
जेएसडब्ल्यू-केएसके पॉवर प्लांट के भू-विस्थापित जीवन निर्वाह भत्ता समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न
काफी संख्या में जुटे भुविस्थापित कई मुद्दों को प्रबंधन व प्रसाशन को अवगत कराने पर बनी सहमति
NTN NEWS REPORT// जेएसडब्लू-केएसके पावर प्लांट के प्रभावित 8 गावो के भूविस्थापित किसानो की अति महत्वपूर्ण बैठक रविवार 14 सितंबर को संपन्न हुई बैठक में भू-विस्थापित किसान, प्लांट प्रभावित ग्रामीण शामिल हुए और अपनी मांगों को पूरा करने अपनी बात रखी।
समिति के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने बताया कि बैठक में प्रमुख रूप से जिस भी भुविस्थापित जीवन निर्वाह भत्ता लाभार्थी को अपना उतर्राधिकारी(नॉमिनी) बदलना चाह रहे हो तो उन्हें कम से कम एक बार नॉमिनी बदलने का अधिकार दिया जाए, समिति के सचिव अविनाश सिंह ने कहा कि कार्यरत कर्मचारियों की तरह भूविस्थापित किसानों और पेंसन धारियों को पेंशन के साथ-साथ राज्य कर्मचारी बीमा योजना (ईएसआईसी) के तहत मेडिकल की सुविधा दी जानी चाहिए।
समिति के उपाध्यक्ष सविता भारद्वाज ने कहा कि जो पेंशनधारी नौकरी करना चाहते हैं उसे तत्काल नौकरी दी जाए। समिति के कोशाध्यक्ष राकेश कुमार साहू का कहना है कि जिस भी भू-विस्थापित किसान को पेंशन दिया जाता है उसे जीवन निर्वाह भत्ता आजीवन दिया जाए, वही समिति के सक्रिय सदस्य उपेंद्र शांडिल्य का कहना है कि पति-पत्नी का अगर अलग-अलग लाभार्थी कार्ड प्लांट के द्वारा पूर्व में बनाया गया है तो दोनों को लाभार्थी कार्ड के तहत अलग-अलग पूर्ण पेंशन लाभार्थी मानकर दोनों में पेंशन दिया जाए, सक्रिय सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार सनत साहू का कहना है अगर कोई व्यक्ति ने गोदनामा वैध तरीके से सरकारी नियमानुसार बनवाया है तो कंपनी को भी उसे मान्यता देते हुए उसका उत्तराधिकारी (नॉमिनी) मानकर पेंशन दिया जाना चाहिए।
समिति के सक्रिय सदस्य कमलेश डहरिया ने कहा कि प्लांट प्रबंधन के द्वारा प्रभावित गावो में महीने , तीन महीने में एक बार जनसमस्या निवारण शिविर आयोजन को तत्काल शुरू किया जाए , सक्रिय सदस्य बुद्धेस्वर सिंह ने बताया कि बैठक में ये बात जोर-शोर से उठी कि भूविस्थापित ग्रामों में हर 3 माह में कंपनी के द्वारा जन समस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जाए, सक्रिय सदस्य अंजलि ओगरे जी के अनुसार गावों में हर महीने लगने वाले मेडिकल कैम्प को भी पिछले 2 साल से बंद कर दिया गया है, उसे पुन: तत्काल शुरू किया जाए ताकि भूविस्थापितों को बाहर जाने का जरूरत न पड़े और गांव मे ही छोटे-मोटे चीजों का इलाज की सुविधा मिल पाए।
नरियरा से रविन्द्र महिपाल, गिरिवर शांडिल्य, सुरेंद्र साहू, कमलेश डहरिया, रामकुमार निर्मलकर, गोविंद पांडेय, राधे राठौर, राजकुमार राठौर, चन्द्रप्रकास महिपाल, मनोज साहू पकरिया से जयनंदन कैवर्त्य, तरोद से राजू गंधर्व, देवेश सिंह, संतोष नायक रोगदा से कमलकुमारी, झलमला से भवानी शंकर निर्मलकर, अकलतरा से दीपिका महंत, अमोरा नवापारा से राजेन्द्र दास सहित सभी 8 गाँव से आये भुविस्थापित किसानों के प्रतिनिधियों एवं किसानों का सभी का एक सुर में यही कहना था कि पानी, सड़क, शिक्षा की मूलभूत सुविधा सीएसआरमद के माध्यम से सभी 8 गावो के भुविस्थापित पेंसन धारी 600 परिवारों को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध कराई जाए।