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जिला अस्पताल के अधूरे स्टाफ क्वार्टर बने शराबखोरी और अश्लील गतिविधियों का अड्डा, करोड़ों की बिल्डिंग खंडहर में तब्दील,शराबखोर और जिस्म के सौदागरों का बना आशियाना!

NTN REPORT// जांजगीर 15.05.26। जिला अस्पताल परिसर में स्टाफ के लिए बनाए जा रहे नए आवासीय क्वार्टर बदहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे इन भवनों की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें देखकर खंडहर भी बेहतर नजर आए। निर्माण एजेंसी सीजीएमएससी (CGMSC) द्वारा बनाए जा रहे इन स्टाफ क्वार्टरों में जहां समय पर काम पूरा होने पर अस्पताल कर्मियों के परिवार रह सकते थे, वहीं अब यह जगह शराबखोरी, धूम्रपान और कथित अश्लील गतिविधियों का केंद्र बन चुकी है।

निरीक्षण में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

एनटीएन रिपोर्ट द्वारा किए गए निरीक्षण में निर्माणाधीन भवनों की स्थिति बेहद जर्जर पाई गई। कई हिस्सों में भवन टूट-फूट की स्थिति में नजर आए। जगह-जगह गंदगी फैली हुई थी। निरीक्षण के दौरान भवनों के अंदर बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें, धूम्रपान सामग्री, कंडोम और कथित उत्साहवर्धक दवाइयों के पैकेट मिले। यह हालत लगभग पूरे घरों में देखने को मिली है यह विभाग के कार्यशैली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह है और घोर लापरवाही है विष्णु देव सरकार के सुशासन के मंशा पर बहुत बड़ा दाग है जिसकी जवाबदेही तय कर कड़ी कार्यवाही करने की सख्त जरूरत है।स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है और भवनों का गलत गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सरकारी संपत्ति की निगरानी आखिर कौन करेगा।

समय पर पूरा होता निर्माण तो स्टाफ को मिलती सुविधा

जानकारी के अनुसार, यह स्टाफ क्वार्टर जिला अस्पताल के कर्मचारियों के रहने के लिए बनाए जा रहे थे। यदि निर्माण कार्य समय पर पूरा हो जाता, तो कई अस्पताल कर्मियों और उनके परिवारों को आवास की सुविधा मिल सकती थी। लेकिन वर्षों से अधूरा पड़ा निर्माण अब बदहाली और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है।

जिम्मेदारी से बचते नजर आए अधिकारी

मामले में जब सीजीएमएससी के कार्यपालन अभियंता आर.के. प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बजट की कमी के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका और भवन का हैंडओवर भी नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त बजट के लिए पत्राचार किया गया है और भविष्य में काम पूरा होने की संभावना है।

भवनों में हो रही कथित अश्लील गतिविधियों और शराबखोरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें भी इस प्रकार की जानकारी मिली थी और अब मामला संज्ञान में आने के बाद वे इसकी जांच कराएंगे।

वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) अनीता श्रीवास्तव ने कहा कि भवन का हैंडओवर अभी तक स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिला है। इसलिए वहां क्या गतिविधियां हो रही हैं, इसकी जिम्मेदारी उनके विभाग की नहीं है। उन्होंने कहा कि हैंडओवर होने के बाद ही विभाग इस संबंध में कोई कार्रवाई करेगा।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

पूरा मामला सरकारी निर्माण कार्यों में लापरवाही और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं और कर्मचारियों के लिए बजट उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी ओर अधूरे निर्माण और निगरानी के अभाव में सरकारी भवन असामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह भवन इसी तरह शराबखोरी और गलत गतिविधियों का अड्डा बने रहेंगे।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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