तालाब में डूबकर हुई मौत पर बीमा दावा ठुकराना बीमा कंपनी को पड़ा महंगा, जिला उपभोक्ता आयोग ने 10.35 लाख रुपये भुगतान का दिया आदेश
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जांजगीर-चांपा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी द्वारा दुर्घटना बीमा राशि देने से इंकार को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना है। आयोग ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को शिकायतकर्ता को 10 लाख रुपये की बीमा राशि, 30 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति तथा 5 हजार रुपये वाद व्यय सहित कुल 10.35 लाख रुपये 45 दिनों के भीतर अदा करने का आदेश दिया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर आदेश की तारीख से भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

जनधन खाते से कराया था दुर्घटना बीमा
मामले के अनुसार, सुशीला बाई बिन्झवार, निवासी तहसील बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा के पति भीखारी लाल का छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक में जनधन बचत खाता था। उन्होंने 30 अक्टूबर 2023 को 500 रुपये प्रीमियम जमा कर एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से ग्रुप पर्सनल एक्सीडेंट बीमा कराया था। यह बीमा 29 अक्टूबर 2024 तक प्रभावी था और सुशीला बाई नामित (नॉमिनी) थीं।
बीमा अवधि के दौरान तालाब में डूबने से हुई थी मौत
बीमा अवधि के दौरान 28 जनवरी 2024 को भीखारी लाल की तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई। इसके बाद नॉमिनी ने बीमा कंपनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत किया।
बीमा कंपनी ने मिर्गी का हवाला देकर किया था दावा खारिज
बीमा कंपनी ने दावा अस्वीकार करते हुए कहा कि मृतक मिर्गी से पीड़ित था तथा मिर्गी की जटिलताओं के कारण पानी में डूबने से उसकी मृत्यु हुई, इसलिए बीमा राशि देय नहीं है।
आयोग ने कहा—दावा खारिज करने का कोई ठोस आधार नहीं
बीमा कंपनी के निर्णय से असंतुष्ट होकर सुशीला बाई ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जांजगीर-चांपा में परिवाद प्रस्तुत किया।
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी एवं सदस्य महिमा सिंह ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र, दस्तावेज एवं तर्कों का विस्तृत परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताया गया है तथा कहीं भी मिर्गी के कारण मृत्यु होने का उल्लेख नहीं है।
आयोग ने यह भी पाया कि आकस्मिक मृत्यु सूचना पंजी में मृतक के मिर्गी रोगी होने का उल्लेख अवश्य है, लेकिन बीमा कंपनी यह सिद्ध करने के लिए कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी कि मृत्यु मिर्गी के कारण हुई थी।
सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना
माननीय उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांतों का उल्लेख करते हुए आयोग ने माना कि बिना पर्याप्त एवं वैधानिक आधार के बीमा दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी (Deficiency in Service) तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।
45 दिनों में भुगतान का आदेश
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के अंतर्गत दायर शिकायत स्वीकार करते हुए आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को—
- बीमा राशि : 10,00,000 रुपये
- मानसिक क्षतिपूर्ति : 30,000 रुपये
- वाद व्यय : 5,000 रुपये
कुल 10,35,000 रुपये आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर अदा करे। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो आदेश की तिथि से वास्तविक भुगतान तक संपूर्ण आदेशित राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।