स्वाइन फ्लू को लेकर बढ़ी चिंता: दिल्ली में 1700 से अधिक मामले, नोएडा में 15 केस; ICMR ने कहा- नया स्ट्रेन नहीं
बारिश और बदलते मौसम के बीच H1N1 संक्रमण बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में बेड और आइसोलेशन की व्यवस्था
NTN REPORT// नई दिल्ली/नोएडा। राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। कर्नाटक में 4 हजार से अधिक मामले सामने आने की जानकारी है, जबकि दिल्ली में 1700 से ज्यादा केस दर्ज किए जा चुके हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। नोएडा यानी गौतम बुद्ध नगर में मानसून सीजन के दौरान H1N1 के 15 मामले दर्ज किए गए हैं।

मामलों में बढ़ोतरी के बीच लोगों के बीच यह सवाल भी उठने लगा था कि कहीं स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन तो नहीं फैल रहा है। हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर (ICMR) के अनुसार भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। मौजूदा संक्रमण पुराने H1N1 वायरस से ही जुड़ा बताया जा रहा है।
हर कुछ साल में क्यों बढ़ते हैं H1N1 के मामले?
स्वाइन फ्लू का संक्रमण भारत में पहली बार वर्ष 2009 में बड़े स्तर पर सामने आया था। मई 2009 में देश में इसका पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद दिसंबर 2009 से मार्च 2010 के बीच सर्दियों में संक्रमण के मामलों में तेजी देखी गई।
इसके बाद कुछ वर्षों तक मामले अपेक्षाकृत कम रहे, लेकिन वर्ष 2014-15 में एक बार फिर स्वाइन फ्लू का बड़ा प्रकोप देखने को मिला। वर्ष 2019 में भी संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी। अब वर्ष 2026 में फिर से H1N1 के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पैटर्न इस बात की ओर संकेत करता है कि H1N1 वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था। यह आबादी के बीच कम स्तर पर मौजूद रहा और समय-समय पर अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर इसके मामले बढ़ते रहे।
इम्यूनिटी कम होने पर फिर बढ़ सकता है संक्रमण
सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के निदेशक प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर के अनुसार, जब बड़ी संख्या में लोग किसी वायरस से संक्रमित होते हैं तो उनके शरीर में उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। कुछ समय तक यह प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण के प्रसार को सीमित रखने में मदद करती है।
समय बीतने के साथ आबादी में वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता का स्तर कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में पहले से मौजूद वायरस दोबारा अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है। यही कारण है कि कुछ वायरल संक्रमणों के मामले कई वर्षों के अंतराल के बाद फिर बढ़ते दिखाई देते हैं।
विशेषज्ञ इसे एक सरल उदाहरण से समझाते हैं। किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों को पहले H1N1 संक्रमण हो चुका हो तो उनमें वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो सकती है। इससे कुछ वर्षों तक संक्रमण की रफ्तार कम रह सकती है। बाद में जब आबादी में यह प्रतिरोधक क्षमता कम होती है तो वायरस को दोबारा फैलने का अवसर मिल सकता है।
बदलता मौसम भी संक्रमण बढ़ने की बड़ी वजह
बारिश, उमस और तापमान में लगातार बदलाव के दौरान फ्लू जैसे श्वसन संक्रमणों के फैलने की संभावना बढ़ सकती है। मानसून के दौरान कभी गर्मी, कभी बारिश और फिर उमस जैसी परिस्थितियां बनी रहती हैं।
इसके अलावा स्कूल, कार्यालय, मेट्रो, सार्वजनिक परिवहन और अन्य बंद स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों के एक-दूसरे के करीब रहने से संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के संपर्क में आने पर संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
कब तक कम होंगे स्वाइन फ्लू के मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण के मामले कब पूरी तरह कम होंगे, इसका सटीक समय बताना मुश्किल है। समुदाय में वायरस के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता बनने और संक्रमण के प्रसार की परिस्थितियों में बदलाव के साथ मामलों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति को लेकर कोरोना जैसी महामारी की आशंका जताने का फिलहाल कोई आधार नहीं है। अधिकांश संक्रमित लोगों में लक्षण हल्के रह सकते हैं और वे सामान्य उपचार एवं चिकित्सकीय निगरानी में ठीक हो सकते हैं।
क्या स्वाइन फ्लू कोविड जितना खतरनाक हो सकता है?
स्वाइन फ्लू और कोविड-19 दोनों श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले वायरल संक्रमण हैं। दोनों में बुखार, खांसी, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान H1N1 संक्रमण को कोविड जैसी स्थिति से जोड़ने का फिलहाल कोई वैज्ञानिक आधार सामने नहीं आया है। आईसीएमआर के अनुसार भारत में H1N1 का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है और वर्तमान में फैल रहा वायरस नया नहीं बताया गया है।
इसलिए घबराने की बजाय सावधानी बरतना जरूरी है। तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, शरीर में दर्द या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
सरकार ने अस्पतालों को अलर्ट किया
H1N1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र और राज्य स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को सतर्क किया गया है। अस्पतालों में आवश्यक बेड, आइसोलेशन की व्यवस्था और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
एम्स और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) समेत प्रमुख संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं के माध्यम से निगरानी और जांच व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। जिन राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़े हैं, वहां स्वास्थ्य विभागों को विशेष सतर्कता बरतने तथा अस्पतालों में आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एनसीआर में भी बढ़ रहे मामले
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न शहरों में भी H1N1 के मामले सामने आए हैं।
नोएडा (गौतम बुद्ध नगर): मानसून सीजन के दौरान 15 मामले दर्ज किए गए हैं।
गाजियाबाद: 2 मामले सामने आए हैं।
फरीदाबाद: 4 मामले दर्ज किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अधिकांश मरीजों में सामान्य लक्षण बताए जा रहे हैं और स्थिति नियंत्रण में है। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों को फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों पर विशेष निगरानी रखने और जरूरत के अनुसार जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डेंगू के मामले भी बढ़ने लगे
स्वाइन फ्लू के साथ देश में डेंगू के मामलों में भी बढ़ोतरी की जानकारी सामने आ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष देश में अब तक डेंगू के 13,336 मामले दर्ज किए गए हैं। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और केरल में सबसे ज्यादा मामले सामने आने की जानकारी है।
दिल्ली में फिलहाल 244 डेंगू मामले दर्ज होने की जानकारी है। लगातार बारिश और जगह-जगह पानी जमा होने के कारण आने वाले दिनों में डेंगू के मामलों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
घबराने की नहीं, सावधानी की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार H1N1 को लेकर फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए। फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों के संपर्क में आने से बचना, चिकित्सकीय सलाह लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच एवं उपचार कराना महत्वपूर्ण है।
साथ ही, फ्लू से बचाव के लिए टीकाकरण पर भी डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है। खासकर जिन लोगों में गंभीर संक्रमण का जोखिम अधिक हो सकता है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
देश के कई हिस्सों में H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन आईसीएमआर के अनुसार भारत में इसका कोई नया स्ट्रेन सामने नहीं आया है। बदलता मौसम, संक्रमण के प्रति आबादी में घटती प्रतिरोधक क्षमता और भीड़भाड़ वाले स्थान संक्रमण बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग निगरानी और अस्पतालों की तैयारियों पर जोर दे रहे हैं।
डिस्क्लेमर: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।