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धर्म

शरद पूर्णिमा 2026: चंद्र दोष के प्रभाव कम करने के लिए करें ये 5 उपाय, जानें पूजा विधि और धार्मिक महत्व

25 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा, चंद्रमा को अर्घ्य देने से लेकर सफेद वस्तुओं के दान तक, जानें इस दिन किए जाने वाले 5 विशेष उपाय

NTN REPORT// हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं और उनकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा, मंत्र जाप, दान और भगवान शिव की आराधना करने की परंपरा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर कुछ विशेष उपाय करने से कुंडली में चंद्रमा की कमजोर स्थिति और चंद्र दोष के अशुभ प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जा रही है। ऐसे में आइए जानते हैं कि चंद्र दोष क्या होता है, इसके संभावित ज्योतिषीय कारण क्या माने जाते हैं और शरद पूर्णिमा की रात कौन-से पांच उपाय किए जा सकते हैं।

चंद्र दोष क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, मानसिक शांति और माता से संबंधित विषयों का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुंडली में चंद्रमा के कमजोर होने या उस पर प्रतिकूल ग्रहों का प्रभाव पड़ने पर चंद्र दोष की स्थिति मानी जा सकती है।

मान्यता है कि शनि, राहु या केतु के साथ चंद्रमा की युति होने अथवा इन ग्रहों का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से चंद्रमा की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, वृश्चिक राशि में चंद्रमा को नीच का माना जाता है। चंद्रमा की स्थिति से जुड़े विभिन्न योगों में केमद्रुम योग का भी उल्लेख मिलता है।

क्या होता है केमद्रुम योग?

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब जन्मकुंडली में चंद्रमा से दूसरे और बारहवें भाव में कोई ग्रह नहीं होता, तब सामान्यतः केमद्रुम योग बनने की संभावना मानी जाती है। हालांकि, इसकी पुष्टि करने के लिए कुंडली में अन्य ग्रहों की स्थिति और योगों का भी विश्लेषण किया जाता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा की कमजोर स्थिति को मानसिक बेचैनी, निर्णय लेने में कठिनाई, पारिवारिक संबंधों में तनाव और आर्थिक परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष के प्रभाव कम करने के 5 उपाय

1. चंद्रमा के मंत्रों का करें जाप

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रदेव की आराधना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक चंद्रमा के मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिल सकती है।

इस अवसर पर आप इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं:

  • ॐ सोम सोमाय नमः।
  • ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः।

रात में शांत स्थान पर बैठकर अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का जाप करें। ज्योतिषीय मान्यता है कि इससे चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होती है और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

2. घर में करें चंद्र यंत्र की स्थापना

ज्योतिष शास्त्र में चंद्र यंत्र को चंद्रमा से संबंधित उपायों में महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र यंत्र की स्थापना कर विधि-विधान से उसकी पूजा की जा सकती है।

इसके लिए पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक चंद्र यंत्र स्थापित करके धूप-दीप अर्पित करें और चंद्रदेव का स्मरण करें।

मान्यता है कि इस उपाय से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और जीवन की परेशानियों का सामना करने के लिए मनोबल मिलता है। हालांकि, इसके परिणामों की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।

3. सफेद वस्तुओं का करें दान

ज्योतिषीय मान्यताओं में चंद्रमा का संबंध सफेद रंग और कुछ सफेद वस्तुओं से जोड़ा जाता है। इसी कारण शरद पूर्णिमा के दिन जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।

इस दिन आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार इन वस्तुओं का दान कर सकते हैं:

  • चावल
  • दूध
  • चीनी
  • सफेद वस्त्र

धार्मिक मान्यता है कि जरूरतमंदों को इन वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और चंद्रमा से संबंधित अशुभ प्रभावों को कम करने की कामना की जा सकती है।

दान करते समय अपनी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखें और जरूरतमंदों की सहायता को प्राथमिकता दें।

4. चंद्रदेव को अर्घ्य देकर करें प्रार्थना

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा के दर्शन करना और उन्हें अर्घ्य देना धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्य देने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि:

  1. सबसे पहले एक साफ लोटे में स्वच्छ जल लें।
  2. चाहें तो उसमें थोड़ा दूध और कुछ साबुत चावल मिला सकते हैं।
  3. चंद्रमा के दर्शन करके श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
  4. इस दौरान चंद्रदेव का स्मरण करें और मन की शांति के लिए प्रार्थना करें।

धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।

5. भगवान शिव की पूजा कर करें ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप

हिंदू धर्म में भगवान शिव और चंद्रमा का विशेष संबंध माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है। इसी कारण चंद्रमा से संबंधित उपायों में भगवान शिव की पूजा को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

शरद पूर्णिमा के दिन सुबह या अपनी सुविधानुसार भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का स्मरण करें।

इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की आराधना से मानसिक शांति प्राप्त करने और चंद्रमा से संबंधित परेशानियों के प्रभाव कम होने की कामना की जाती है।

शरद पूर्णिमा पर क्यों खास मानी जाती है चंद्रमा की पूजा?

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में इस पर्व को चंद्रमा की पूर्ण आभा, शरद ऋतु की शुरुआत और धार्मिक साधना से जोड़कर देखा जाता है।

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें विशेष महत्व रखती हैं। कई परिवारों में इस अवसर पर खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी प्रचलित है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की विधियों में अंतर हो सकता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान और जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

शरद पूर्णिमा पर इन बातों का रखें ध्यान

  • पूजा-पाठ अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।
  • दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें।
  • पूजा के दौरान स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखें।
  • किसी भी ज्योतिषीय उपाय को निश्चित परिणाम देने वाला न मानें।
  • यदि मानसिक परेशानी या आर्थिक समस्या है, तो धार्मिक आस्था के साथ व्यावहारिक समाधान भी अपनाएं।

शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन चंद्रदेव की पूजा, मंत्र जाप, सफेद वस्तुओं का दान, चंद्रमा को अर्घ्य और भगवान शिव की आराधना करने की परंपरा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ये उपाय चंद्र दोष के अशुभ प्रभावों को कम करने की कामना से किए जाते हैं।

श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने के अलावा, जीवन में मानसिक शांति, पारिवारिक सद्भाव और सकारात्मकता बनाए रखने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है।

धार्मिक अस्वीकरण: इस समाचार में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है। इन उपायों के परिणामों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। पाठक अपनी श्रद्धा और विवेक के अनुसार निर्णय लें।

यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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