2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी ने तैयार किया रोडमैप!
NTN REPORT// नई दिल्ली। देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस विषय पर गठित संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) अब ऐसा व्यावहारिक और सर्वसम्मत मॉडल तैयार करने में जुटी है, जिससे वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव तक पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें। समिति का कहना है कि इस दिशा में राज्यों, संवैधानिक विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों से लगातार व्यापक चर्चा की जा रही है।

जेपीसी के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने गोवा में आयोजित समिति की दो दिवसीय बैठक के दौरान बताया कि समिति ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में इस बात पर विशेष मंथन हुआ कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने में कौन-कौन सी संवैधानिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं तथा उनका समाधान किस प्रकार निकाला जाए।
उन्होंने बताया कि समिति अब तक गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और गोवा सहित कई राज्यों का दौरा कर चुकी है। इस दौरान संवैधानिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न हितधारकों से सुझाव लिए गए हैं, ताकि सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक और व्यवहारिक व्यवस्था तैयार की जा सके।
जेपीसी अध्यक्ष के अनुसार, अब तक प्राप्त सुझावों में लगभग 99 प्रतिशत नागरिक संगठनों और अन्य हितधारकों ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव का समर्थन किया है। समिति का प्रयास है कि ऐसा मॉडल तैयार किया जाए, जिस पर सभी राजनीतिक दलों के बीच व्यापक सहमति बन सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री और राजनीतिक दल स्वेच्छा से सहमत होते हैं, तो वर्ष 2029 से पहले भी कुछ राज्यों के चुनावी चक्र को लोकसभा चुनाव के साथ जोड़ा जा सकता है।
पीपी चौधरी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत आर्थिक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि देश में बार-बार अलग-अलग चुनाव होने से लगभग 7 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। उनका कहना है कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते हैं तो न केवल चुनावी खर्च में बड़ी कमी आएगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। चुनाव ड्यूटी में बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों और विशेष रूप से सरकारी शिक्षकों की तैनाती करनी पड़ती है, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है। इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ता है।
जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना वाला ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ देश के चुनावी तंत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है। उनका मानना है कि इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, चुनावी खर्च में कमी आएगी, प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनी रहेगी तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी।
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