बिलासपुर जैसा सिंडिकेट कहीं जांजगीर जिला अस्पताल में तो सक्रिय नहीं? निष्पक्ष जांच हुई तो कई चौंकाने वाले खुलासे संभव!
NTN REPORT// जांजगीर। बिलासपुर में कथित तौर पर सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े के मामले में पुलिसकर्मियों सहित कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या इसी प्रकार का कोई संगठित सिंडिकेट जांजगीर-चांपा जिले में भी सक्रिय हो सकता है? स्थानीय स्तर पर समय-समय पर सामने आए कुछ मामलों और चर्चाओं को देखते हुए यह मांग उठ रही है कि जिला अस्पताल जांजगीर तथा संबंधित विभागों की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या संगठित षड्यंत्र है तो उसका भी खुलासा हो सके।

बिलासपुर में सामने आए मामले में जांच एजेंसियों के अनुसार कथित रूप से अस्पताल, पुलिस, राजस्व और अन्य स्तरों पर सूचना तंत्र का दुरुपयोग कर सर्पदंश मुआवजा प्रकरणों में फर्जीवाड़ा किए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसे मामलों की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर यह चर्चा है कि पूर्व में हुई कुछ संदिग्ध मौतों, सर्पदंश से जुड़े प्रकरणों अथवा सरकारी मुआवजा मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए। यदि पुराने प्रकरणों की केस-टू-केस समीक्षा की जाए, पोस्टमार्टम रिकॉर्ड, अस्पताल की सूचना प्रणाली, पुलिस रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख तथा मुआवजा स्वीकृति प्रक्रिया का मिलान किया जाए, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार यदि किसी भी संगठित सूचना तंत्र के माध्यम से मौत की जानकारी तत्काल बाहर पहुंचाई जाती रही हो या पीड़ित परिवारों को किसी विशेष दिशा में प्रभावित किया गया हो, तो इसकी भी जांच आवश्यक है। हालांकि वर्तमान में जांजगीर जिला अस्पताल या जिले के किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध इस प्रकार के किसी सिंडिकेट के सक्रिय होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में कोई आपराधिक मामला दर्ज होने की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जांच केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पुलिस, राजस्व विभाग, पोस्टमार्टम प्रक्रिया, मुआवजा स्वीकृति, बैंक भुगतान और संबंधित दस्तावेजों का भी स्वतंत्र परीक्षण होना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं किसी स्तर पर मिलीभगत या प्रक्रियागत अनियमितता तो नहीं हुई।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का भी कहना है कि यदि जांजगीर-चांपा जिले में पूर्व के सर्पदंश अथवा मुआवजा संबंधी मामलों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाती है, तो वास्तविक स्थिति सामने आएगी। यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है तो इससे व्यवस्था पर जनता का विश्वास और मजबूत होगा, जबकि किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा। फिलहाल यह विषय जांच और सत्यापन का है। किसी भी व्यक्ति, विभाग या संस्था को दोषी मानना उचित नहीं होगा, जब तक सक्षम जांच एजेंसी द्वारा तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष न निकाला जाए।
अस्वीकरण: यह समाचार बिलासपुर में सामने आए प्रकरण की पृष्ठभूमि तथा जांजगीर-चांपा में निष्पक्ष जांच की उठ रही मांग पर आधारित है। इसमें जांजगीर जिला अस्पताल या किसी व्यक्ति/संस्था के विरुद्ध किसी अपराध का दावा नहीं किया गया है। किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि केवल सक्षम जांच एजेंसी की जांच के बाद ही मानी जाएगी।