
NTN NEWS REPORT// नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नक्सलवाद मुक्त भारत पर चर्चा के दौरान सरकार की रणनीति और अब तक की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में नक्सलवाद अब “आखिरी सांसें” ले रहा है और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र को लाल आतंक से लगभग मुक्त करा दिया है।

गृह मंत्री ने सख्त संदेश देते हुए कहा, “अब समय बदल चुका है। नरेंद्र मोदी की सरकार में जो भी हथियार उठाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। जो गोली चलाएंगे, कीमत भी चुकाएंगे।”
नक्सलवाद समर्थकों पर सीधा हमला
अमित शाह ने सदन में सवाल उठाया कि 1970 से अब तक नक्सलवाद की वकालत करने वालों ने इसे समाप्त करने के लिए क्या ठोस प्रयास किए। उन्होंने कहा कि हथियारबंद आंदोलन का समर्थन करने वाले लोग संविधान को नहीं मानते और पूरी व्यवस्था को नकारते हैं, लेकिन देश में ऐसी सोच नहीं चल सकती।
उन्होंने कहा कि सरकार संवाद और समाधान के लिए तैयार है, लेकिन कुछ लोग अपनी विचारधारा के कारण विकास कार्यों को लागू नहीं होने देना चाहते। उनके मुताबिक, वामपंथी उग्रवाद (LWE) का विकास से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह केवल हिंसा और अव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
कांग्रेस पर निशाना
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि अपने शासनकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के आदिवासियों तक विकास और कल्याण योजनाओं का लाभ क्यों नहीं पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों को कभी “रेड कॉरिडोर” कहा जाता था, वहां लंबे समय तक विकास कार्य बाधित रहे।
अमित शाह ने बताया कि एक समय 12 राज्यों के बड़े भूभाग में नक्सल प्रभाव था, जिससे करोड़ों लोग प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि अब स्थिति तेजी से बदल रही है और सरकार जमीनी स्तर पर शासन और विकास को मजबूत कर रही है।
बस्तर में विकास अभियान
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर में गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए। उनके अनुसार—
- नए स्कूलों का निर्माण
- पंचायत और तहसील स्तर पर अस्पतालों की स्थापना
- राशन दुकानों का संचालन
- आधार और राशन कार्ड बनवाना
- मुफ्त अनाज वितरण
- गैस कनेक्शन उपलब्ध कराना
इन प्रयासों से आम लोगों का विश्वास लोकतांत्रिक व्यवस्था में बढ़ा है और नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है।
20 हजार युवाओं की मौत का उल्लेख
अमित शाह ने एक एनजीओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नक्सल हिंसा में करीब 20,000 युवाओं की जान गई। उन्होंने कहा कि रेड कॉरिडोर में एक समय कानून का शासन लगभग समाप्त हो गया था, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हुए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नक्सलवाद मुक्त शासन की स्थापना हो रही है और इसका श्रेय सुरक्षा बलों को जाता है।
सुरक्षा बलों को दिया श्रेय
गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF), कोबरा बटालियन, राज्य पुलिस, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने सदन की ओर से नक्सल विरोधी अभियान में शहीद हुए जवानों और मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
लोकसभा अध्यक्ष का आभार
अमित शाह ने इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की अनुमति देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया और कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज चाहता था कि उनकी पीड़ा और नक्सलियों द्वारा किए गए अत्याचारों पर संसद में गंभीर चर्चा हो।
मुख्य बयान:
“हथियारबंद आंदोलन का समर्थन करने वाले लोग संविधान को नहीं मानते और पूरी व्यवस्था को नकारते हैं।” — अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
सदन में दिए गए इस बयान के साथ केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई और तेज होगी तथा हिंसा का रास्ता अपनाने वालों के लिए सख्त संदेश जारी रहेगा।