अमेरिकी सीनेट में ट्रंप को बड़ा झटका, ईरान युद्ध पर ‘वॉर पावर्स एक्ट’ के तहत सीमाएं तय करने वाला प्रस्ताव पास
NTN REPORT// अमेरिका की राजनीति में मंगलवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान नीति को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर दिया. इस प्रस्ताव को ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ जाकर वोट किया।

सीनेट में ‘वॉर पावर्स एक्ट’ के तहत राष्ट्रपति के सैन्य अधिकारों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 मतों से पारित हुआ. हालांकि यह अभी कानून नहीं बना है और इसे आगे भी कई संवैधानिक एवं विधायी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा.
ट्रंप के खिलाफ रिपब्लिकन सांसदों की क्रॉस-वोटिंग
इस प्रस्ताव के समर्थन में रिपब्लिकन सीनेटर रेंड पॉल, सुसान कोलिन्स, लिसा मुर्कोवस्की और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट्स के साथ वोट किया.
वहीं डेमोक्रेट सांसद जॉन फैटरमैन इस प्रस्ताव का विरोध किया. इसके अलावा तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए.
अमेरिकी राजनीति में इस तरह की क्रॉस-वोटिंग को राष्ट्रपति के खिलाफ सार्वजनिक असहमति और राजनीतिक फटकार के तौर पर देखा जा रहा है. सामान्यतः राष्ट्रपति को उनकी पार्टी का पूरा समर्थन मिलता है, लेकिन ईरान को लेकर जारी सैन्य तनाव और लंबे समय से चल रहे संघर्ष ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी मतभेद पैदा कर दिए हैं.
क्या है ‘वॉर पावर्स एक्ट’?
अमेरिका में ‘वॉर पावर्स एक्ट’ एक महत्वपूर्ण संघीय कानून है, जिसके तहत कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना लंबे समय तक सेना तैनात नहीं रख सकता.
इस कानून के अनुसार राष्ट्रपति बिना संसदीय अनुमति के अधिकतम 60 दिनों तक ही सैन्य कार्रवाई जारी रख सकते हैं. इसके बाद उन्हें कांग्रेस की स्वीकृति लेनी होती है.
डेमोक्रेट्स और ट्रंप की आलोचना करने वाले सांसदों का दावा है कि ईरान से जुड़े सैन्य अभियान की 60 दिन की समय सीमा 1 मई को समाप्त हो चुकी थी. इसलिए राष्ट्रपति ने अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमा पार की है.
व्हाइट हाउस का क्या है तर्क?
व्हाइट हाउस ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि ‘वॉर पावर्स एक्ट’ की समय सीमा 8 अप्रैल को घोषित किए गए सीजफायर के साथ रुक गई थी. प्रशासन का कहना है कि उस स्थिति में ट्रंप को सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए कम से कम 40 अतिरिक्त दिनों का अधिकार प्राप्त था.
हालांकि आलोचकों का कहना है कि जमीनी हालात अब भी सामान्य नहीं हुए हैं और अमेरिकी सैन्य गतिविधियां जारी हैं.
होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की तैनाती बनी चिंता
मध्य पूर्व में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अमेरिकी नौसेना फिलहाल स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में तैनात है, जहां ईरानी जहाजों की निगरानी और नाकेबंदी जैसी गतिविधियां जारी हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है. यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है.
राजनीतिक और रणनीतिक असर
विश्लेषकों का मानना है कि सीनेट में पारित यह प्रस्ताव तुरंत अमेरिकी सेना की वापसी सुनिश्चित नहीं करता, लेकिन इससे ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव जरूर बढ़ गया है.
यह वोटिंग इस बात का संकेत मानी जा रही है कि अमेरिकी संसद का एक वर्ग राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों पर नियंत्रण चाहता है और विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसलों में कांग्रेस की भूमिका को मजबूत करना चाहता है.
अगर यह प्रस्ताव आगे चलकर प्रतिनिधि सभा और अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं में भी मंजूरी हासिल कर लेता है, तो भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के सैन्य अधिकारों पर व्यापक बहस छिड़ सकती है.
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।