NEET विवाद के बीच CBSE डिजिटल मूल्यांकन पर नया सियासी तूफान, राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल
NTN REPORT// नई दिल्ली। नीट-यूजी पेपर लीक विवाद की गूंज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर देश में नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम (OSM) और उससे जुड़ी आईटी कंपनी ‘COEMPT’ को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सीबीएसई के लाखों छात्रों के परीक्षा परिणामों और डिजिटल मूल्यांकन का जिम्मा ऐसी कंपनी को सौंपा गया, जिसका अतीत पहले से विवादों में रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच और विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की है।
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर सीधा हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक तीखा पोस्ट करते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक विवादित कंपनी को बेहद संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपकर छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया।
राहुल गांधी ने कहा कि ‘COEMPT’ नाम की कंपनी पहले ‘Globarena’ के नाम से काम करती थी और वर्ष 2019 में तेलंगाना बोर्ड परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवादों में रह चुकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कंपनी का पिछला रिकॉर्ड सार्वजनिक था, तब भी उसे सीबीएसई जैसी महत्वपूर्ण संस्था का ठेका क्यों दिया गया।
‘नाम बदला, लेकिन तरीका नहीं’ — राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि कंपनी का नाम जरूर बदल गया, लेकिन उसकी कार्यप्रणाली और विवादों का इतिहास वही रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और संबंधित एजेंसियों ने जानबूझकर कंपनी के पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज किया।
उन्होंने कहा,
“नाम बदला, लेकिन नीयत और फितरत वही रही। इतिहास सबको पता था, फिर भी ठेका दिया गया। 18.5 लाख बच्चों का भविष्य ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया और किसी को फर्क नहीं पड़ा।”
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
इस विवाद के सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। नीट परीक्षा विवाद के बाद पहले ही परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर लगे आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है।
कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन और परीक्षा परिणामों से जुड़ी किसी भी एजेंसी का चयन बेहद पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।
राहुल गांधी ने सरकार से पूछे 4 बड़े सवाल
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और सीबीएसई से चार प्रमुख सवाल पूछे हैं —
1. COEMPT को ठेका क्यों दिया गया?
राहुल गांधी ने पूछा कि आखिर किस आधार पर और किसके निर्देश पर ‘COEMPT’ जैसी कंपनी को सीबीएसई का इतना बड़ा और संवेदनशील ठेका दिया गया।
2. नियम और सुरक्षा मानकों को क्यों नजरअंदाज किया गया?
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कंपनी को ठेका देने के दौरान जरूरी नियमों, कानूनी प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई।
3. कंपनी का बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं हुआ?
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि कंपनी पहले विवादों में रह चुकी थी, तो सीबीएसई ने उसका विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन क्यों नहीं किया।
4. क्या सरकार और कंपनी के बीच कोई सांठगांठ है?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कंपनी प्रबंधन और सत्ता के ऊंचे स्तरों के बीच संभावित संबंधों की जांच होनी चाहिए।
स्वतंत्र जांच और SIT गठन की मांग
राहुल गांधी ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक आयोग गठित किया जाए और विशेष जांच दल (SIT) बनाकर पूरे विवाद की गहराई से जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की मेहनत और भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और भविष्य सुरक्षित रखने के लिए विपक्ष इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
नीट पेपर लीक विवाद के बाद अब सीबीएसई डिजिटल मूल्यांकन विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष लगातार सरकार से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है।
फिलहाल केंद्र सरकार और सीबीएसई की ओर से राहुल गांधी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।