
अमेरिका-ईरान युद्ध: 24 घंटे में दो अमेरिकी फाइटर जेट क्रैश, होर्मुज को लेकर ट्रंप की 48 घंटे की चेतावनी
NTN NEWS REPORT// 5 अप्रैल 2026। पिछले पांच हफ्तों से जारी अमेरिका-ईरान युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक और अनिश्चित दौर में पहुंच गया है। बीते 24 घंटों में घटनाक्रम ने संघर्ष को और तेज कर दिया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है, जबकि बचाव अभियान में लगे हेलीकॉप्टर भी हमलों की चपेट में आए हैं।
24 घंटे में दो फाइटर जेट क्रैश
ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना का एक F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान मार गिराया गया। अमेरिका ने एक पायलट को सुरक्षित निकाल लेने की पुष्टि की है, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। उसके ईरान में कहीं छिपे होने की आशंका जताई जा रही है।

एक अन्य घटना में कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहा अमेरिकी A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि उसका पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा। लगातार दो विमानों के नुकसान को इस युद्ध में अमेरिकी सेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
हेलीकॉप्टर भी बने निशाना
ईरानी दावों के अनुसार, कुवैत स्थित ‘कैंप बुहरिंग’ पर हुए हमले में अमेरिकी सेना का एक बोइंग CH-47 चिनूक हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बचाव अभियान में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी हमलों की चपेट में आए हैं।
इजरायल पर भी हमला
शनिवार को ईरान ने इजरायल के किरयात शमोना शहर को निशाना बनाया। हमले के बाद इलाके में धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया और पास के एक घर में आग लग गई।
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास विस्फोट
ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट परिसर के बेहद करीब एक प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह ईरान का एकमात्र चालू परमाणु संयंत्र है, जिसे रूस की रोसाटॉम कंपनी संचालित करती है। हमला मौसम विभाग की इमारत के पास हुआ, हालांकि मुख्य रिएक्टर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
कूटनीति पर असर नहीं: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा,
“मिडिल ईस्ट में अमेरिकी लड़ाकू विमानों के गिरने का कूटनीति और बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बिल्कुल नहीं। यह युद्ध है। हम युद्ध में हैं।”
ट्रंप के इस बयान से साफ है कि वॉशिंगटन फिलहाल सैन्य दबाव बनाए रखने के पक्ष में है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर 48 घंटे की चेतावनी
ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को तय समय सीमा में नहीं खोला गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अब केवल 48 घंटे बचे हैं, डेडलाइन पार होते ही अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा।
कुछ दिन पहले तक ट्रंप का रुख अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रहा था। उन्होंने बातचीत को लेकर उम्मीद जताई थी और 6 अप्रैल तक की समय-सीमा बढ़ाई थी। लेकिन अब उनके तेवर आक्रामक हो गए हैं।
होर्मुज के द्वीपों पर कब्जे की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित ईरानी द्वीपों—खार्ग और केशम—पर नियंत्रण की तैयारी कर रहा है। मिडिल ईस्ट में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की योजना भी सामने आई है, जिससे संकेत मिलता है कि युद्ध का अगला चरण और आक्रामक हो सकता है।
यूएई पर सहयोग के आरोप
ईरान का आरोप है कि हालिया हमलों में यूएई की जमीन या इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया। साथ ही आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए टारगेटिंग में मदद मिलने का दावा भी किया गया है। हालांकि यूएई की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर हमले और बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
ट्रंप के बदलते बयान बने चर्चा का विषय
28 फरवरी को इजरायल के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की शुरुआत के बाद से ट्रंप के बयान कई बार बदले हैं। शुरुआत में उन्होंने कहा था कि इस युद्ध का तेल से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन बाद में ईरान के तेल पर नियंत्रण की बात करने लगे।
कभी वे जंग खत्म होने का संकेत देते हैं, तो कभी बुनियादी ढांचे पर लंबी बमबारी की चेतावनी देते हैं। इस अनिश्चित रुख ने वैश्विक कूटनीति और बाजारों में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
आगे क्या?
ईरान की ओर से ट्रंप की 48 घंटे की चेतावनी पर अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन जिस तेजी से हालात बदल रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिन इस युद्ध की दिशा तय करेंगे।
मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता से जुड़ा बड़ा संकट बनता जा रहा है।