UPI पर MDR को लेकर फिर गरमाई बहस, अशनीर ग्रोवर बोले- ‘यह पिछड़ा कदम होगा’, सरकार से पुनर्विचार की अपील!
NTN REPORT// नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की संभावित व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। BharatPe के सह-संस्थापक रहे अशनीर ग्रोवर ने सरकार को इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि UPI पर MDR लगाने का फैसला भारत के सुचारू रूप से चल रहे मोबाइल भुगतान तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब लोकसभा से टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित हो चुका है। इस विधेयक में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का प्रावधान किया गया है, जिससे भविष्य में अधिसूचना के जरिए कुछ डिजिटल भुगतान लेनदेन पर शुल्क लगाने का कानूनी रास्ता खुल सकता है। हालांकि, इस समय UPI लेनदेन पर कोई नया MDR लागू नहीं किया गया है।
अशनीर ग्रोवर ने MDR को बताया ‘पिछड़ा कदम’
UPI पर संभावित शुल्क की चर्चा के बीच अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने सरकार से इस विषय पर दोबारा विचार करने की अपील की।
ग्रोवर का तर्क है कि UPI भारत की उन डिजिटल उपलब्धियों में से एक है, जो आम लोगों और कारोबारियों के बीच बेहद सहज तरीके से काम कर रही है। ऐसे में इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से इसके इस्तेमाल और स्वीकार्यता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उनके मुताबिक, UPI पर MDR लागू करना ‘पिछड़ा कदम’ होगा और सरकार को इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए।
संसद में क्या हुआ?
लोकसभा से पारित टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में बदलाव का प्रावधान शामिल है।
इसका मतलब यह नहीं है कि विधेयक पारित होते ही हर UPI भुगतान पर शुल्क लग गया है। मौजूदा व्यवस्था में UPI भुगतान पर शून्य-MDR व्यवस्था जारी है। नया कानूनी प्रावधान भविष्य में केंद्र सरकार को अधिसूचना के माध्यम से शुल्क व्यवस्था में बदलाव करने की क्षमता देता है।
यानी फिलहाल UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?
UPI पर शुल्क लगाए जाने को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उठ रहे सवालों के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट की है।
सरकार के मुताबिक, यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो उसका बोझ उपभोक्ताओं के बजाय संबंधित व्यापारियों पर डाला जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी MDR लागू करने का कोई तत्काल फैसला नहीं हुआ है।
ताजा सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, यदि भविष्य में MDR लाया भी जाता है तो इसके दायरे को सीमित रखा जा सकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि अधिकांश छोटे व्यापारी लेनदेन को शुल्क से बाहर रखा जा सकता है और आम व्यक्ति से व्यक्ति UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
आम UPI यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?
फिलहाल आम UPI यूजर्स को किसी नए शुल्क का भुगतान नहीं करना है।
भविष्य में MDR लागू होने की स्थिति में भी सरकार का कहना है कि शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा, ग्राहकों से नहीं। इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की बात फिलहाल सामने नहीं आई है।
हालांकि, व्यापारियों पर MDR लागू होने की स्थिति में इसका अप्रत्यक्ष असर बाजार पर पड़ने को लेकर बहस जारी है। कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ने पर वे इसे अपनी कीमतों, मार्जिन या भुगतान के अन्य तरीकों के जरिए समायोजित करने की कोशिश कर सकते हैं।
क्यों हो रही है MDR की चर्चा?
UPI के जरिए होने वाले भुगतान का बड़ा हिस्सा छोटे मूल्य के लेनदेन का है। वहीं, उच्च मूल्य वाले व्यापारिक लेनदेन का हिस्सा संख्या में कम होने के बावजूद कुल लेनदेन मूल्य में काफी बड़ा योगदान देता है।
इसी वजह से प्रस्तावित व्यवस्था में छोटे और बड़े व्यापारिक लेनदेन के बीच अंतर रखने पर विचार किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संभावित मॉडल में एक निश्चित सीमा से ऊपर के लेनदेन या कुछ विशेष श्रेणी के व्यापारियों को MDR के दायरे में लाने पर चर्चा हुई है। हालांकि, अंतिम दर, सीमा और पात्र व्यापारियों को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
MDR लागू होने के पक्ष में सरकार की दलील
सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि डिजिटल भुगतान के पूरे तंत्र को चलाने में बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और तकनीकी संस्थाएं लगातार निवेश करती हैं। MDR से प्राप्त संभावित आय का इस्तेमाल भुगतान ढांचे, नवाचार और सुरक्षा को मजबूत करने में किया जा सकता है।
वहीं दूसरी तरफ, विरोध करने वालों का कहना है कि UPI की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और कम लागत वाली व्यवस्था है। यदि व्यापारियों पर शुल्क बढ़ता है तो इसका असर छोटे कारोबारियों और डिजिटल भुगतान के विस्तार पर पड़ सकता है।
क्या UPI पेमेंट बंद या महंगे हो जाएंगे?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। UPI पर कोई सार्वभौमिक शुल्क लागू नहीं हुआ है और आम यूजर्स से भुगतान शुल्क लेने का फैसला भी नहीं हुआ है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि MDR लागू किया जाता है तो उसका स्वरूप सीमित हो सकता है और आम उपभोक्ताओं को इससे सीधे प्रभावित नहीं किया जाएगा।
अशनीर ग्रोवर की चिंता क्यों महत्वपूर्ण?
अशनीर ग्रोवर का विरोध मुख्य रूप से इस आशंका पर आधारित है कि UPI की मौजूदा सहज और कम लागत वाली व्यवस्था में बदलाव करने से इसके इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि भारत ने मोबाइल भुगतान के क्षेत्र में जिस स्तर की सफलता हासिल की है, उसे किसी ऐसे शुल्क से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए, जिसका असर डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता पर पड़ सकता है।
फिलहाल सरकार और उद्योग जगत के बीच मुख्य सवाल यही है कि UPI के विशाल डिजिटल भुगतान तंत्र को आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए, बिना इसकी सबसे बड़ी ताकत—सहज और व्यापक स्वीकार्यता—को नुकसान पहुंचाए।
UPI पर MDR को लेकर बहस अभी जारी है। संसद से पारित विधेयक ने भविष्य में शुल्क व्यवस्था में बदलाव का कानूनी रास्ता जरूर खोला है, लेकिन अभी UPI पर MDR लागू नहीं हुआ है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि शुल्क लगाया जाता है तो उसका भार व्यापारियों पर होगा और आम यूजर्स से UPI भुगतान के लिए सीधे शुल्क लेने की व्यवस्था फिलहाल प्रस्तावित नहीं है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित व्यक्तियों और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं।