
युक्तियुक्तकरण में विसंगतियों को लेकर कलेक्टर के समक्ष की गई शिकायत , दोषियों के ऊपर ठोस कार्रवाई की मांग
बलौदा, नवागढ़ ब्लॉक में भी गड़बड़ी की शिकायतें , क्या यहां भी निलंबन की गिरेगी गाज?
NTN NEWS REPORT// जहां एक ओर राज्य सरकार युक्तियुक्तकरण के हजारों फायदे गिना रही है शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आने की बात कही जा रही है जिसका कांग्रेस के द्वारा पुरजोर विरोध भी किया जा रहा कल ही प्रेस वार्ता में कांग्रेस के पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया के द्वारा बड़ा आरोप लगाते हुए कहा गया कि सरकार माफिया की तरह कार्य कर रही है साथ ही सरकार युक्तियुक्तकरण के नाम पर स्कूलों को बंद करने और शिक्षकों के 45 हजार से अधिक पदों को खत्म करना चाहती है।

प्रश्न यह उठता है कि क्या वाकई युक्तियुक्तकरण से शिक्षा में सुधार होगा या कांग्रेस का विरोध जायज है इसी कड़ी में जानकारी मिली है कि जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर चाम्पा के द्वारा रिक्त पद 253 अतिशेष सूची रातोरात बनाकर सुबह बिना दावा आपत्ति का समय दिए बिना काउंसिलिंग प्रक्रिया कराई गई, काउंसलिंग प्रक्रिया बिना दवापत्ति निराकरण के किया गया जिसमें जूनियर को मौका मिला व वरिष्ठ को मौका नही दिया गया।
जिनका निराकरण नही हुआ उन्होंने असहमति जताई : लगभग 25 शिक्षको से ऊपर ने असहमति जताई जिनके पद को जानबूझ कर रिक्त रखा गया और बचे हुए अतिशेष शिक्षको को बोला गया कि पद भर गया है, उन्हें मौका नही दिया वापस भेज दिए गया जबकि शासन के नियमानुसार बचे हुए शिक्षको का पुनः काउंसलिंग के माध्यम से पदस्थापना किया जाना था
लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा असहमति जताते हुए सभी महिला शिक्षको को द्वेषपूर्ण दूरस्थ स्थान लगभग 40 से 45 km दूर में एकतरफा पदस्थ कर दीया गया है और ज्वाइनिंग करने हेतु दबाव बनाया जा रहा है नही करने पर निलंबन की कार्यवाही की जाएगी ऐसा कहा जा रहा है।
जबकि शासन के नियम में ऐसा नही है सभी शिक्षक न्यायालय जाने को बाध्य हो गए हैं जिससे इनको आर्थिक व मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है अनियमितता संबंधी यही सब आरोप लगाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर चाम्पा के विरुद्ध कल कलेक्टर जांजगीर चाम्पा के समक्ष कुछ शिक्षकों के द्वारा उचित कार्रवाई करने आवेदन दिया गया है।
युक्तियुक्तकरण में अधिकारियों की मनमानी : शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण शासन की मंशा है जिसमें यहां शिक्षा विभाग के द्वारा सारे नियम कायदे ताक पर रखकर जांजगीर चांपा जिले में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया अपनाई गई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार यहां 102 व्याख्याताओं के युक्तियुक्तकरण के लिए सूची बनी थी जो संख्या घटकर काउंसिलिंग के पूर्व 91 तक पहुंच गई। इस तरह दस व्याख्याता सीधे अतिशेष होने से बच गए। मौके से ही ये दस व्याख्याता अपने घर खुशी खुशी लौटे क्योंकि अब वे अतिशेष नहीं रहे। इनको अतिशेष की सूची से हटाने वाले अधिकारी अगर सही हैं तो गलत सूची बनाने वाले अधिकारी क्या सोचकर सूची तैयार किए थे ऐसी कौन सी अदृश्य शक्ति थी जिससे ऐसा करने मजबूर हो गए। क्या इन अधिकारियों के ऊपर ठोस कार्रवाई नहीं किया जाना था। आखिर यह गलती किसकी है यह केवल एक त्रुटि मात्र है या कोई सुनियोजित खेल ?
शिकवा शिकायत दावा आपत्ति सब फेल है। शिक्षक अपनी बात रखने भटक रहे हैं जिला प्रशासन से डीईओ या बीईओ कार्यालय तक कोई किसी का सुनने वाला नहीं है। वहीं शिक्षकों की काउंसिलिंग में दूसरे विषय के शिक्षक को दूसरे संकाय में नियुक्ति जैसी गड़बड़ी हुई है। खैर जब किसी को सुनना ही नहीं तो गलतियां गिनाना बेमानी है लेकिन उच्च न्यायालय तो सुनेगा इस लिए बहुत से शिक्षक थोक में अब हाईकोर्ट का रुख इस जिले से कर रहे हैं। क्योंकि यहां की काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह दूषित है और युक्तियुक्तकरण में भी शिक्षकों के विषय का ध्यान नहीं रखा गया है।
कुछ शिक्षकों से प्राप्त जानकारी अनुसार कहीं हिंदी के दो तो कहीं कला के दो से तीन शिक्षक पदस्थ हैं कई जगह तो दर्ज संख्या में भी जादूगरी की गई है ये सब खामियां क्रमशः आगे आएंगी शायद माननीय उच्च न्यायालय इन खामियों पर संज्ञान ले ले। गांवों के शिक्षक विहीन स्कूलों तक शिक्षक भेजने की सरकार की मंशा ठीक है पर शिक्षकों को जिस तरह प्रताड़ित होना पड़ रहा है वह गलत है उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिलना था भले ही उनकी शिकायत सही नहीं है तो उसे खारिज कर दिया जाए पर नहीं सुनने की परम्परा लोकतंत्र की नहीं है।
