
वार्ड नंबर 19 में गंदगी का अंबार: शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, परिवार चार साल से परेशान
नगर पालिका और जिला प्रशासन के दावों पर उठे सवाल, जनदर्शन में गुहार के बाद भी नहीं मिली राहत
NTN NEWS REPORT// जांजगीर चाम्पा। स्वच्छता और त्वरित कार्रवाई के दावे करने वाले नगरीय निकाय और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर वार्ड नंबर 19 की एक घटना गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां रहने वाले दीपक सिंह का परिवार पिछले तीन से चार वर्षों से गंदगी और दूषित पानी की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
घर के सामने बहाया जा रहा गंदा पानी और मल-मूत्र

पीड़ित परिवार का आरोप है कि पड़ोसी द्वारा घर के सामने नियमित रूप से मवेशियों का मल-मूत्र और गंदा पानी बहाया जा रहा है। इससे न केवल दुर्गंध फैल रही है, बल्कि संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्थिति यह है कि घर के बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है और बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
दीपक सिंह के अनुसार, कई बार पड़ोसी को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार अनसुना कर दिया गया। उल्टा विवाद और झगड़े की स्थिति निर्मित कर दी जाती है। आरोप है कि अब तो कई स्थानों से सड़क पर गंदगी बहाई जा रही है, जिससे पूरा क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।
नगर पालिका में शिकायत, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
मामले की लिखित और मौखिक शिकायत नगर पालिका में की गई। इसके बावजूद आज तक कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचा। न तो समस्या का समाधान किया गया और न ही किसी प्रकार की चेतावनी या कार्रवाई संबंधित व्यक्ति के खिलाफ की गई।
जनदर्शन में भी लगाई गुहार

पीड़ित परिवार ने जिला कलेक्टर के समक्ष आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में भी अपनी समस्या रखी। बताया गया कि तीन से चार अलग-अलग कलेक्टरों के समक्ष इस मामले में आवेदन दिया गया, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। अब तक न तो स्थायी समाधान निकला और न ही प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल की गई।
बढ़ सकता है विवाद
स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होने से ही बड़े विवाद जन्म लेते हैं। यदि समय रहते नगर पालिका और प्रशासन द्वारा हस्तक्षेप किया जाता, तो स्थिति इस स्तर तक नहीं पहुंचती।
जिम्मेदारों की चुप्पी
सबसे गंभीर बात यह है कि अब तक किसी अधिकारी या कर्मचारी ने स्थल निरीक्षण करना भी जरूरी नहीं समझा। इससे यह प्रश्न उठता है कि जनसमस्याओं के निराकरण के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी आखिर किस प्रकार कार्य कर रहे हैं।
आमजन के मन में सवाल
लगातार अनदेखी से पीड़ित परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि ऐसी बुनियादी समस्याओं पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिक न्याय के लिए आखिर जाए तो जाए कहां?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित समाधान करता है या फिर यह मामला भी आश्वासनों के बीच दबकर रह जाएगा।