
“जलावर्धन या जलजंजाल?”: जांजगीर मुख्यालय में पाइपलाइन कार्य पर गंभीर सवाल, आवाज उठाने वालों को भी ‘सावधान’ रहने की सलाह!
“सही काम की मांग की तो बन सकते हैं आरोपी!” —हसदेव विहार हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में निर्माण अव्यवस्था से रहवासी त्रस्त
NTN NEWS REPORT// जांजगीर। नगर पालिका परिषद जांजगीर द्वारा संचालित जलावर्धन योजना का उद्देश्य शहर को बेहतर पेयजल सुविधा देना है, लेकिन जांजगीर-चांपा मुख्यालय नगर के वार्ड क्रमांक 19 स्थित हसदेव विहार हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में यह योजना अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय नागरिकों ने कार्य में अनियमितता, गुणवत्ता की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता के गंभीर आरोप लगाए हैं।
25 जनवरी की खुदाई, आज तक अधूरी मरम्मत

कॉलोनीवासियों के अनुसार 25 जनवरी को पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों की खुदाई शुरू की गई थी। नगर पालिका के अधिकारियों और सीएमओ द्वारा आश्वासन दिया गया था कि 15 दिनों के भीतर गड्ढों को विधिवत भरकर सड़क को पूर्ववत कर दिया जाएगा।

लेकिन आज तक न तो सड़कों की समुचित मरम्मत हुई है और न ही कार्य की गुणवत्ता की किसी स्वतंत्र जांच की जानकारी सामने आई है। कई स्थानों पर गड्ढे खुले पड़े हैं, जिससे आए दिन बच्चे, बुजुर्ग और वाहन चालक हादसे का शिकार हो रहे हैं।
पाइपलाइन में लीकेज, पानी की बर्बादी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगहों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है और लीकेज हो रहा है। भीषण गर्मी के मौसम में, जब शासन-प्रशासन जल संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश जारी करता है, तब जलावर्धन योजना के अंतर्गत पानी की बर्बादी होना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।



CPHEEO गाइडलाइन के अनुसार पाइपलाइन बिछाने के बाद प्रेशर टेस्टिंग और लीकेज जांच अनिवार्य है। वहीं, PWD मानक स्पष्ट करते हैं कि सड़क कटिंग के बाद निर्धारित समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पुनर्स्थापन कार्य किया जाना चाहिए।
यदि इन मापदंडों का पालन नहीं हो रहा है तो यह न केवल तकनीकी कमी बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी का प्रश्न भी है।
ठेकेदार की मनमानी? शिकायत पर ‘काम छोड़ने’ की धमकी
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि गुणवत्तापूर्ण कार्य की मांग करने पर ठेकेदार द्वारा पूर्व में काम छोड़कर चले जाने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, यह भी आरोप है कि कई बार रात के अंधेरे में जेसीबी लाकर गड्ढों को जल्दबाजी में पाटने और कमियों को छिपाने का प्रयास किया जाता है।
निवासियों का कहना है कि कार्य की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी आते तो हैं, लेकिन औपचारिकता निभाकर लौट जाते हैं।शायद अब समस्या को देखते हुए जिले के मुखिया आए तब समस्याओं का समाधान हो सके…
“सावधान! आवाज उठाई तो आप भी घेरे में आ सकते हैं”
स्थानीय लोगों में यह भय भी व्याप्त है कि यदि कोई नागरिक ठेकेदार या नगर पालिका अधिकारियों से मापदंडों के अनुरूप कार्य करने की मांग करता है, तो उसके खिलाफ “शासकीय कार्य में बाधा डालने”, “बहस या हुज्जतबाजी करने” जैसे आरोप लगाए जा सकते हैं?
ऐसे आरोपों की आशंका के कारण कई नागरिक खुलकर सामने आने से हिचक रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सही कार्य के लिए आवाज उठाना ही जोखिम भरा हो जाए, तो आमजन अपनी समस्या किसके समक्ष रखें?
नगर के अन्य क्षेत्रों में भी असंतोष
हसदेव विहार हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी ही नहीं, नगर के अन्य वार्डों में भी जलावर्धन योजना के क्रियान्वयन को लेकर असंतोष की चर्चा है। सवाल उठ रहा है कि—
- क्या कार्य की नियमित गुणवत्ता जांच हो रही है?
- क्या ठेकेदार और अधिकारियों के बीच पारदर्शिता है?
- क्या नगर पालिका अधिनियम के तहत तय दायित्वों का पालन हो रहा है?
जांच और जवाबदेही की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि—
- जलावर्धन योजना के तहत हुए कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए।
- सड़क पुनर्स्थापन और पाइपलाइन गुणवत्ता की साइट निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- लापरवाही पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
मुख्यालय में ही ऐसी स्थिति, तो बाकी का क्या?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि जिला मुख्यालय के वार्ड में ही इस प्रकार की स्थिति है, तो दूरस्थ क्षेत्रों में क्या हाल होगा?
नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों का विरोध नहीं, बल्कि मापदंडों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित क्रियान्वयन की मांग की जा रही है। यदि सही कार्य की मांग करना ही जोखिम बन जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और आमजन को राहत देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।