सतना सेंट्रल जेल में अनोखी प्रेम कहानी: लेडी जेलर ने उम्रकैद काट चुके कैदी से रचाई शादी
NTN NEWS REPORT// सतना। मध्य प्रदेश के सतना सेंट्रल जेल से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। जेल की असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट फिरोजा खातून ने उम्रकैद की सजा काट चुके पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह से विवाह कर लिया। सामाजिक और धार्मिक बंधनों को पीछे छोड़ दोनों ने 5 मई को छतरपुर जिले के लवकुश नगर में वैदिक रीति-रिवाज से शादी रचाई। अब यह विवाह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

जेल में हुई थी पहली मुलाकात
जानकारी के मुताबिक, फिरोजा खातून वर्ष 2019 में सतना सेंट्रल जेल में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के पद पर पदस्थ हुई थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात धर्मेंद्र सिंह से हुई, जो छतरपुर जिले के चंदला क्षेत्र का निवासी है। धर्मेंद्र वर्ष 2007 में एक पार्षद की हत्या और शव दफनाने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था।
जेल प्रशासन से जुड़े वारंट और अन्य कार्यों में धर्मेंद्र सहयोग करता था। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती और बाद में प्रेम संबंध में बदल गई।
अच्छे आचरण के चलते मिली थी रिहाई
धर्मेंद्र सिंह को करीब 14 वर्ष की सजा पूरी करने और अच्छे आचरण के आधार पर वर्ष 2022 में जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आने के बाद भी दोनों संपर्क में रहे और अपने रिश्ते को शादी का नाम देने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि समाज और लोकलाज से बचने के लिए धर्मेंद्र ने शादी के कार्ड में अपना नाम भी बदला था। इसके बाद 5 मई को लवकुश नगर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों विवाह बंधन में बंध गए।
परिवार ने नहीं दिया साथ, विहिप नेता ने किया कन्यादान
इस विवाह में धर्म की दीवारें भी टूटती नजर आईं। बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून के मुस्लिम परिवार ने इस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया और शादी समारोह में शामिल नहीं हुआ।

ऐसे में विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने आगे आकर फिरोजा का कन्यादान किया। शादी समारोह में बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
इलाके में चर्चा का विषय बनी शादी
सतना सेंट्रल जेल के अधिकारियों, कर्मचारियों और कैदियों ने भी नवविवाहित दंपती को शुभकामनाएं दी हैं। यह अनोखी प्रेम कहानी अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे प्रेम, विश्वास और सामाजिक बंधनों से ऊपर उठकर लिए गए फैसले के रूप में देख रहे हैं।