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राजनीति

यूपी चुनाव 2027: ब्राह्मण वोट बैंक पर सपा की नजर, ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ से अखिलेश की नई सोशल इंजीनियरिंग!

लखनऊ में जनेश्वर मिश्र जयंती पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन, पीडीए के साथ सवर्ण समीकरण साधने की रणनीति!

NTN REPORT// लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को नया विस्तार देना शुरू कर दिया है। अब तक पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) फार्मूले पर जोर देने वाली पार्टी सवर्ण समाज, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत बुधवार को लखनऊ में जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर सपा ने ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोगों, पार्टी नेताओं, संत-महात्माओं और बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया गया।

सोर्स, सोशल मीडिया

सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि रहे। पार्टी इसे केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपनी नई सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।

पीडीए से आगे बढ़कर ‘सर्वसमाज’ की ओर बढ़ रही सपा

लोकसभा चुनाव 2024 में गैर-यादव पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक वोटों के सहारे बेहतर प्रदर्शन करने वाली समाजवादी पार्टी अब विधानसभा चुनाव 2027 में पूर्ण बहुमत का लक्ष्य लेकर चल रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि केवल पीडीए समीकरण पर्याप्त नहीं होगा, इसलिए सवर्ण समाज के एक हिस्से को भी साथ लाना जरूरी है।

इसी सोच के तहत ब्राह्मण समाज को जोड़ने के लिए ‘प्रबुद्ध सम्मेलन’ आयोजित किया गया, ताकि पार्टी की छवि केवल एक जातीय आधार वाली पार्टी तक सीमित न रहे, बल्कि सर्वसमाज की पार्टी के रूप में स्थापित हो सके।

जनेश्वर मिश्र की विरासत के सहारे ब्राह्मण समाज तक पहुंच

कार्यक्रम का आयोजन समाजवादी विचारक और वरिष्ठ नेता रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती पर किया गया। जनेश्वर मिश्र को ‘छोटे लोहिया’ के नाम से भी जाना जाता था और वे समाजवादी आंदोलन के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल रहे।

शुरुआत में सम्मेलन का आयोजन जनेश्वर मिश्र पार्क में प्रस्तावित था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण इसे समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित किया गया। पार्टी कार्यालय परिसर में विशाल पंडाल तैयार किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।

सपा का मानना है कि जनेश्वर मिश्र की राजनीतिक विरासत के माध्यम से ब्राह्मण समाज में सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है।

ब्राह्मण चेहरों को दी गई बड़ी जिम्मेदारी

ब्राह्मण समाज तक पहुंच बनाने के लिए समाजवादी पार्टी ने अपने प्रमुख ब्राह्मण नेताओं को सक्रिय किया है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • सांसद सनातन पांडेय
  • पूर्व विधायक पवन पांडेय
  • नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय
  • पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्र

सनातन पांडेय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार ब्राह्मण सम्मेलनों का आयोजन कर पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया है। वहीं पवन पांडेय सहित अन्य नेता भी ब्राह्मण समाज के बीच संवाद स्थापित करने में जुटे हैं।

भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का महत्वपूर्ण समर्थक माना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के राष्ट्रवादी तथा हिंदुत्व आधारित वैचारिक आधार के साथ इस वर्ग का जुड़ाव भी मजबूत माना जाता है।

इसी वजह से समाजवादी पार्टी अब इस वर्ग के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। पार्टी के नेता प्रदेश सरकार पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इस वर्ग को भाजपा से अलग कर अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

प्रतिनिधित्व बढ़ाने की चुनौती भी सामने

हालांकि समाजवादी पार्टी के सामने एक बड़ी चुनौती यह भी है कि संगठन और जनप्रतिनिधित्व में ब्राह्मण समाज की हिस्सेदारी अभी सीमित है।

पार्टी के लोकसभा सांसदों और विधानसभा प्रतिनिधियों में ब्राह्मण नेताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में केवल सम्मेलन आयोजित करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भविष्य में संगठन और टिकट वितरण में भी इस वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जातीय राजनीति से आगे बढ़ने की कोशिश

समाजवादी पार्टी केवल जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी युवाओं के बीच बेरोजगारी, पेपर लीक, संविदा भर्ती, शिक्षा, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रही है।

पार्टी का प्रयास है कि सामाजिक न्याय के साथ-साथ युवाओं, शिक्षित वर्ग और सवर्ण समाज के बीच भी अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाई जाए।

2027 की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी पीडीए वोट बैंक को एकजुट बनाए रखते हुए ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वर्ग के एक हिस्से का समर्थन हासिल करने में सफल रहती है, तो 2027 का विधानसभा चुनाव पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि यह रणनीति कितनी सफल होगी, इसका जवाब चुनाव परिणाम ही देंगे। फिलहाल इतना तय है कि समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में अपनी सोशल इंजीनियरिंग का दायरा बढ़ाते हुए ब्राह्मण समाज को साधने की दिशा में बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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