NTN REPORT// मुंबई। दिवंगत दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मामले की जांच को लेकर चल रही कानूनी और राजनीतिक बयानबाजी के बीच दिशा के पिता सतीश सालियान ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है। नोटिस में कथित मानहानिकारक बयानों को वापस लेने, माफी मांगने और 500 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने की मांग की गई है।

16 सितंबर की एक्स पोस्ट को लेकर आपत्ति
सतीश सालियान की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि आदित्य ठाकरे ने 16 सितंबर 2026 को अपने आधिकारिक एक्स खाते पर अंग्रेजी और मराठी में ऐसी पोस्ट कीं, जिन्हें सतीश सालियान ने झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक बताया है।
नोटिस के मुताबिक इन पोस्ट में दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में सतीश सालियान की भूमिका और उनकी मंशा पर सवाल उठाए गए तथा उनके प्रयासों को राजनीतिक मकसद और व्यक्तिगत दुश्मनी से जोड़ने का आरोप लगाया गया। सतीश सालियान का कहना है कि इन टिप्पणियों से उनकी प्रतिष्ठा और परिवार की छवि को नुकसान पहुंचा है।
सात दिन में माफी और 500 करोड़ की मांग
रिपोर्टों के मुताबिक नोटिस में आदित्य ठाकरे से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, कथित टिप्पणियों को वापस लेने और 500 करोड़ रुपये का भुगतान करने की मांग की गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार नोटिस में सात दिन की समयसीमा भी दी गई है।
सतीश सालियान की ओर से पूर्व महाराष्ट्र गृह मंत्री अनिल देशमुख को भी इसी मामले से संबंधित 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने की रिपोर्ट है।
आदित्य ठाकरे के घर के बाहर पहुंची कानूनी टीम
19 सितंबर को सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा कानूनी नोटिस देने के लिए मुंबई स्थित मातोश्री पहुंचे। ओझा ने बताया कि उनकी ओर से एक कनिष्ठ वकील नोटिस देने की प्रक्रिया में शामिल था।
वकील ने आरोप लगाया कि उनकी कानूनी टीम को वकालत करने से रोकने की धमकी दी गई थी। उन्होंने कहा कि इस तरह की धमकियों से कानूनी कार्रवाई नहीं रुकेगी और संविधान के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं।
मीडिया से बातचीत में ओझा ने कहा कि वे किसी दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
सतीश सालियान बोले- मैं राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं
दिशा के पिता सतीश सालियान ने पहले भी अपनी बेटी की मौत के मामले को लेकर राजनीतिक मंशा के आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि वह राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं और उनकी बेटी का भी राजनीति से कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की ओर से की गई पूछताछ के दौरान परिवार के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया गया। उनके अनुसार परिवार से कई घंटे पूछताछ हुई और प्रक्रिया ठीक तरीके से पूरी की गई।
आदित्य ठाकरे ने आरोपों को बताया था बेबुनियाद
वहीं, आदित्य ठाकरे ने दिशा सालियान से किसी भी तरह के संबंध या मुलाकात से इनकार किया है। उन्होंने एक्स पर कहा था कि वह दिशा सालियान से कभी नहीं मिले और उनका नाम इस मामले से जोड़ना बिना सबूत के चरित्र हनन का प्रयास है। उन्होंने मामले की जांच तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर किए जाने की बात कही थी।
2020 में हुई थी दिशा सालियान की मौत
दिशा सालियान 28 वर्ष की थीं और वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक के तौर पर काम कर चुकी थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या के तौर पर दर्ज किया था। इसके बाद उनकी मौत को लेकर कई तरह के सवाल और आरोप सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई जांच
दिशा सालियान की मौत की जांच को लेकर उनके पिता ने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी। 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। इसके बाद सीबीआई ने 14 सितंबर को मामले में एफआईआर दर्ज की। रिपोर्टों के अनुसार एफआईआर में आदित्य ठाकरे समेत कुछ लोगों के नाम दर्ज हैं, हालांकि किसी को आरोपी घोषित किए जाने की बात सामने नहीं आई है।
सीबीआई जांच शुरू होने के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर तूल पकड़ लिया है। अब सतीश सालियान की ओर से भेजे गए 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस ने इस विवाद को एक नई कानूनी दिशा दे दी है।
आगे क्या होगा?
अब कानूनी तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नोटिस मिलने के बाद आदित्य ठाकरे और अन्य संबंधित पक्ष क्या जवाब देते हैं। यदि नोटिस में की गई मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो सतीश सालियान की ओर से आगे न्यायिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, दिशा सालियान की मौत से संबंधित मूल मामले की जांच सीबीआई के स्तर पर जारी है।
नोट: इस खबर में मानहानि नोटिस में लगाए गए आरोपों और संबंधित पक्षों के सार्वजनिक बयानों को उनके दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आरोपों का अंतिम सत्यापन या न्यायिक निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।