Advertisment
Advertisment
जांजगीर-चांपास्थानीय समाचार / शहर की खबरें

विधानसभा में गूंजी वन्यजीवों की ‘चीख’: 24 माह में 9 बाघ और 38 हाथियों की मौत, शेषराज हरवंश ने सरकार को घेरा

NTN NEWS REPORT// जांजगीर,पामगढ़। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। पामगढ़ से कांग्रेस विधायक शेषराज हरवंश ने सदन में तारांकित प्रश्न के माध्यम से पिछले 24 महीनों में प्रदेश में हुई वन्यजीवों की मौत के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार के अल्प कार्यकाल में रिकॉर्ड संख्या में वन्यजीवों की मौत यह दर्शाती है कि विभाग अपने वैधानिक दायित्वों के निर्वहन में असफल रहा है।


24 महीनों का ‘डेथ ऑडिट’: चौंकाने वाले आंकड़े

तारांकित प्रश्न क्रमांक-11 (कुल क्रमांक 1641) के जवाब में सामने आए आंकड़ों का हवाला देते हुए विधायक ने बताया कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच प्रदेश में वन्यजीवों की मृत्यु दर चिंताजनक रही है।

बाघों की मौत:
इस अवधि में कुल 9 बाघों की मौत हुई। इनमें से 3 बाघों की मृत्यु समय पर समुचित उपचार न मिलने के कारण हुई, जबकि 2 बाघों का अवैध शिकार बिजली के करंट के माध्यम से किया गया।

हाथियों की मौत:
कुल 38 हाथियों की मृत्यु दर्ज की गई। इनमें से 13 हाथियों की मौत अवैध रूप से बिछाए गए बिजली के तारों के कारण हुई।

अन्य वन्यजीव:
इसके अलावा 562 अन्य वन्य प्राणी अस्वाभाविक परिस्थितियों में मृत पाए गए, जिनमें बड़ी संख्या सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित बताई गई।


‘हाथी मित्र दल’ की भूमिका पर उठे सवाल

विधायक शेषराज हरवंश ने सदन में तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब वन विभाग के पास बाघों और हाथियों की निगरानी के लिए ट्रैकिंग टीमें, उपकरण और संसाधन उपलब्ध हैं, तो शिकारी बार-बार सफल कैसे हो रहे हैं?

उन्होंने पूछा कि हाथियों की सुरक्षा के लिए गठित ‘हाथी मित्र दल’ इन घटनाओं के दौरान क्या कर रहा था। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अवैध बिजली करंट बिछाने वालों के खिलाफ अब तक कितनी एफआईआर दर्ज की गई और क्या ठोस कार्रवाई की गई है।

उन्होंने वन विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय की कमी या संभावित लापरवाही की ओर भी संकेत किया।


सड़कों पर वन्यजीवों की मौत, अंडरपास की मांग

अन्य 562 वन्यजीवों की मौत का मुद्दा उठाते हुए विधायक ने कहा कि बड़ी संख्या में वन्यजीव वाहन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि क्या संवेदनशील वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास या ओवरपास निर्माण की कोई ठोस योजना है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वन्यजीव संरक्षण केवल कागजी दावों तक सीमित रह जाएगा।


पामगढ़ के विकास के मुद्दे भी उठाए

वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ विधायक ने अपने निर्वाचन क्षेत्र पामगढ़ की मूलभूत समस्याओं को भी सदन में रखा। उन्होंने क्षेत्रीय विकास के लिए निम्न मांगें प्रस्तुत कीं—

  • पामगढ़ महाविद्यालय में सेमीनार हॉल का निर्माण
  • ग्राम झिलमिली के पहुंच मार्ग का निर्माण
  • पामगढ़ में विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिए नए भवन का निर्माण

विधानसभा में उठाए गए इन सवालों ने न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य की वन्यजीव संरक्षण नीति पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। अब नजरें वन मंत्री के जवाब और सरकार की आगामी कार्ययोजना पर टिकी हैं कि इन मौतों की जिम्मेदारी तय कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
Back to top button
error: Content is protected !!