नेपाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: पीएम बालेन शाह ने 1500+ राजनीतिक नियुक्तियां कीं समाप्त
NTN REPORT// काठमांडू: नेपाल की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने देशभर में 1500 से अधिक राजनीतिक नियुक्तियों को एक झटके में समाप्त कर दिया है। यह कदम हाल के वर्षों में नेपाल के सबसे बड़े संस्थागत सुधारों में गिना जा रहा है।

8 अध्यादेशों को मंजूरी, राष्ट्रपति की मुहर के बाद लागू
सरकार ने कैबिनेट बैठक के बाद आठ अध्यादेशों को मंजूरी के लिए राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के पास भेजा था। इनमें से एक प्रमुख अध्यादेश सार्वजनिक निकायों में की गई राजनीतिक नियुक्तियों को समाप्त करने से जुड़ा था।
राष्ट्रपति की स्वीकृति और राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
1594 पदाधिकारी एक साथ पदमुक्त
इस फैसले के तहत करीब 150 संस्थानों में नियुक्त 1594 पदाधिकारियों को तत्काल पदमुक्त कर दिया गया। इनमें पूर्व सरकारों—
- के पी शर्मा ओली
- शेर बहादुर देउबा
- पुष्प कमल दहल
- सुशीला कार्की के कार्यकाल में की गई नियुक्तियां शामिल थीं।
सरकार ने साफ किया है कि सभी नियुक्तियां, उनकी कार्यावधि या सेवा शर्तों की परवाह किए बिना, स्वतः समाप्त मानी जाएंगी।
110 कानूनों में संशोधन का सहारा
इस व्यापक बदलाव के लिए सरकार ने करीब 110 अलग-अलग कानूनों में संशोधन का रास्ता अपनाया है। इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, एविएशन, मीडिया, कला-संस्कृति और विभिन्न नियामक संस्थाओं तक पड़ा है।
विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर
इस फैसले का सबसे बड़ा प्रभाव देश के विश्वविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ा है।
प्रमुख विश्वविद्यालय जैसे—
- पूर्वांचल विश्वविद्यालय
- पोखरा विश्वविद्यालय
- लुम्बिनी विश्वविद्यालय
- सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय
इन सभी में उपकुलपति, रजिस्ट्रार और शीर्ष अधिकारी हटाए गए हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर बदलाव हुए हैं, जहां मेडिकल कॉलेजों के प्रमुख पदों के साथ-साथ—
- नेपाल मेडिकल काउंसिल
- नर्सिंग काउंसिल
- स्वास्थ्य अनुसंधान परिषद
- चिकित्सा शिक्षा आयोग
के अधिकारी भी पदमुक्त कर दिए गए हैं।
प्रमुख सरकारी निकाय भी प्रभावित
इस फैसले की जद में कई अहम संस्थान आए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- दूरसंचार प्राधिकरण
- नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण
- नेपाल पर्यटन बोर्ड
- प्रेस काउंसिल
- गोरखापत्र संस्थान
- गुठी संस्थान
इसके अलावा शांति प्रक्रिया से जुड़े सत्य निरूपण आयोग और बेपत्ता व्यक्तियों की जांच आयोग के पदाधिकारी भी हटाए गए हैं।
फैसले पर देश में बहस तेज
सरकार के इस कदम को जहां एक ओर प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग इसे राजनीतिक हस्तक्षेप के तौर पर भी देख रहा है।
आने वाले दिनों में यह फैसला नेपाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।