
उत्तर कोरिया चुनाव: किम जोंग उन को लगभग 100% वोट, नतीजों पर सोशल मीडिया में मीम्स की बाढ़
NTN NEWS REPORT// प्योंगयांग। दुनिया के अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव का मतलब कड़ी टक्कर, अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला और अनिश्चित नतीजे होता है। लेकिन उत्तर कोरिया में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर वैश्विक ध्यान खींच लिया है।

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को इन चुनावों में लगभग 100 प्रतिशत के करीब वोट मिले हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 15 मार्च को हुए चुनाव में उनकी पार्टी को 99.93% से 99.97% तक वोट प्राप्त हुए, जबकि मतदान प्रतिशत करीब 99.99% रहा। यानी लगभग सभी पंजीकृत मतदाताओं ने मतदान किया और लगभग सभी ने एक ही पार्टी के पक्ष में वोट डाला।
लगभग सर्वसम्मति वाला परिणाम
रिपोर्ट के अनुसार, केवल 0.0037% मतदाता मतदान नहीं कर सके, क्योंकि वे देश से बाहर थे, जबकि महज 0.00003% लोगों ने वोट नहीं डाला। इतने उच्च मतदान प्रतिशत और एकतरफा परिणाम ने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है।
दुनिया के ज्यादातर लोकतांत्रिक देशों में किसी एक दल को इतने अधिक मत मिलना बेहद असामान्य माना जाता है। यही वजह है कि इन आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हैरानी पैदा की।
सोशल मीडिया पर मजेदार प्रतिक्रियाएं
चुनाव परिणाम सामने आते ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इन आंकड़ों पर मजाकिया प्रतिक्रियाएं दीं।
कुछ लोगों ने लिखा, “जो कुछ लोगों ने वोट नहीं दिया, उनका क्या हुआ होगा?”
तो कुछ ने इसे स्कूल के ग्रुप प्रोजेक्ट से जोड़ते हुए कहा, “यह तो वैसा रिजल्ट है जहां सब एक ही जवाब लिख देते हैं।”
कई यूजर्स ने इसे “100 में 100 नंबर” जैसा परिणाम बताया।
उत्तर कोरिया की राजनीतिक व्यवस्था
उत्तर कोरिया में एक ही प्रमुख पार्टी का दबदबा है और चुनाव प्रक्रिया में विकल्प बेहद सीमित होते हैं। वहां चुनाव नियमित रूप से कराए जाते हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की संरचना अन्य लोकतांत्रिक देशों से अलग है।
ऐसे परिणाम वहां असामान्य नहीं माने जाते, हालांकि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में यह आंकड़े चर्चा और बहस का विषय बन जाते हैं।
किम जोंग उन की जीत पहले से तय मानी जा रही थी, लेकिन इस बार चुनावी आंकड़ों की व्यापकता ने लोगों का ध्यान खींच लिया। यही वजह है कि यह चुनाव परिणाम सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा और मीम्स का विषय बन गया।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अलग-अलग देशों की राजनीतिक व्यवस्थाएं किस तरह भिन्न होती हैं और कभी-कभी वही अंतर वैश्विक स्तर पर चर्चा और व्यंग्य का कारण बन जाता है।