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राजनीति

अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट में आगजनी का जिक्र कर घिरे संजय राउत, प्रियंका चतुर्वेदी ने भी उठाए सवाल; भाजपा-जदयू ने साधा निशाना

संजय राउत के बयान से गरमाई सियासत, प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं—संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना अस्वीकार्य; भाजपा ने लगाया अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप

NTN REPORT// मुंबई। अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट में आगजनी और संवैधानिक संस्थानों को निशाना बनाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उनके पोस्ट के बाद महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक बयानबाजी तेज हो गई है। खास बात यह है कि उनकी ही पार्टी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने हिंसक विरोध और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने की घटनाओं को गलत बताया है। वहीं, भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने राउत के बयान की आलोचना करते हुए विपक्ष पर अराजकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इस पूरे विवाद में एक ओर संजय राउत ने मौजूदा सरकार को लेकर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपेक्षा की है, तो दूसरी ओर भाजपा और जदयू नेताओं ने उनके बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनुचित बताया है।

संजय राउत के एक्स पोस्ट से शुरू हुआ विवाद

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने अपने एक्स पोस्ट में अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट में आगजनी की घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां के लोग भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद करने के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से नाराज थे। उन्होंने लिखा कि विरोध कर रही जनता ने संसद, सरकारी कार्यालयों और मंत्रियों के घरों को भी निशाना बनाया।

राउत ने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के दूसरे देशों को भी ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए। उनके इस पोस्ट को भारत की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और सरकार के खिलाफ उनके रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, किसी दूसरे देश में हिंसक विरोध की घटना का उल्लेख करना और उसका समर्थन करना अलग-अलग बातें हैं। इस विवाद के बीच राउत के बयान की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

संजय राउत बोले—सरकार बनी रही तो अराजकता फैलना तय

मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय राउत ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि यह सरकार सत्ता में बनी रहती है, तो अराजकता फैलना तय है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की।

राउत ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है और उनके अनुसार देश को बचाने में सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने तिरंगा फहराने से जुड़े मुद्दे का उल्लेख करते हुए भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी परिस्थितियों में अराजकता फैल सकती है।

उनके इन बयानों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। विपक्ष और सरकार के बीच पहले से जारी टकराव के बीच अब संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका, सरकार के प्रति असंतोष और विरोध के तरीकों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा—संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करना अस्वीकार्य

संजय राउत के बयान पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने अलग रुख अपनाते हुए हिंसक विरोध और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने पर आपत्ति जताई।

मुंबई में उन्होंने कहा कि भारत को किसी दूसरे देश से सीखने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, अल्बानिया ने लंबे समय तक कम्युनिस्ट तानाशाही का दौर देखा है और वहां की परिस्थितियों को भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि कानून अपने हाथ में लेना, व्यवस्था को बाधित करना और सुप्रीम कोर्ट या संसद जैसी संस्थाओं को अस्थिर करना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

उन्होंने भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश में हुए विरोध प्रदर्शनों से प्रेरणा लेने की बातों पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, किसी भी लोकतंत्र में हिंसक तरीके से सत्ता परिवर्तन की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

प्रियंका ने स्पष्ट किया कि भारत को अल्बानिया, पेरिस या दूसरे देशों में हुई ऐसी घटनाओं से सीख लेने की आवश्यकता नहीं है। उनके बयान को राजनीतिक मतभेदों के बावजूद लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा और संवैधानिक व्यवस्था बनाए रखने के पक्ष में दिए गए संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

किरीट सोमैया का आरोप—अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन चाहते हैं राउत

भाजपा नेता किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर संजय राउत और ठाकरे गुट पर तीखा हमला बोला।

सोमैया ने आरोप लगाया कि संजय राउत और उनकी पार्टी अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने की घटना का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने राउत पर राष्ट्रपति, मुख्य चुनाव आयुक्त और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप भी लगाया।

भाजपा नेता ने कहा कि विपक्षी नेता निराशा में भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए अराजकता का रास्ता चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता इस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करेगी।

हालांकि, सोमैया के आरोपों और राउत के बयान की वास्तविक मंशा को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हैं। इस विवाद ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है।

जदयू का हमला—लोकतांत्रिक जनादेश पर भरोसा नहीं करता विपक्ष

बिहार की राजधानी पटना में जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी संजय राउत के बयान की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट में आगजनी की घटना का जिक्र करना और उसे भारत की राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ना हैरान करने वाला है। राजीव रंजन के अनुसार, विपक्ष के कुछ नेताओं के बयानों से यह सवाल उठता है कि क्या उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से जनादेश हासिल करने पर भरोसा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन को लेकर विपक्षी नेताओं की बयानबाजी उनकी राजनीतिक सोच पर सवाल खड़े करती है।

जदयू नेता की इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि अल्बानिया की घटना अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

सिद्धार्थ यादव बोले—भारत में अराजकता का मॉडल नहीं चलेगा

भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव ने भी संजय राउत के बयान की आलोचना की।

गुरुग्राम में उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता भारत में सत्ता परिवर्तन की बात करते हैं और अल्बानिया की घटनाओं का उदाहरण देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष देश के लोकतंत्र को अराजकता की ओर ले जाना चाहता है।

सिद्धार्थ यादव ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां सत्ता परिवर्तन का रास्ता लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है। उनके मुताबिक, देश की जनता विपक्षी नेताओं के बयानों पर नजर रख रही है और भारत में अराजकता का मॉडल स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भाजपा नेता ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए।

संवैधानिक संस्थाओं और विरोध के तरीकों पर केंद्रित हुई बहस

अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट में आगजनी की घटना का उल्लेख करते हुए संजय राउत की टिप्पणी ने भारतीय राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ राउत मौजूदा सरकार के खिलाफ अपनी चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपेक्षा कर रहे हैं, वहीं भाजपा और जदयू नेता उनके बयान को अराजकता से जोड़कर आलोचना कर रहे हैं।

इस पूरे विवाद में प्रियंका चतुर्वेदी का बयान भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संसद और सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का विरोध किया है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना करना, विरोध दर्ज कराना और सत्ता परिवर्तन की मांग करना राजनीतिक अधिकारों का हिस्सा है। लेकिन हिंसा, आगजनी और संवैधानिक संस्थाओं पर हमले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के विचार अब इस बहस के केंद्र में आ गए हैं।

फिलहाल, संजय राउत के बयान पर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संबंधित नेताओं की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

अस्वीकरण: यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
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