NTN REPORT// नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत के ढहने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि किसी भवन हादसे के लिए केवल मकान मालिक को जिम्मेदार ठहराकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। अदालत ने दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका को लेकर भी जवाब मांगा है।

पीजी और छात्रावासों का होगा सुरक्षा ऑडिट
हाईकोर्ट ने दिल्ली में पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच और ऑडिट पर जोर दिया है। अदालत के निर्देश के मुताबिक यह जांच की जानी है कि छात्र आवासों में भवन निर्माण की अनुमति, स्वीकृत नक्शे, संरचनात्मक सुरक्षा, अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण, अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा सहित निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
अदालत का फोकस इस बात पर भी है कि जिन इमारतों का इस्तेमाल पीजी के रूप में किया जा रहा है, वे भवन निर्माण और सुरक्षा नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
सत्य निकेतन हादसे की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश
हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना की MCD से उच्चस्तरीय जांच कराने को कहा है। जांच में यह पता लगाने के निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित इमारत के निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और भवन का इस्तेमाल पीजी के रूप में नियमों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं।
यदि जांच में नियमों की अनदेखी या अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
DU में हॉस्टल की कमी पर भी अदालत गंभीर
सुनवाई के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रावासों की कमी का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने माना कि पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहर से दिल्ली आने वाले अनेक छात्रों को निजी पीजी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से विश्वविद्यालय और छात्रों के लिए उपलब्ध आवासीय व्यवस्था का विस्तृत ब्योरा मांगा है। अधिकारियों को 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
हादसे में 7 लोगों की मौत, पांच छात्र शामिल
सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत के अचानक ढहने के बाद शुरू हुआ राहत और बचाव अभियान करीब 27 घंटे बाद सोमवार को समाप्त हुआ। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए गए हैं।
मृतकों में पांच छात्र शामिल हैं, जो अलग-अलग राज्यों से दिल्ली में पढ़ाई के लिए आए थे।
हादसे में जान गंवाने वाले छात्र
- अभिषेक — सोनभद्र, उत्तर प्रदेश
- युवराज सोनी — दुर्ग, छत्तीसगढ़
- पवन — औरैया, उत्तर प्रदेश
- अर्पित जहाज — देवास, मध्य प्रदेश
- अक्षत सिंह यादव — कटनी, मध्य प्रदेश
रविवार दोपहर इमारत के अचानक ढहने के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद बचाव दलों ने लंबे समय तक अभियान चलाकर मलबे में फंसे लोगों की तलाश की।
इमारत मालिक, पत्नी और बेटा गिरफ्तार
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि संपत्ति से जुड़े दस्तावेज उर्मिला के नाम पर थे, जबकि महेश इमारत के प्रबंधन का काम देखता था।
पुलिस ने मामले में लापरवाही और लोगों की जान को खतरे में डालने समेत संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि भवन का निर्माण और उसका पीजी के रूप में संचालन किन परिस्थितियों में किया जा रहा था।
MCD के पांच अधिकारी निलंबित
हादसे के बाद MCD ने भी बड़ी कार्रवाई की है। दक्षिण क्षेत्र के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं—
- राकेश कुमार — डिप्टी कमिश्नर
- रणवीर सिंह — सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर
- ललित कुमार गोयल — एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (बिल्डिंग)
- सुनील चौहान — असिस्टेंट इंजीनियर
- आशीष कुमार — जूनियर इंजीनियर
सभी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
अब जांच के केंद्र में भवन की मंजूरी और प्रशासनिक निगरानी
सत्य निकेतन हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल भवन की वैधता, निर्माण अनुमति और प्रशासनिक निगरानी को लेकर उठ रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल भवन मालिक पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं है। अब यह भी जांच का विषय होगा कि संबंधित विभागों ने भवन निर्माण और उसके पीजी के रूप में संचालन के दौरान अपने स्तर पर आवश्यक निरीक्षण और कार्रवाई की थी या नहीं।
अदालत की सख्ती के बाद दिल्ली के अन्य पीजी और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था की भी व्यापक जांच होने की संभावना है। खासकर अवैध मंजिलों, संरचनात्मक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन पर प्रशासन की निगरानी बढ़ सकती है।
नोट: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।