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जांजगीर-चांपास्थानीय समाचार / शहर की खबरें

भारत की आत्मा की आवाज़ थे अटल बिहारी वाजपेयी जांजगीर में अटल स्मृति सम्मेलन, सुशासन और राष्ट्रसेवा पर वक्ताओं का प्रेरक उद्बोधन

NTN NEWS REPORT// जांजगीर। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में जांजगीर भाजपा कार्यालय में विधानसभा स्तरीय अटल स्मृति सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पितृपुरुषों के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर “अटल बिहारी वाजपेयी जिंदाबाद”, “भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी अमर रहें” के नारों से वातावरण गूंज उठा।

वाणी में मर्यादा, संकल्प में अटल – अंबेश जांगड़े

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष अंबेश जांगड़े ने कहा कि “वाणी में मर्यादा और संकल्प में अटल” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी के संपूर्ण व्यक्तित्व का सार है। उन्होंने कहा कि अटल जी की भाषा में सदैव शालीनता, संयम और गरिमा झलकती थी। वे असहमति में भी सम्मान बनाए रखते थे। उनकी वाणी में ओज था लेकिन अहंकार नहीं, स्पष्टता थी लेकिन कठोरता नहीं।

वहीं राष्ट्रहित से जुड़े निर्णयों में उनका संकल्प अडिग रहा। पोखरण परमाणु परीक्षण हो या सुशासन से जुड़े कठोर फैसले, उन्होंने कभी देश की गरिमा और आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया।

अटल बिहारी वाजपेयी भारत की आत्मा थे – भूपेन्द्र सवन्नी

क्रेडा अध्यक्ष एवं जांजगीर-चांपा विधानसभा प्रभारी वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेन्द्र सवन्नी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी भारत की आत्मा की आवाज़ थे।

उन्होंने कहा कि अटल जी के विचारों में भारत की सभ्यता बोलती थी, उनके शब्दों में लोकतंत्र की मर्यादा और उनके कर्मों में राष्ट्रसेवा की निष्ठा दिखाई देती थी। वे सत्ता में रहते हुए भी विनम्र, विरोध में शालीन और निर्णय में दृढ़ रहे। सवन्नी ने कहा कि 1999 के कारगिल युद्ध में देश की ऐतिहासिक विजय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सर्व शिक्षा अभियान को गति, संचार क्रांति, मोबाइल और दूरसंचार का विस्तार, तथा छत्तीसगढ़ राज्य का गठन अटल जी की दूरदर्शी सोच की देन है। आज छत्तीसगढ़ का अग्रणी राज्यों में शामिल होना भी उन्हीं की देन है। प्रदेश में उनके नाम से संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं आज भी जनता को लाभ पहुंचा रही हैं।

सुशासन का अटल मॉडल

वक्ताओं ने कहा कि 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला सुशासन दिवस अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शी शासन-नीति का प्रतीक है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में अटल जी की जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दिन को कार्यदिवस घोषित कर उनके योगदान को स्मरण किया जाता है।

देश को सुशासन की सरकार देने वाले नेता – नारायण चंदेल

पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी देश के ऐसे प्रशासक थे जिन्होंने भारत को सुशासन की सरकार दी। उन्होंने गठबंधन की सरकार को मर्यादा और स्थिरता के साथ चलाने का उदाहरण प्रस्तुत किया।

चंदेल ने अटल जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे सामान्य परिवार से उठकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े, 1952 में राजनीति में आए, भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने और स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लेकर जेल भी गए। वे 9 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा सांसद रहे तथा 1977-79 में विदेश मंत्री के रूप में भारत की वैश्विक छवि को सशक्त किया।
उन्होंने बताया कि 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में अटल जी की निर्णायक भूमिका रही। प्रधानमंत्री के रूप में उनके तीन कार्यकालों में लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आज भी देशवासियों को मिल रहा है।

बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रहे उपस्थित

इस अवसर पर व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक कार्तिकेश्वर स्वर्णकार, नगरपालिका अध्यक्ष प्रदीप नामदेव, रेखा गढ़वाल, अमर सुल्तानिया, जिला महामंत्री नंदनी रजवाड़े, जिला उपाध्यक्ष पंकज अग्रवाल सहित अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्रसेवा और सुशासन के संकल्प के साथ किया गया।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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