
गौ संरक्षण को लेकर जांजगीर-चांपा में उठी बुलंद आवाज, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा और देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। गौ माता के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन को लेकर रविवार को “गौ सम्मान आवाहन अभियान” के तहत जांजगीर-चांपा कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया। अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं गौसेवकों ने जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने का आग्रह किया। ज्ञापन में गौवंश के संरक्षण, गोशालाओं के विकास, कठोर कानून बनाने, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार तथा शिक्षा व्यवस्था में गौ संरक्षण को शामिल करने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं।
ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष महत्व है। ऐसे में गौवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीतियां बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मुख्य मांगें
गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिया जाए
ज्ञापन में मांग की गई कि गौ माता को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करते हुए उन्हें “राष्ट्रमाता” का दर्जा दिया जाए।
देशभर में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए
संपूर्ण भारत में गोहत्या पर प्रभावी और सख्ती से लागू होने वाला कानून बनाया जाए तथा इसके उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
हर राज्य और ग्राम पंचायत में गोशालाओं की स्थापना
- प्रत्येक राज्य में कम से कम एक बड़े गौ अभयारण्य की स्थापना हो।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में निराश्रित गौवंश के लिए गोशाला बनाई जाए।
- गोशालाओं को मनरेगा से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
- गोशालाओं को बिजली में विशेष रियायत अथवा निशुल्क विद्युत सुविधा दी जाए।
- सरकारी नियंत्रण वाले बड़े मंदिरों में गोशाला संचालन अनिवार्य किया जाए।
- महानगरों और बड़े आवासीय क्षेत्रों में गोशाला हेतु अलग भूमि आरक्षित की जाए।
- मृत गौवंश के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सरकार द्वारा सुनिश्चित की जाए।
कानून को और सख्त बनाने की मांग
ज्ञापन में गौ संरक्षण से जुड़े कानूनों को और कठोर बनाने की मांग करते हुए कहा गया कि—
- गोहत्या और गो तस्करी में शामिल अपराधियों के लिए आजीवन कठोर कारावास का प्रावधान किया जाए।
- गो तस्करी में प्रयुक्त वाहनों को स्थायी रूप से राजसात कर नीलाम किया जाए अथवा गोशालाओं को सौंपा जाए।
- कंपनियों के सीएसआर फंड का एक निश्चित हिस्सा गौ सेवा कार्यों में अनिवार्य रूप से खर्च किया जाए।
- सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन पर प्रभावी प्रतिबंध लगाया जाए, जिससे गौवंश को होने वाली हानि रोकी जा सके।
- पशु मेलों की आड़ में होने वाली अवैध गो तस्करी रोकने के लिए केंद्रीय स्तर पर कड़ा कानून बनाया जाए।
गो चिकित्सा एवं शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग
ज्ञापन में गौ चिकित्सा और शिक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखी गईं, जिनमें—
- जिला स्तर पर पृथक गो चिकित्सालय स्थापित किए जाएं।
- विद्यार्थियों के मध्याह्न भोजन में देशी गाय के दूध अथवा दूध पाउडर को शामिल किया जाए।
- संस्कृत महाविद्यालयों में गौ सेवा प्रकल्प संचालित किए जाएं।
- विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में देशी गाय के आर्थिक, वैज्ञानिक एवं धार्मिक महत्व का अध्ययन अनिवार्य किया जाए।
- राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर घायल गौवंश के उपचार हेतु गो एम्बुलेंस, गो चिकित्साकर्मी तथा निर्धारित दूरी पर गो चिकित्सालय स्थापित किए जाएं।
अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं बल्कि पर्यावरण, कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैव विविधता से भी जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने शासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।