
छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव: 26 फरवरी को अधिसूचना, भाजपा ने 7 नामों का पैनल हाईकमान को भेजा!
NTN REPORT//रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होने जा रही है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 26 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों के नामों का पैनल तैयार कर हाईकमान को भेज दिया है।
निर्वाचन कार्यक्रम (राज्यसभा चुनाव 2026)
आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार—
- 26 फरवरी 2026 – अधिसूचना जारी
- 5 मार्च 2026 तक – नाम-निर्देशन पत्र दाखिल
- 6 मार्च 2026 – नामांकन पत्रों की संवीक्षा
- 9 मार्च 2026 तक – नाम वापसी की अंतिम तिथि
- 16 मार्च 2026 – प्रातः 9 बजे से सायं 4 बजे तक मतदान
- 16 मार्च 2026 – सायं 5 बजे से मतगणना प्रारंभ
- 20 मार्च 2026 (शुक्रवार) – संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण
भाजपा ने 7 नेताओं का पैनल भेजा
सूत्रों के अनुसार भाजपा ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए एसटी-एससी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के नेताओं को पैनल में शामिल किया है। कुल सात नामों पर विचार किया जा रहा है—
- नवीन मार्कंडेय
- कृष्णमूर्ति बांधी
- किरण बघेल
- गौरीशंकर अग्रवाल
- प्रबल प्रताप जूदेव
- सरोज पांडे
- नारायण चंदेल
अब अंतिम निर्णय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को करना है।
जांजगीर-चांपा फैक्टर से बढ़ी नारायण चंदेल की दावेदारी
पैनल में शामिल नारायण चंदेल का नाम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे जांजगीर-चांपा के पूर्व विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं तथा संगठन में लंबे समय से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनने के बावजूद जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली आठों विधानसभा सीटों पर पार्टी को सफलता नहीं मिली थी। सभी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा। ऐसे में इस जिले को साधना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक समीकरण
नारायण चंदेल ओबीसी वर्ग से आते हैं और संगठन में विभिन्न दायित्व निभा चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजती है तो इससे न केवल सामाजिक संतुलन मजबूत होगा, बल्कि जांजगीर-चांपा जैसे कृषि प्रधान जिले में संगठन को नई ऊर्जा मिल सकती है।
कुछ माह पूर्व जिले में आयोजित “जनादेश परब” कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी इस क्षेत्र की राजनीतिक अहमियत को दर्शाती है।
किसे मिलेगा मौका?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व इन सात नामों में से किसे राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित करता है। क्या पार्टी क्षेत्रीय संतुलन और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए जांजगीर-चांपा पर दांव खेलेगी, या फिर कोई नया और चौंकाने वाला चेहरा सामने आएगा?
राज्यसभा चुनाव की तारीखें तय हो चुकी हैं, राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है—अब फैसला आने वाले दिनों में होगा।