
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सेजस सारागांव में इतिहास से रूबरू हुए विद्यार्थी
NTN REPORT// सारागांव। स्वामी आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सारागांव में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके मानवीय प्रभाव और उससे मिलने वाली सीख से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम के दौरान सेजस सारागांव की सामाजिक विज्ञान (एसएसटी) व्याख्याता हर्षिता राठौर ने विद्यार्थियों को भारत विभाजन के इतिहास से विस्तारपूर्वक परिचित कराया। उन्होंने अपने उद्बोधन में 1947 के राजनीतिक घटनाक्रम, भारत और पाकिस्तान के अलग-अलग राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आने तथा विभाजन के दौरान आम नागरिकों को झेलनी पड़ी पीड़ा पर प्रकाश डाला।
आजादी के साथ सामने आई विभाजन की त्रासदी
हर्षिता राठौर ने बताया कि सन् 1947 भारत के इतिहास का बेहद महत्वपूर्ण वर्ष था। लगभग दो शताब्दियों के ब्रिटिश शासन के बाद देश स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा था, लेकिन आजादी से पहले राजनीतिक मतभेदों, साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा का दौर भी सामने आया।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि 3 जून 1947 को अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने विभाजन की योजना प्रस्तुत की। इसके बाद ब्रिटिश संसद द्वारा भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 पारित किया गया और ब्रिटिश भारत को मुख्य रूप से दो स्वतंत्र देशों—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित करने का निर्णय लिया गया।
14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। इसके साथ पंजाब और बंगाल का भी विभाजन हुआ। नई सीमाओं के निर्धारण की जिम्मेदारी सर सिरिल रैडक्लिफ की अध्यक्षता वाले सीमा आयोगों को दी गई।
लाखों लोगों ने छोड़े घर और अपनों का साथ
व्याख्याता ने विद्यार्थियों को बताया कि भारत की स्वतंत्रता जहां देशवासियों के लिए गौरव और खुशी का क्षण थी, वहीं विभाजन ने एक बड़ी मानवीय त्रासदी को भी जन्म दिया। लाखों लोगों को अपने घर, जमीन-जायदाद और वर्षों पुरानी यादें छोड़कर दूसरी ओर पलायन करना पड़ा। अनेक परिवार बिछड़ गए और हिंसा ने बड़ी संख्या में लोगों के जीवन को प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि विभाजन को केवल नक्शे पर खींची गई सीमा के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। यह ऐसी ऐतिहासिक घटना थी, जिसने करोड़ों लोगों के सामाजिक और पारिवारिक जीवन को प्रभावित किया।
इतिहास से सीख लेने पर दिया जोर
हर्षिता राठौर ने विद्यार्थियों को बताया कि विभाजन की परिस्थितियों को समझने का उद्देश्य किसी समुदाय को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेना है। उन्होंने कहा कि जब समाज में अविश्वास, नफरत और विभाजन की भावना बढ़ती है, तो उसका सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ता है।
उन्होंने महात्मा गांधी के शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के प्रयासों, जवाहरलाल नेहरू के स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बनने, सरदार वल्लभभाई पटेल की रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका तथा मुहम्मद अली जिन्ना के पाकिस्तान के निर्माण में प्रमुख नेतृत्व का भी उल्लेख किया।
विद्यार्थियों ने लिया एकता और भाईचारे का संकल्प
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि देश की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। समाज में शांति, भाईचारा, मानवता और आपसी सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया कि वे देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएंगे तथा समाज में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होने देंगे, जो लोगों के बीच नफरत और विभाजन को बढ़ावा दें।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को याद करने का उद्देश्य घृणा को बढ़ाना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर एक मजबूत, शांतिपूर्ण और एकजुट भारत का निर्माण करना है।