
नया लेबर कोड लागू: अब नौकरी छोड़ने के 2 वर्किंग डेज में होगा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट!
NTN NEWS REPORT// नई दिल्ली। देश में नया लेबर कोड लागू होने के बाद कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और राहतभरा बदलाव सामने आया है। अब किसी कंपनी से इस्तीफा देने, निकाले जाने या कंपनी बंद होने की स्थिति में कर्मचारी को उसका फुल एंड फाइनल (FnF) सेटलमेंट केवल 2 वर्किंग डेज के भीतर करना अनिवार्य होगा।

अब तक कर्मचारियों को अपना बकाया भुगतान पाने के लिए 30 से 90 दिनों तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे किराया, ईएमआई और अन्य मासिक खर्चों को लेकर उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नए नियम के लागू होने से यह परेशानी काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।
1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ नया प्रावधान
नए नियम के तहत 1 अप्रैल 2026 से कंपनियों को कर्मचारी का पूरा बकाया भुगतान दो कार्यदिवस के भीतर करना होगा। यह प्रावधान Code on Wages, 2019 के तहत लागू किया गया है।
यदि कोई कर्मचारी:
- स्वेच्छा से नौकरी छोड़ता है,
- कंपनी द्वारा निकाला जाता है,
- या कंपनी बंद हो जाती है,
तो ऐसी स्थिति में कंपनी को सभी देय भुगतान तय समय सीमा में करने होंगे।
हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में सेटलमेंट की समयसीमा एक महीने तक भी हो सकती है, लेकिन सामान्य मामलों में 2 कार्यदिवस का नियम लागू रहेगा।
क्या होता है फुल एंड फाइनल (FnF) सेटलमेंट?
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट का मतलब है कि कर्मचारी की सेवा समाप्त होने पर उसे मिलने वाली सभी देनदारियों का पूरा हिसाब कर भुगतान किया जाए। इसमें केवल वेतन ही नहीं, बल्कि अन्य वित्तीय लाभ भी शामिल होते हैं।
FnF में शामिल प्रमुख भुगतान:
- वर्किंग डेज के अनुसार अंतिम महीने की सैलरी
- बची हुई अर्जित छुट्टियों (Leave Encashment) का पैसा
- परफॉर्मेंस बोनस या इंसेंटिव
- यात्रा या अन्य ऑफिस खर्चों का रिइम्बर्समेंट
- लागू कटौतियां (टैक्स, एडवांस सैलरी, लोन, कंपनी की संपत्ति वापस न करने पर कटौती)
ग्रेच्युटी को लेकर भी बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी को लेकर भी अहम संशोधन किया गया है।
पहले ग्रेच्युटी का लाभ पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम 5 साल की निरंतर सेवा पूरी करनी होती थी। अब नए प्रावधान के तहत एक साल की सेवा के बाद भी ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाएगा।
कंपनी को ग्रेच्युटी की राशि 30 दिनों के भीतर कर्मचारी को देना अनिवार्य होगा।
कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम श्रमिकों और कर्मचारियों के हित में एक बड़ा सुधार है। समय पर भुगतान मिलने से कर्मचारियों को नई नौकरी तलाशने या आर्थिक योजना बनाने में सहूलियत होगी।
नया लेबर कोड पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिससे रोजगार क्षेत्र में विश्वास और स्थिरता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।