जांजगीर-चांपा में निजी अस्पतालों और जांच लैब की बाढ़, पंजीयन से लेकर मानकों तक उठे सवाल; सीएमएचओ कार्यालय की भूमिका की जांच जरूरी!
क्या निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले संस्थानों को भी मिल रही अनुमति? निजी अस्पतालों की जांच, निरीक्षण रिपोर्ट और कथित अवैध वसूली की शिकायतों पर पारदर्शिता की मांग!
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। जिले में पिछले कुछ समय से निजी अस्पतालों, मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों, सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों, क्लीनिकों और पैथोलॉजी जांच प्रयोगशालाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। बड़े-बड़े भवन, आकर्षक होर्डिंग और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के दावों के बीच अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इन संस्थानों का संचालन निर्धारित सरकारी मानकों और आवश्यक अनुमतियों के अनुरूप किया जा रहा है? क्या प्रत्येक संस्थान का पंजीयन करने से पहले उसके भवन, चिकित्सा सुविधाओं, योग्य चिकित्सकों, प्रशिक्षित कर्मचारियों, उपकरणों और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की समुचित जांच की जाती है?

इन सवालों के केंद्र में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय की पंजीयन और निरीक्षण संबंधी भूमिका भी है। यदि किसी निजी अस्पताल या जांच प्रयोगशाला में निर्धारित मानकों की कमी है, तो उसे किस आधार पर पंजीयन अथवा संचालन की अनुमति दी गई? क्या कमियों को दूर करने के लिए नियमानुसार समय दिया गया, क्या दोबारा निरीक्षण किया गया और क्या संबंधित अभिलेखों में अनुपालन दर्ज है? इन सभी बिंदुओं की दस्तावेजी जांच आवश्यक है।
इसी बीच, कुछ संस्थानों से संबंधित कथित अवैध वसूली की सूचनाएं और आरोप भी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष उपलब्ध हुए बिना किसी व्यक्ति या कार्यालय को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। फिर भी यदि पंजीयन अथवा निरीक्षण के नाम पर अनुचित राशि मांगे जाने की शिकायतें हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। आखिर अनुमति देने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और क्या सभी संस्थानों पर एक समान नियम लागू किए जा रहे हैं?
दस्तावेज सामने आएंगे, तभी तय होगी जवाबदेही
इस पूरे मामले में सबसे जरूरी कदम यह है कि निजी अस्पतालों और जांच प्रयोगशालाओं के पंजीयन, निरीक्षण तथा अनुपालन संबंधी रिकॉर्ड की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अनुचित लाभ लेने, गलत जानकारी के आधार पर अनुमति देने या निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी करने के प्रमाण मिलते हैं, तो सक्षम प्राधिकारी को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
दूसरी ओर, यदि संबंधित संस्थानों ने सभी जरूरी मानकों का पालन किया है और उनके पास वैध अनुमतियां हैं, तो अभिलेखों के आधार पर यह स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि बिना प्रमाण किसी संस्थान या अधिकारी की छवि प्रभावित न हो।
अब बड़ा सवाल यही है कि जांजगीर-चांपा में निजी अस्पतालों और जांच प्रयोगशालाओं के पंजीयन तथा निरीक्षण की वास्तविक स्थिति क्या है? क्या सभी संस्थान निर्धारित मानकों पर खरे उतर रहे हैं, क्या कमियां मिलने पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है और क्या कथित अवैध वसूली की सूचनाओं की जांच होगी? इन सवालों का जवाब दस्तावेज, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।