फर्नांडीज और इंग्लैंड के इलियट एंडरसन के बीच हुई जोरदार भिड़ंत के बाद सामने आया। दोनों खिलाड़ियों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि दोनों टीमों के अन्य खिलाड़ी भी आमने-सामने आ गए। कुछ समय के लिए खेल का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया और रेफरी को हस्तक्षेप कर मामला शांत कराना पड़ा।

जूड बेलिंघम सबसे ज्यादा आक्रामक नजर आए

इंग्लैंड के स्टार मिडफील्डर जूड बेलिंघम पूरे मुकाबले के दौरान सबसे अधिक आक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने कई मौकों पर रेफरी के फैसलों का विरोध किया और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों से भी तीखी बहस करते नजर आए। मैदान पर कई बार उनकी लियोनेल मेसी समेत अन्य अर्जेंटीनी खिलाड़ियों से कहासुनी हुई।

अंतिम सीटी बजने के बाद भी बेलिंघम का गुस्सा शांत नहीं हुआ। टेलीविजन कैमरों में बेलिंघम और अर्जेंटीना के डिफेंडर वेलेंटिन बार्को के बीच तीखी बहस दिखाई दी। इसके बाद दोनों टीमों के कई खिलाड़ी एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए, जिससे कुछ देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

हर काउंटर अटैक पर फाउल, हर ड्यूल में संघर्ष

अर्जेंटीना की रणनीति शुरू से ही इंग्लैंड के तेज आक्रमणों को रोकने की रही। क्रिस्टियन रोमेरो और लिसांद्रो मार्टिनेज ने लगातार सख्त टैकल किए, जबकि रोड्रिगो डी पॉल ने इंग्लैंड के तेज काउंटर अटैक रोकने के लिए कई सामरिक फाउल किए। लगभग पूरे मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों के बीच टकराव और बहस का सिलसिला जारी रहा।

इंग्लैंड ने बनाई बढ़त, लेकिन अर्जेंटीना ने पलटा मैच

दूसरे हाफ में एंथनी गॉर्डन ने गोल कर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिलाई। उस समय ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड फाइनल में पहुंच जाएगा, लेकिन मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना ने शानदार वापसी की।

एंजो फर्नांडीज ने बराबरी का गोल कर टीम को मुकाबले में लौटाया। इसके बाद इंजरी टाइम में बतौर विकल्प मैदान पर आए लाउतारो मार्टिनेज ने शानदार हेडर के जरिए विजयी गोल दाग दिया। अर्जेंटीना ने मुकाबला 2-1 से जीतकर लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में जगह पक्की कर ली, जहां उसका सामना स्पेन से होगा।

‘माल्विनास’ बैनर बना नए विवाद की वजह

मैच समाप्त होने के बाद जश्न के दौरान अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने “द माल्विनास बिलॉन्ग टू अर्जेंटीना” लिखा बैनर लहराया। माल्विनास वही द्वीपसमूह है जिसे ब्रिटेन फॉकलैंड आइलैंड्स के नाम से जानता है। वर्ष 1982 में इसी क्षेत्र को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन के बीच युद्ध हुआ था और आज भी दोनों देश इस द्वीपसमूह पर अपना दावा करते हैं।

फीफा अपने टूर्नामेंटों में राजनीतिक संदेशों के प्रदर्शन को लेकर सख्त नियम लागू करता है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बैनर को लेकर अर्जेंटीना के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय फीफा की अनुशासन समिति द्वारा लिया जाएगा।

क्यों खास है अर्जेंटीना-इंग्लैंड की प्रतिद्वंद्विता?

अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच फुटबॉल प्रतिद्वंद्विता दशकों पुरानी है, जिसकी पृष्ठभूमि 1982 के फॉकलैंड (माल्विनास) युद्ध से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि जब भी दोनों टीमें किसी बड़े टूर्नामेंट में आमने-सामने आती हैं, मुकाबला केवल खेल तक सीमित नहीं रहता।

1986 विश्व कप में डिएगो माराडोना ने इंग्लैंड के खिलाफ विवादित “हैंड ऑफ गॉड” और ऐतिहासिक “गोल ऑफ द सेंचुरी” दागकर इस प्रतिद्वंद्विता को नई पहचान दी थी। इसके बाद 1998 विश्व कप में डेविड बेकहम को रेड कार्ड मिलने और इंग्लैंड की हार ने इस मुकाबले की कड़वाहट को और बढ़ाया। वहीं 2002 विश्व कप में बेकहम के पेनाल्टी गोल की बदौलत इंग्लैंड ने 1-0 से जीत दर्ज कर पुरानी हार का कुछ हद तक बदला लिया था।

फुटबॉल से ज्यादा चर्चा टकराव की

अटलांटा में खेला गया यह सेमीफाइनल शानदार खेल के साथ-साथ खिलाड़ियों के बीच लगातार हुई झड़पों, कड़े टैकलों, जूड बेलिंघम और अर्जेंटीनी खिलाड़ियों की तीखी नोकझोंक, मैच के बाद हुई कहासुनी और “माल्विनास” बैनर से जुड़े विवाद के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा। अर्जेंटीना ने भले ही फाइनल में अपनी जगह बना ली हो, लेकिन इस मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच होने वाला मुकाबला केवल 90 मिनट का फुटबॉल मैच नहीं, बल्कि इतिहास, भावनाओं और प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक भी है।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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