फर्जी सड़क हादसा बीमा दावों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चार सप्ताह में डिजिटल पोर्टल जोड़ने का आदेश
ई-डीएआर, वाहन, सारथी और बीमा सूचना ब्यूरो के आंकड़ों का होगा एकीकरण; बीमा कंपनियों की जवाबदेही पर भी न्यायालय की सख्ती
NTN REPORT// नई दिल्ली। सड़क दुर्घटनाओं के नाम पर फर्जी बीमा दावों पर अंकुश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चार सप्ताह के भीतर प्रमुख डिजिटल पोर्टलों के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

इस व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट (ई-डीएआर), वाहन पोर्टल, सारथी पोर्टल और बीमा सूचना ब्यूरो के आंकड़ों को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे वाहनों, दुर्घटनाओं और बीमा दावों से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कर संदिग्ध मामलों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
दुर्घटना संबंधी आंकड़े समय पर अपलोड करने के निर्देश
न्यायालय ने ई-डीएआर पोर्टल पर दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़े अपलोड करने में हो रही देरी पर चिंता जताई। राज्यों को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि डिजिटल व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर सके। इस पहल का उद्देश्य हिट एंड रन मामलों और दुर्घटना मुआवजा दावों की प्रक्रिया में भी बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
बीमा कंपनियों के अधिकारियों को अवमानना नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व आदेशों के अनुपालन और सुनवाई में उपस्थिति को लेकर कुछ बीमा कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों को अवमानना संबंधी नोटिस भी जारी किए। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा और कुछ मामलों में विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए। इससे बीमा कंपनियों की जवाबदेही को लेकर न्यायालय की गंभीरता सामने आई है।
27 नवंबर को अगली सुनवाई
न्यायालय ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। डिजिटल पोर्टलों के एकीकरण और पूर्व निर्देशों के अनुपालन की स्थिति आगामी सुनवाई में महत्वपूर्ण रहेगी।
इस व्यवस्था से संभावित फर्जी बीमा दावों की जांच में पारदर्शिता बढ़ने और वास्तविक दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजा दावों के निपटारे को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी वाहन का कई दुर्घटना मामलों में उल्लेख होना अपने आप में धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं होगा; इसके लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्य आवश्यक होंगे।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।