फायनेंस कंपनियों के मनमाने ब्याज और अवैध वसूली पर बड़ा फैसला: जांजगीर-चांपा जिला न्यायालय ने 129 आर्बिट्रेशन मामलों को किया शून्य, ग्रामीणों को मिली राहत
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। निजी फायनेंस कंपनियों द्वारा मनमाने ब्याज, एकतरफा आर्बिट्रेशन कार्रवाई और अवैध वसूली के मामलों में जांजगीर-चांपा जिला न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। प्रधान जिला न्यायाधीश जयदीप गर्ग द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय में 129 आर्बिट्रेशन प्रकरणों को गुण-दोष के आधार पर निराकृत करते हुए सभी मामलों में पारित आदेशों को शून्य (Void Ab-initio) घोषित कर दिया गया है।

इस संबंध में जानकारी लोक अभियोजक जांजगीर-चांपा संदीप बनाफर द्वारा दी गई है। उन्होंने बताया कि न्यायालय के इस फैसले से आम नागरिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो निजी फायनेंस कंपनियों की वसूली प्रक्रिया से परेशान थे।
वाहन ऋण के नाम पर चल रही थी वसूली प्रक्रिया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई लोग वाहन खरीदने के लिए फायनेंस कंपनियों से ऋण लेते हैं। इसके लिए कंपनियां हायर परचेज एग्रीमेंट (Hire Purchase Agreement) के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराती हैं। इन समझौतों में अधिक ब्याज दर और कई शर्तें शामिल रहती हैं।
ऋण भुगतान में देरी होने पर कई मामलों में फायनेंस कंपनियों द्वारा वाहन जब्ती, आर्बिट्रेशन प्रक्रिया और वसूली कार्रवाई शुरू कर दी जाती थी। आरोप था कि कई मामलों में वाहन मालिकों को पर्याप्त सूचना दिए बिना एकतरफा कार्रवाई कर आदेश प्राप्त किए गए।
इसके बाद कंपनियां इन आदेशों के आधार पर न्यायालय में निष्पादन याचिकाएं (Execution Petitions) दायर कर ग्रामीणों की संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई का प्रयास कर रही थीं।
न्यायालय ने एकतरफा आदेशों को माना अवैध
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि फायनेंस कंपनियों द्वारा जिस तरीके से आर्बिट्रेटर नियुक्त कर एकतरफा आदेश पारित कराए गए, वह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थे।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आर्बिट्रेशन प्रक्रिया में निष्पक्षता, सहमति और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। इनका उल्लंघन होने पर ऐसे आदेशों को प्रारंभ से ही अमान्य माना जाएगा।
129 आर्बिट्रेशन आदेश किए गए निरस्त
प्रधान जिला न्यायाधीश ने लंबित 129 आर्बिट्रेशन निष्पादन प्रकरणों का निराकरण करते हुए सभी आदेशों को Void Ab-initio (प्रारंभ से ही शून्य) घोषित कर दिया।
अब इन आदेशों के आधार पर फायनेंस कंपनियां संबंधित लोगों से किसी भी प्रकार की कानूनी वसूली कार्रवाई नहीं कर सकेंगी।
ग्रामीणों और आम नागरिकों को बड़ी राहत
लोक अभियोजक संदीप बनाफर ने बताया कि यह फैसला उन लोगों के लिए राहत देने वाला है, जो ऋण वसूली और कुर्की की कार्रवाई के दबाव में थे। न्यायालय के निर्णय से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हुई है और निजी वित्तीय संस्थानों को भी नियमों के अनुसार कार्य करने का संदेश मिला है।
न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियां
1. मनमाना क्षेत्राधिकार उचित नहीं:
न्यायालय ने माना कि स्थानीय नागरिकों के खिलाफ दूरस्थ स्थानों से एकतरफा आर्बिट्रेशन कार्रवाई करना उचित नहीं है।
2. प्रारंभ से ही शून्य आदेश:
कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्षता के नियमों का पालन नहीं होने के कारण ऐसे सभी आदेश अमान्य हैं।
3. सभी निष्पादन याचिकाएं खारिज:
फायनेंस कंपनियों द्वारा वसूली के लिए दायर सभी निष्पादन याचिकाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।