कल तक चीन पर हमलावर, आज जिनपिंग के मुरीद, ट्रंप की बदली जुबान से दुनिया हैरान, चीन दौरे में दोस्ती और डील की राजनीति!
NTN REPORT// 15 मई 2026। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी कूटनीतिक शैली को लेकर वैश्विक चर्चा में हैं। कभी चीन और उसके राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर तीखे हमले करने वाले ट्रंप अब बीजिंग पहुंचकर उनकी खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं। चीन दौरे के दौरान ट्रंप ने जिनपिंग को “महान नेता” और “दोस्त” बताया, जिससे दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक और उनके समर्थक भी हैरान हैं।

बीजिंग में ट्रंप ने जिनपिंग की जमकर तारीफ की
चीन की राजधानी बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान ट्रंप ने कहा कि चीन और अमेरिका के रिश्ते पहले से कहीं बेहतर होने वाले हैं। उन्होंने जिनपिंग के साथ मंच साझा करते हुए कहा कि उनके साथ दोस्ती सम्मान की बात है।
ट्रंप ने कहा कि वे दुनिया भर में लोगों से कहते हैं कि शी जिनपिंग एक महान नेता हैं, भले ही कुछ लोग उनकी इस बात को पसंद न करें। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने उनका बेहद शानदार स्वागत किया है और वे इससे प्रभावित हैं।
व्हाइट हाउस आने का दिया निमंत्रण
ट्रंप ने घोषणा की कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को व्हाइट हाउस का दौरा करेंगे। उन्होंने जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन को औपचारिक निमंत्रण देते हुए कहा कि अमेरिका इस यात्रा का बेसब्री से इंतजार करेगा।
अपने संबोधन में ट्रंप ने अमेरिका और चीन के बीच मजबूत संबंधों के नाम पर टोस्ट भी पेश किया और कहा कि यह रिश्ता बेहद खास है।
कभी “चाइना वायरस” कहने वाले ट्रंप अब नरम क्यों?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बदला हुआ रुख महज कूटनीतिक रणनीति है। पिछले कुछ वर्षों में ट्रंप लगातार चीन पर हमलावर रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने कोरोना वायरस को “चाइना वायरस” और “वुहान वायरस” कहा था।
इसके अलावा ट्रंप चीन पर अमेरिका की तकनीक चोरी करने, अनुचित व्यापार करने और नशीले पदार्थ फेंटेनाइल के रसायनों की आपूर्ति करने जैसे आरोप भी लगाते रहे हैं।
फेंटेनाइल और टैरिफ पर पहले दिखा चुके हैं सख्ती
फरवरी 2025 में ट्रंप प्रशासन ने फेंटेनाइल संकट को लेकर चीन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक कर दिया गया। ट्रंप ने आरोप लगाया था कि चीन जानबूझकर अमेरिका में नशीले पदार्थों के संकट को बढ़ावा दे रहा है।
उन्होंने कई बार कहा कि चीन अमेरिका का सबसे बड़ा आर्थिक प्रतिद्वंद्वी है और उससे सख्ती से निपटना जरूरी है।
ट्रंप की “पर्सनल केमिस्ट्री” वाली राजनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप अक्सर दूसरे देशों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध मजबूत दिखाकर बेहतर सौदे निकालने की कोशिश करते हैं। इससे पहले भी वे शी जिनपिंग को “माई फ्रेंड”, “ग्रेट लीडर” और “ब्रिलिएंट” कह चुके हैं।
ट्रंप की रणनीति को लेकर माना जाता है कि वे पहले तारीफ करते हैं और बाद में सख्त मोलभाव की राजनीति अपनाते हैं।
आखिर चीन से क्या चाहते हैं ट्रंप?
सूत्रों के मुताबिक ट्रंप इस यात्रा के जरिए चीन से कई बड़े आर्थिक और रणनीतिक फायदे चाहते हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- अमेरिका से अधिक कृषि उत्पादों की खरीद
- फेंटेनाइल पर सख्त कार्रवाई
- रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात में सहयोग
- ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट खुला रखना
- अमेरिकी यात्री विमानों की खरीद बढ़ाना
जैसे मुद्दे शामिल हैं।
MAGA समर्थकों में भी बढ़ी बेचैनी
ट्रंप के बदले तेवरों से उनके “MAGA” यानी “Make America Great Again” समर्थकों में भी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है। कई कट्टर समर्थकों का मानना है कि चीन अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी है और उसके प्रति नरमी गलत संदेश देती है।
हालांकि ट्रंप समर्थक इसे “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा बता रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रंप दिखावे में नरमी दिखाकर अमेरिका के हितों के लिए बड़ी डील करने की तैयारी कर रहे हैं।
शी जिनपिंग ने भी दिया साझेदारी का संदेश
राजकीय भोज से पहले दिए गए अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार की तरह काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंध है।
शी ने कहा कि “अमेरिका को फिर से महान बनाना” और “चीनी राष्ट्र का पुनरुत्थान” दोनों लक्ष्य साथ-साथ हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा, जबकि टकराव दोनों का नुकसान करेगा।
होर्मुज स्ट्रेट और तेल सप्लाई पर भी चर्चा
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप और जिनपिंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए यह जरूरी है।
बताया गया कि चीन ने खाड़ी देशों पर अपनी तेल निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने में रुचि दिखाई है।
ताइवान मुद्दे पर बंद कमरे में हुई गंभीर चर्चा
बैठक के दौरान ताइवान का मुद्दा भी प्रमुख रहा। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि अगर ताइवान मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया तो अमेरिका-चीन संबंध गंभीर संकट में पड़ सकते हैं।
शी ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस मामले में गलत कदम दोनों देशों के बीच टकराव और संघर्ष का कारण बन सकता है।
व्यापार युद्ध रोकने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार ट्रंप इस शिखर वार्ता के जरिए पिछले वर्षों में शुरू हुए ट्रेड वॉर को दोबारा बढ़ने से रोकना चाहते हैं। इसके लिए दोनों देशों के बीच एक विशेष बोर्ड बनाने पर भी चर्चा हुई, जो व्यापारिक विवादों को सुलझाने का काम करेगा।
दुनिया की नजर इस रिश्ते पर
अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियां हैं। ऐसे में ट्रंप और जिनपिंग की यह मुलाकात सिर्फ दो नेताओं की बातचीत नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि ट्रंप की यह दोस्ती आगे जाकर बड़े समझौतों में बदलती है या फिर यह सिर्फ रणनीतिक कूटनीति साबित होगी।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।