NTN REPORT// नई दिल्ली/कोलकाता, 3 मई 2026।
4 मई को होने वाली मतगणना से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की तैनाती को नियमों के अनुरूप बताते हुए के सर्कुलर में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला
टीएमसी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मतगणना टेबल पर केंद्रीय या पब्लिक सेक्टर (PSU) कर्मचारियों की नियुक्ति को वैध ठहराया गया था। दरअसल, चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल को एक निर्देश जारी कर कहा था कि हर काउंटिंग टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पीएसयू से होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति राज्य या केंद्र—दोनों में से किसी भी पूल से की जा सकती है। अदालत ने कहा कि इस मामले में किसी नए आदेश की आवश्यकता नहीं है और “कोई आदेश देने की जरूरत नहीं” कहते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग के उस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें कहा गया है कि सर्कुलर को उसके “पूर्ण अर्थ और भावना” के साथ लागू किया जाएगा।
टीएमसी ने नरम किया रुख
सुनवाई के दौरान टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुरुआत में चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए।
हालांकि बाद में पार्टी ने अपना रुख थोड़ा नरम करते हुए कहा कि वह सिर्फ इतना चाहती है कि हर टेबल पर कम से कम एक कर्मचारी राज्य सरकार का भी हो।
सिब्बल की दलीलें और कोर्ट की प्रतिक्रिया
कपिल सिब्बल ने दलील दी कि:
- पहले से ही माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि मौजूद होते हैं
- ऐसे में हर टेबल पर अतिरिक्त केंद्रीय कर्मचारी की अनिवार्यता क्यों?
- आयोग की बैठकों की जानकारी साझा नहीं की जा रही
इस पर अदालत ने कहा कि नियमों की व्याख्या स्पष्ट है और केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को गलत नहीं ठहराया जा सकता।
विवाद की जड़
टीएमसी का आरोप है कि केंद्रीय कर्मचारी सत्तारूढ़ दल के प्रभाव में काम कर सकते हैं। वहीं, हाई कोर्ट पहले ही इस आशंका को खारिज कर चुका है और चुनाव आयोग के फैसले को वैध ठहरा चुका है।
अब आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 4 मई को होने वाली मतगणना चुनाव आयोग के तय नियमों के तहत ही कराई जाएगी। इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि काउंटिंग प्रक्रिया में केंद्रीय और पीएसयू कर्मचारियों की भागीदारी जारी रहेगी।