मालवाहक वाहनों में सवारियां ढोने का खेल: शादी-ब्याह सीजन में बढ़ा खतरा, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल!
NTN NEWS REPORT बिलासपुर। शादी-ब्याह का सीजन शुरू होते ही एक बार फिर सड़कों पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। मालवाहक वाहनों—जैसे छोटा हाथी, ट्रैक्टर, ट्रक और अन्य माल ढोने वाले वाहनों—में खुलेआम सवारियों को ठूंस-ठूंसकर ले जाया जा रहा है। यह न केवल यातायात नियमों की खुली अनदेखी है, बल्कि यात्रियों की जान को भी सीधा जोखिम में डालने जैसा है।

ट्रैफिक नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां
शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में आसानी से देखा जा सकता है कि मालवाहक वाहनों में बड़ी संख्या में लोगों को बैठाकर परिवहन किया जा रहा है। कई बार इन वाहनों में क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं। न तो सुरक्षा के इंतजाम होते हैं और न ही यात्रियों के बैठने की उचित व्यवस्था।
यातायात नियमों के अनुसार मालवाहक वाहन केवल सामान ढोने के लिए अधिकृत होते हैं। इनमें सवारी ले जाना स्पष्ट रूप से नियमों के विरुद्ध है। इसके बावजूद यह अवैध प्रचलन लगातार जारी है।
हादसों के बाद भी नहीं सुधर रही व्यवस्था
पूर्व में कई बार ऐसे मामलों में दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें मालवाहक वाहनों में सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं और कई बार जान भी गई। बावजूद इसके, न तो वाहन चालकों में भय नजर आता है और न ही जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई सख्त कार्रवाई दिखती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बिलासपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बढ़ी समस्या
बिलासपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शादी-ब्याह के आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए मालवाहक वाहनों का उपयोग आम बात हो गई है। आर्थिक कारणों और सुविधा के नाम पर लोग जोखिम उठाने से भी नहीं हिचक रहे हैं।
विशेष रूप से ग्रामीण परिवेश में ट्रैक्टर-ट्रॉली और छोटे मालवाहक वाहनों में बारातियों और अन्य सवारियों को ढोते हुए देखा जा सकता है।
जिम्मेदार विभागों से कड़ी कार्रवाई की मांग
ऐसे में पुलिस प्रशासन और यातायात विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि सख्ती से चालानी कार्रवाई और जब्ती की प्रक्रिया अपनाई जाए, तो इस अवैध प्रथा पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
पुलिस प्रशासन को चाहिए कि:
- मालवाहक वाहनों की नियमित जांच अभियान चलाया जाए
- सवारी ढोते पाए जाने पर तत्काल चालान और वाहन जब्ती की कार्रवाई हो
- चालकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सख्त संदेश दिया जाए
- आम जनता को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाए
उदाहरण पेश करने की जरूरत
जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करें जिससे लोग मालवाहक वाहनों में सफर करने से कतराएं। यदि एक-दो मामलों में सख्त और सार्वजनिक कार्रवाई की जाती है, तो इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल देखने वाली बात होगी कि बिलासपुर पुलिस प्रशासन और यातायात विभाग इस गंभीर मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाते हैं और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस तरह का संदेश देते हैं।
शादी-ब्याह की खुशियां कहीं मातम में न बदल जाएं, इसके लिए समय रहते प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है।