Advertisment
धर्म

मृत व्यक्ति की चीजों का इस्तेमाल करना कितना उचित? गरुड़ पुराण में बताए गए नियम और मान्यताएं

NTN NEWS REPORT// किसी अपने के इस दुनिया से चले जाने के बाद उसकी यादें ही हमारे पास बचती हैं। ऐसे समय में कई लोग भावनात्मक जुड़ाव के कारण उनके कपड़े, गहने या अन्य वस्तुओं का इस्तेमाल करने लगते हैं, ताकि वे उन्हें अपने करीब महसूस कर सकें। लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह प्रश्न उठता है कि क्या ऐसा करना उचित है? हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ गरुड़ पुराण में इस विषय पर विस्तार से उल्लेख मिलता है।

आत्मा की यात्रा और मोह का संबंध

प्रतीकात्मक तस्वीर

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा एक नई यात्रा पर निकलती है। इस दौरान वह अपने जीवन से जुड़ी वस्तुओं और रिश्तों के प्रति मोह में बंधी रहती है। ऐसी मान्यता है कि यदि परिजन मृत व्यक्ति की वस्तुओं का नियमित उपयोग करते रहते हैं, तो आत्मा का मोह समाप्त होने में अधिक समय लग सकता है, जिससे उसकी आगे की यात्रा प्रभावित हो सकती है।

कपड़ों को लेकर क्या कहता है शास्त्र?

मान्यता है कि कपड़े केवल पहनने की वस्तु नहीं होते, बल्कि उनसे व्यक्ति का भावनात्मक और ऊर्जात्मक जुड़ाव भी होता है। कहा जाता है कि कपड़ों में उस व्यक्ति की ऊर्जा बनी रहती है। ऐसे में यदि कोई दूसरा व्यक्ति उन्हें पहनता है, तो मानसिक असहजता या बेचैनी महसूस हो सकती है। इसलिए गरुड़ पुराण के अनुसार मृत व्यक्ति के कपड़ों को साफ कर जरूरतमंदों को दान करना अधिक उचित माना गया है।

गहनों के संबंध में सावधानी

गहने लंबे समय तक शरीर के संपर्क में रहते हैं, इसलिए उनमें व्यक्ति का स्पर्श और ऊर्जा जुड़ी मानी जाती है। मृत्यु के बाद उतारे गए गहनों को पहनना उचित नहीं माना गया है। हालांकि, यदि किसी ने जीवनकाल में ही अपने गहने किसी को उपहार स्वरूप दे दिए हों, तो उन्हें पहनना गलत नहीं माना जाता। सामान्यतः गहनों को स्मृति के रूप में संभालकर रखना बेहतर माना गया है।

घड़ी, जूते-चप्पल और बर्तन

गरुड़ पुराण में घड़ी को व्यक्ति के समय और जीवनचक्र से जोड़कर देखा गया है। इसलिए मृत व्यक्ति की घड़ी पहनना जीवन में रुकावटों का कारण माना जाता है।
जूते-चप्पल पृथ्वी तत्व से जुड़े होते हैं और इनका शरीर से सीधा संपर्क होता है। मान्यता है कि इन्हें पहनने से नकारात्मकता बढ़ सकती है।

वहीं, बर्तनों के बारे में कहा जाता है कि उनमें भोजन से जुड़ी सूक्ष्म ऊर्जा रह सकती है, जो घर के वातावरण को प्रभावित कर सकती है।

बिस्तर बदलने की परंपरा

मृत व्यक्ति के उपयोग किए गए बिस्तर को बदल देना और उसकी जगह नया बिस्तर इस्तेमाल करना उचित माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इससे आत्मा को शांति मिलती है और वह अपने अगले चरण की ओर सहजता से बढ़ पाती है।

पितृ दोष की मान्यता

गरुड़ पुराण में उल्लेख मिलता है कि इन बातों की अनदेखी करने पर पितृ दोष लग सकता है। ऐसी धारणा है कि इसके कारण व्यक्ति के जीवन में मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक विश्वासों पर आधारित मान्यताएं हैं।

मनोवैज्ञानिक पहलू भी अहम

धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसका एक मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है। जब हम किसी प्रियजन की वस्तुओं का लगातार उपयोग करते हैं, तो हम उनकी यादों से बाहर नहीं निकल पाते। इससे शोक की प्रक्रिया लंबी हो सकती है और मानसिक रूप से आगे बढ़ना कठिन हो जाता है। संभवतः इन नियमों का उद्देश्य लोगों को भावनात्मक रूप से संतुलित रहने और जीवन में आगे बढ़ने में मदद करना भी है।

(नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और गरुड़ पुराण में वर्णित कथनों पर आधारित है। इसे आस्था और विश्वास के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।)

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
Back to top button
error: Content is protected !!