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भारतराजनीति

आज से संसद का मॉनसून सत्र शुरू: बड़े विधेयकों, परिसीमन और राजनीतिक टकराव के बीच हंगामेदार सत्र के आसार

NTN REPORT// नई दिल्ली, 20 जुलाई। संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इस बार का सत्र कई महत्वपूर्ण विधेयकों, बदले हुए राजनीतिक समीकरणों और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच संभावित तीखी टकराहट के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। बजट सत्र के बाद देश की राजनीति में आए बदलावों ने संसद के भीतर भी समीकरण बदल दिए हैं। एक ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पहले की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, वहीं विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ मैदान में उतर रहा है।

सोर्स सोशल मीडिया

मॉनसून सत्र में पेश होंगे कई महत्वपूर्ण विधेयक

सरकार इस सत्र के दौरान कई अहम विधेयक संसद में पेश करेगी। इनमें प्रमुख रूप से विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक-2026, आयकर (संशोधन) विधेयक-2026, उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक-2026, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक-2026 तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक-2026 शामिल हैं।

इनमें सबसे अधिक राजनीतिक बहस विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) को लेकर होने की संभावना है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक गैर-सरकारी संगठनों और विदेशी सहायता प्राप्त संस्थाओं पर नियंत्रण बढ़ाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

‘वंदे मातरम्’ को मिलेगा कानूनी संरक्षण देने का प्रस्ताव

सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक-2026 भी पेश करेगी। इस प्रस्ताव के तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो वंदे मातरम् का अपमान करने, इसके गायन या वादन में बाधा डालने अथवा व्यवधान उत्पन्न करने पर तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान लागू हो सकता है।

बदले राजनीतिक समीकरणों से सरकार को बढ़त

बजट सत्र के बाद विपक्षी गठबंधन को कई बड़े झटके लगे हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी में आंतरिक बगावत तेज हुई और उसके कई सांसदों ने नेतृत्व से अलग होकर नई राजनीतिक राह अपनाई। इन सांसदों ने लोकसभा में एनडीए को समर्थन देने का भी ऐलान किया है।

उधर तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) का गठबंधन टूट चुका है। नई राजनीतिक परिस्थितियों में डीएमके ने भी कुछ मुद्दों पर सरकार के साथ बातचीत के संकेत दिए हैं। वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कई सांसद भी एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं, जिससे लोकसभा में एनडीए की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है।

क्या फिर आएगा परिसीमन विधेयक?

हालांकि सरकार ने फिलहाल लोकसभा की कार्यसूची में परिसीमन से जुड़ा कोई नया संविधान संशोधन विधेयक शामिल नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बदले हुए समीकरणों का लाभ उठाकर सरकार इसे आगे बढ़ाने की रणनीति बना सकती है।

लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 540 है और किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए कम से कम 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। वर्तमान राजनीतिक स्थिति में एनडीए का आंकड़ा पहले की तुलना में बढ़ा है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे अभी भी अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कुछ क्षेत्रीय दल अपनी शर्तों के साथ समर्थन देते हैं या मतदान के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्य अनुपस्थित रहते हैं अथवा क्रॉस वोटिंग होती है, तो सरकार के लिए संविधान संशोधन संबंधी विधेयक पारित कराने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

बजट सत्र में अटक गया था महिला आरक्षण से जुड़ा परिसीमन प्रस्ताव

बजट सत्र में सरकार महिला आरक्षण लागू करने के उद्देश्य से परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं करा सकी थी। प्रस्तावित संशोधन में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान रखा गया था।

दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दलों ने आशंका जताई थी कि यदि नई जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया तो उनके राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। सरकार ने उस समय स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा।

सरकार को घेरने के लिए विपक्ष तैयार

मॉनसून सत्र के पहले ही विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति स्पष्ट कर दी है। सर्वदलीय बैठक में कई विपक्षी दलों ने कुछ सांसदों की उपस्थिति का विरोध करते हुए प्रतीकात्मक वॉकआउट भी किया।

विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी, नीट परीक्षा से जुड़े विवाद, पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी तथा अन्य जनहित के मुद्दों को संसद में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और नीट परीक्षा को लेकर संसद के बाहर भी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की घोषणा की गई है।

हंगामेदार सत्र के पूरे आसार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का मॉनसून सत्र केवल विधेयकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक संघर्ष देखने को मिलेगा। एक ओर सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष जनहित और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाए रखने की कोशिश करेगा।

ऐसे में संसद का यह मॉनसून सत्र आने वाले समय की राजनीतिक दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण सत्र माना जा रहा है।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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