
मॉनसून की रफ्तार पर अल-नीनो का असर: मुंबई में बारिश का कहर, उत्तर भारत में सूखे जैसे हालात; 11 साल का कमजोर मॉनसून बनने की आशंका
NTN REPORT// नई दिल्ली। देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की चाल इस साल असामान्य बनी हुई है। एक तरफ मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाकों में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में देश में सामान्य से करीब 10 प्रतिशत कम बारिश हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो यह पिछले करीब 11 वर्षों का सबसे कमजोर मॉनसून साबित हो सकता है।

अल-नीनो बना मौसम में बड़े बदलाव की वजह
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस साल मॉनसून के असंतुलित रहने के पीछे प्रमुख कारण अल-नीनो प्रभाव माना जा रहा है। अल-नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के समुद्री सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी प्राकृतिक मौसमी घटना है, जो दुनिया भर के मौसम चक्र को प्रभावित करती है।
भारत में इसका सीधा असर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर पड़ता है। अल-नीनो के कारण मॉनसून की हवाओं की दिशा और नमी पहुंचाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे कई क्षेत्रों में बारिश कम हो जाती है, जबकि कुछ जगहों पर अचानक तेज बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है।
एक ही देश में कहीं बाढ़ तो कहीं बारिश का इंतजार
अल-नीनो का प्रभाव पूरे देश में एक जैसा नहीं रहता। यही वजह है कि इस बार मौसम का अलग-अलग रूप देखने को मिल रहा है। मुंबई में भारी बारिश ने कई इलाकों में पानी भरने की स्थिति पैदा कर दी है, जबकि उत्तर भारत के कई राज्य पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
मुंबई में मंगलवार को अलग-अलग इलाकों में करीब 71 से 99 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई। वहीं दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश के कारण गर्मी और जल संकट की चिंता बढ़ रही है।
मुंबई में 13 दिन की देरी से पहुंचा मॉनसून
मुंबई में इस साल मॉनसून सामान्य तारीख से करीब 13 दिन देर से पहुंचा। सामान्य तौर पर मुंबई में मॉनसून 10 जून के आसपास दस्तक देता है। इससे पहले साल 2023 में भी मॉनसून 25 जून को पहुंचा था।

मौसम रिकॉर्ड के अनुसार मुंबई में मॉनसून पहुंचने में सबसे ज्यादा देरी साल 1974 और 1958 में हुई थी, जब बारिश का मौसम 28 जून को शुरू हुआ था।
जुलाई-अगस्त तक जारी रह सकता है अनियमित बारिश का दौर
IMD के अनुमान के अनुसार 2026 के मॉनसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान अल-नीनो का प्रभाव बना रह सकता है। इसके कारण जुलाई के अंत या अगस्त तक बारिश का पैटर्न अनियमित रहने की संभावना है।
इस दौरान कुछ इलाकों में कम समय में अत्यधिक बारिश के कारण स्थानीय बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जबकि बड़े क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी रह सकती है। सितंबर तक स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन कुल मिलाकर यह साल जल संकट, कृषि उत्पादन और महंगाई के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर
कमजोर मॉनसून का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों को पर्याप्त बारिश नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है।
इसके अलावा कम बारिश से जलाशयों में पानी का स्तर घट सकता है, जिससे सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ेगा। बड़े शहरों में गर्मी और पानी की कमी से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
वहीं मुंबई जैसे शहरों में अत्यधिक बारिश से बाढ़, ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
बदलते मौसम पैटर्न का संकेत दे रहा 2026 का मॉनसून
मौसम का यह उतार-चढ़ाव सिर्फ एक साल की स्थिति नहीं बल्कि बदलते वैश्विक मौसम पैटर्न का संकेत भी माना जा रहा है। एक तरफ मुंबई में बारिश की अधिकता और दूसरी तरफ उत्तर भारत में सूखे जैसे हालात यह दिखाते हैं कि आने वाले समय में मौसम की अनिश्चितता से निपटने के लिए बेहतर तैयारी की जरूरत होगी।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।