
जांजगीर-चांपा में कोयले का काला खेल: बिना खदान के कैसे फल-फूल रहा करोड़ों का कारोबार?
रात के अंधेरे में डस्ट और मिक्सिंग से बन रहे करोड़पति, विभागीय चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल!
NTN NEWS REPORT// जांजगीर-चांपा जिले में इन दिनों कोल डिपो की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसी अनुपात में कोयले के कारोबार को लेकर संदेह और सवाल भी गहराते जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिले में न तो कोयले का कोई उत्पादन है और न ही कोई खदान, इसके बावजूद यहां कोयले का कारोबार करोड़ों में खेला जा रहा है।

जहां आम लोग कोयले की कालिख से दूरी बनाना चाहते हैं, वहीं कोयले से जुड़े कुछ चेहरे अचानक सड़क से उठकर करोड़ों की दुनिया में पहुंच चुके हैं। यह परिवर्तन स्वाभाविक है या किसी सुनियोजित खेल का नतीजा—यही आज जिले का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बन गया है।
कोल डिपो की आड़ में डस्ट का खेल
जिले के मुख्यालय से सटे एक बड़े कोल डिपो को लेकर चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, यहां कोयले के साथ-साथ डस्ट (राखड़) का अवैध खेल बड़े पैमाने पर संचालित हो रहा है।
खबर यह है कि रात के अंधेरे में कोयले को डस्ट के रूप में ढालकर उसे खपाया जा रहा है और इसी प्रक्रिया से लाखों-करोड़ों का वारा-न्यारा किया जा रहा है।
यह कोई एक डिपो तक सीमित मामला नहीं बताया जा रहा, बल्कि जिले के कई कोल डिपो इस कथित खेल में संलिप्त बताए जा रहे हैं। यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब इसके संकेत खुलकर सामने आने लगे हैं।
मिक्सिंग, सेटिंग और ‘प्रबंधन’ के नाम पर वसूली
सूत्रों का दावा है कि कोयले में मिक्सिंग के इस खेल को अंजाम देने वाले लोग खुलेआम बड़ी-बड़ी “सेटिंग” की बातें करते हैं।
बताया जाता है कि ये लोग अपने प्रबंधन से विभागीय सेटिंग के नाम पर भारी रकम वसूलते हैं, लेकिन असल में बड़ी रकम खुद ही हजम कर जाते हैं। नतीजा यह होता है कि जब मामला उजागर होता है तो बदनामी उन लोगों की होती है, जिनका सीधा या परोक्ष रूप से नाम जोड़ दिया जाता है।
विभागीय कार्रवाई पर सवाल
जिस तरह से जांजगीर-चांपा में कोयले का यह कथित काला खेल चल रहा है, उसने संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। न तो डिपो की संख्या पर कोई स्पष्ट नियंत्रण दिख रहा है और न ही कोयले की गुणवत्ता, आवक-जावक और स्टॉक का प्रभावी निरीक्षण।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कड़ाई नहीं बरती गई, तो यह अवैध कारोबार न सिर्फ राजस्व को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डालेगा।
सख्त कार्रवाई की जरूरत
अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग इस पूरे मामले की गहन जांच करे—
- कोल डिपो की वैधता
- कोयले की आवक के स्रोत
- डस्ट और मिक्सिंग की शिकायतें
- और कथित सेटिंग नेटवर्क
इन सभी बिंदुओं पर सख्त कार्रवाई कर ही कोयले के इस काले खेल पर अंकुश लगाया जा सकता है।
जांजगीर-चांपा में कोयले का यह खेल आखिर चल कैसे रहा है—यह सवाल अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि जवाब मांगता हुआ सच बन चुका है साथ ही आखिर कौन कोयले और डस्ट के मिक्सिंग में कर रहा करोड़ों का वारा न्यारा?