
नौकरी से निकाले गए ठेका कर्मियों को नौकरी देने का मिला आश्वासन, धरना समाप्त
NTN NEWS REPORT// अकलतरा (जे एस डब्ल्यू) के एस के महानदी पावर कंपनी लिमिटेड नरियरा के जिओ केम ठेका कंपनी का ठेका 18 जुलाई को समाप्त हो गया था, जिसके बाद लगभग 50 श्रमिकों को नौकरी पर रख लिया गया था किंतु लगभग 20 लोग नौकरी से वंचित रह गए थे।
एचएमएस यूनियन के निरंतर प्रयास और श्रमिकों की एकजुटता से प्रबंधन और मजदूरों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति और एचएमएस यूनियन की मध्यस्थता से जे एस डब्ल्यू प्रबंधन ने नौकरी से वंचित श्रमिकों को रोजगार वापस दिलवाने की हामी भर दी, आपको बता दे दिनांक 26 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर श्रमिक बैठ गए थे जिसे एचएमएस यूनियन ने समर्थन दिया था, प्रबंधन से सौहाद्रपूर्ण वातावरण में बातचीत हुआ और एचएमएस यूनियन ने श्रमिकों के नौकरी से वंचित होने से उनके ऊपर आश्रित परिवार के अन्य सदस्यों के प्रति पड़ने वाले प्रभाव को सहानुभूतिपूर्वक लेकर कारखाना में उनको पुनः जल्द ही नौकरी में रखने की अपील की गई, जिसके बाद प्रबंधन ने जल्द ही रिक्त पदों को देख कर उनको नियोजित कराने का आश्वासन दिया है।
एचएमएस यूनियन के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद साहू ने कहा कि श्रमिकों को एकजुट रहना चाहिए, और अपने हक अधिकार के प्रति जागरूक भी रहना चाहिए, हमारा आगे भी निरंतर प्रयास रहेगा कि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न ना हो, महामंत्री बलराम गोस्वामी ने जे एस डब्ल्यू प्रबंधन को सबसे पहले धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि संघ का प्रयास रहेगा कि प्रबंधन और मजदूरों के बीच में विश्वास बना रहे और कारखाना में निर्बाध रूप से बिजली का उत्पादन भी होता रहे, किसी भी समस्या का हल बैठ कर ही निकाले जाए, इन बातों का ध्यान रखा जाएगा प्रबंधन से भी अपील है कि आगे जो भी निर्णय हो तो श्रमिक संघ को भरोसे में लेकर करे, ताकि श्रमिकों का भी पक्ष रखा जा सके, और कारखाना में औद्योगिक शांति बनी रहे, बैठक में संघ की ओर से संगठन सचिव मूलचंद नोरगे और श्रमिकों की ओर से खिलेश्वर निर्मलकर, चंद्रप्रकाश साहू, जगदीश रात्रे, विजय सांडेय, विनोद यादव, राजकिशोर पाटले, कैलाश राठौर आदि शामिल थे।
नगर पंचायत नरियरा के भाजपा पार्षदों ने धरने को दिया था समर्थन : नगर पंचायत नरियरा के भाजपा पार्षद सुशांत बंजारे, दिलचंद बंजारे, और प्रसाद प्रतिनिधि हरप्रसाद यादव, और महेंद्र पाटले ने धरना स्थल पर पहुंच कर धरना के पहले ही दिन समर्थन दिया था, उन्होंने श्रमिकों की मांगों को जायज ठहराते हुए कहा था कि नौकरी से निकाले गए श्रमिक आसपास प्रभावित गांव से है, और वो पिछले लगभग 15 वर्षों से नौकरी भी कर रहे है, इसलिए उन्हें दोबारा नौकरी दिया जाना चाहिए।