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राजनीति

केरलम में ‘सतीशन युग’ की शुरुआत: कैसे वीडी सतीशन ने वेणुगोपाल को पीछे छोड़ हासिल की मुख्यमंत्री की कुर्सी!

कांग्रेस ने 10 दिन के मंथन के बाद लिया फैसला

NTN REPORT// केरलम में एक दशक बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस ने आखिरकार मुख्यमंत्री पद के लिए वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। गुरुवार को दिल्ली में पार्टी की केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी ने उनके नाम का आधिकारिक ऐलान किया। चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला जैसे दिग्गज नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन अंततः सियासी बाजी सतीशन के हाथ लगी।

प्रतीकात्मक AI तस्वीर

कांग्रेस हाईकमान ने करीब दस दिनों तक लगातार मंथन और राजनीतिक समीकरणों पर विचार करने के बाद यह फैसला लिया। इस पूरी प्रक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया कि केरल की जमीनी राजनीति में फिलहाल वीडी सतीशन का प्रभाव सबसे मजबूत माना जा रहा है।

जमीनी पकड़ ने दिलाई जीत

वीडी सतीशन को केरल में कांग्रेस की वापसी का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने पिछले पांच वर्षों में विधानसभा के भीतर सरकार को लगातार घेरा और अपनी आक्रामक लेकिन तथ्यपरक शैली से अलग पहचान बनाई।

सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी जमीनी पकड़ मानी गई। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और युवा विधायकों का बड़ा वर्ग उनके समर्थन में खुलकर सामने आया। यही कारण रहा कि दिल्ली दरबार में मजबूत पकड़ रखने वाले केसी वेणुगोपाल भी इस मुकाबले में पीछे रह गए।

2021 की हार के बाद शुरू हुआ सतीशन का उदय

साल 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ की हार के बाद पार्टी के भीतर बड़े बदलाव की मांग उठी थी। उस समय तक केसी वेणुगोपाल का संगठन पर मजबूत प्रभाव माना जाता था, लेकिन लगातार हार के बाद कार्यकर्ताओं के बीच यह भावना बनने लगी थी कि पार्टी को नए नेतृत्व और नई रणनीति की जरूरत है।

इसी दौर में वीडी सतीशन ने पार्टी के भीतर मौजूद ‘ग्रुप पॉलिटिक्स’ को खुली चुनौती दी। केरल कांग्रेस लंबे समय से ‘ए ग्रुप’ और ‘आई ग्रुप’ की राजनीति से प्रभावित रही है, लेकिन सतीशन ने खुद को इन पारंपरिक गुटों से अलग रखते हुए एक नए नेतृत्व के रूप में स्थापित किया।

राहुल गांधी की पसंद क्यों बने सतीशन?

केसी वेणुगोपाल को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है और संगठन में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है। बावजूद इसके, राहुल गांधी राज्यों में मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व को बढ़ावा देने के पक्षधर माने जाते हैं।

सूत्रों के मुताबिक सतीशन की साफ-सुथरी छवि, पांच बार विधायक रहने का अनुभव और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता ने हाईकमान को प्रभावित किया। कांग्रेस नेतृत्व ने यह समझ लिया था कि केरल में सत्ता को स्थिर रखने के लिए ऐसे चेहरे की जरूरत है जो संगठन और जनता दोनों के बीच मजबूत पकड़ रखता हो।

उपचुनाव से बचने की रणनीति भी बनी वजह

केसी वेणुगोपाल फिलहाल लोकसभा सांसद हैं। यदि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता तो उन्हें अपनी लोकसभा सीट छोड़नी पड़ती और विधानसभा सदस्य बनने के लिए किसी विधायक की सीट खाली करानी पड़ती। इससे एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने की स्थिति बनती।

वहीं वीडी सतीशन पहले से विधायक हैं, इसलिए उनके मुख्यमंत्री बनने पर किसी तरह के उपचुनाव की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कांग्रेस हाईकमान ने इस व्यावहारिक पहलू को भी गंभीरता से ध्यान में रखा।

नायर समुदाय में मजबूत पकड़ का मिला फायदा

वीडी सतीशन और केसी वेणुगोपाल दोनों ही नायर समुदाय से आते हैं, जो केरल की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है। हालांकि सतीशन लगातार पांच बार नायर बहुल सीट से चुनाव जीतते रहे हैं, जिससे इस समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

कांग्रेस को उम्मीद है कि सतीशन के नेतृत्व में नायर वोट बैंक को फिर से मजबूती से अपने पक्ष में जोड़ा जा सकेगा। हाल के वर्षों में भाजपा ने इस वर्ग में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश की थी।

अल्पसंख्यकों और मुस्लिम लीग का भी मिला समर्थन

केरल की राजनीति में ईसाई और मुस्लिम समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वीडी सतीशन ने वर्षों से दोनों समुदायों के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाई है।

ईसाई समुदाय के चर्च कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी और संतुलित राजनीतिक छवि ने उन्हें अल्पसंख्यकों के बीच भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित किया। वहीं कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी शुरू से उनके समर्थन में खड़ी दिखाई दी।

मुस्लिम लीग नहीं चाहती थी कि दिल्ली से कोई नेता आकर मुख्यमंत्री बने। पार्टी ने सतीशन के पक्ष में मजबूती से पैरवी की, जिसका असर हाईकमान के फैसले में भी दिखाई दिया।

युवा नेतृत्व और भविष्यवादी सोच बनी ताकत

वीडी सतीशन को कांग्रेस में पीढ़ीगत बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में वे सबसे कम उम्र के नेताओं में शामिल थे।

नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उन्होंने रोजगार, शिक्षा सुधार, ब्रेन ड्रेन और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया। उनकी विकासवादी और भविष्यवादी सोच ने युवा मतदाताओं के बीच उन्हें लोकप्रिय बनाया।

भाजपा और एलडीएफ के खिलाफ संतुलित चेहरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सतीशन भाजपा और एलडीएफ दोनों के खिलाफ कांग्रेस के लिए संतुलित चेहरा साबित हो सकते हैं।

वे हिंदू पहचान बनाए रखते हुए भी अल्पसंख्यकों के बीच लोकप्रिय हैं। इसी कारण भाजपा के लिए उन पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाना आसान नहीं माना जाता। दूसरी ओर उन्होंने खुद को उदारवादी और तर्कशील नेता के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे वे वामपंथी विचारधारा वाले मतदाताओं को भी आकर्षित करने में सफल रहे।

‘नया केरल, नई कांग्रेस’ की दिशा में बड़ा कदम

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि वीडी सतीशन के नेतृत्व में पार्टी केरल में नई राजनीतिक शुरुआत कर सकती है। उनका मुख्यमंत्री बनना सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और नई राजनीतिक सोच का संकेत माना जा रहा है।

सतीशन एक ओर नायर समुदाय के जरिए हिंदू वोटों को साधते हैं तो दूसरी ओर अपनी धर्मनिरपेक्ष और बौद्धिक छवि के जरिए अल्पसंख्यकों, युवाओं और उदारवादी मतदाताओं को भी जोड़ने में सक्षम माने जाते हैं। इसी वजह से कांग्रेस ने उन्हें “नया केरल, नई कांग्रेस” के विजन का सबसे मजबूत चेहरा मानते हुए राज्य की कमान सौंपी है।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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