लेबनान में इजरायल का बड़ा सैन्य अभियान, हिज्बुल्लाह के गढ़ पर कब्जा; यूएन में बढ़ी वैश्विक चिंता
हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल ने तेज किया जमीनी अभियान
NTN REPORT// इजरायल ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ लेबनान में अपने जमीनी सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। युद्धविराम के बावजूद इजरायली सेना लगातार दक्षिणी लेबनान में आगे बढ़ रही है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को स्पष्ट निर्देश देते हुए अभियान का दायरा बढ़ाने का आदेश दिया है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि सेना को लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई का विस्तार करना चाहिए ताकि उन क्षेत्रों पर स्थायी और मजबूत नियंत्रण स्थापित किया जा सके, जो लंबे समय से हिज्बुल्लाह के प्रभाव वाले इलाके माने जाते रहे हैं।
जहरानी नदी की ओर बढ़ रही इजरायली सेना
इजरायली सेना पहले ही लेबनान की लितानी नदी तक के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। अब सेना लितानी नदी से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित जहरानी नदी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
इजरायल का कहना है कि हाल के दिनों में हिज्बुल्लाह की ओर से उत्तरी इजरायल पर भारी रॉकेट और ड्रोन हमले किए गए हैं। अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद शनिवार को सबसे तीव्र गोलाबारी दर्ज की गई। इन हमलों के कारण उत्तरी इजरायल में कई स्कूलों को बंद करना पड़ा और सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त प्रतिबंध लागू किए गए।
900 साल पुराने बियोफोर्ट किले पर इजरायल का कब्जा
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में स्थित ऐतिहासिक बियोफोर्ट किले और उसके आसपास की रणनीतिक पहाड़ी पट्टी पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है। लगभग 900 वर्ष पुराने इस किले को क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य चौकियों में से एक माना जाता है।
इजरायल के रक्षा मंत्रालय के अनुसार सेना इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी। यह कब्जा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2000 में इजरायल ने इस इलाके से वापसी की थी और करीब 26 साल बाद दोबारा इस क्षेत्र में सैन्य नियंत्रण स्थापित किया गया है।
संघर्ष में बढ़ रही मानवीय त्रासदी
2 मार्च से शुरू हुए इस नए तनाव के बाद हालात लगातार बिगड़ते गए हैं। हिज्बुल्लाह ने अपने सहयोगी ईरान के समर्थन में इजरायल की ओर रॉकेट और ड्रोन हमले शुरू किए थे, जिसके जवाब में इजरायल ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की।
इन हमलों और निकासी आदेशों के कारण अब तक 12 लाख से अधिक लेबनानी नागरिक अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। विस्थापन का यह संकट लेबनान के लिए गंभीर मानवीय चुनौती बनता जा रहा है।
दोनों पक्षों को भारी नुकसान
लेबनान सरकार के आंकड़ों के अनुसार इजरायली हमलों में अब तक 3,370 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजरायल का दावा है कि संघर्ष के दौरान उसके 24 सैनिक और चार नागरिक मारे गए हैं।
इजरायल का यह भी कहना है कि हिज्बुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमलों के कारण उत्तरी इजरायल के हजारों नागरिकों को अपने घरों से सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
कामिकेज ड्रोन बने नई चुनौती
इस संघर्ष में हिज्बुल्लाह बड़े पैमाने पर कम लागत वाले ‘कामिकेज ड्रोन’ का इस्तेमाल कर रहा है। ये ड्रोन लक्ष्य पर सीधे टकराकर विस्फोट करने के लिए बनाए जाते हैं।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इन ड्रोनों को हवा में पहचानना और मार गिराना पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में अधिक कठिन होता है। यही वजह है कि इजरायल की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली के लिए भी ये एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। दक्षिणी लेबनान में कई इजरायली सैनिक ऐसे ड्रोन हमलों में मारे जाने की खबरें सामने आई हैं।
फ्रांस ने बुलाई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक
लेबनान में बढ़ती हिंसा और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ गई है। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक बुलाने की घोषणा की है।
इस बैठक में क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव, मानवीय संकट और संभावित व्यापक युद्ध की आशंकाओं पर चर्चा की जाएगी।
चुनावी माहौल में बढ़ा राजनीतिक दबाव
इजरायल में आगामी चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया है। नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी नफताली ने सरकार से और अधिक आक्रामक कार्रवाई की मांग की है।

बेनेट का कहना है कि यदि हिज्बुल्लाह के हमले जारी रहते हैं तो इजरायली सेना को लेबनान की राजधानी बेरुत के बाहरी इलाकों में स्थित हिज्बुल्लाह के ठिकानों को भी निशाना बनाना चाहिए।
मध्य पूर्व में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ सकता है। ईरान, लेबनान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव से क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और जटिल होने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल दुनिया की नजरें संयुक्त राष्ट्र की आपात बैठक और आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।