Advertisment
भारतअन्य खबरें

Refrain From Strikes’: BCI ने वकीलों से अपील की, कानून मंत्री के आश्वासन का हवाला दिया

NTN REPORT// बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा एडवोकेट (संशोधन) विधेयक 2025 के मसौदे के बारे में “गंभीर चिंता” व्यक्त करने के एक दिन बाद परिषद ने अब सभी बार संघों और राज्य बार परिषदों से इस मुद्दे पर हड़ताल या किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन से दूर रहने की गंभीरता से अपील की।

फाइल फोटो

BCI ने कहा : “फिलहाल, ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है (विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए), क्योंकि वकीलों के मुद्दों और BCI के प्रतिनिधित्व पर सरकार का दृष्टिकोण सकारात्मक है।”

दिल्ली बार काउंसिल, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और दिल्ली के सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशन को संबोधित पत्र में BCI ने कहा कि गुरुवार को केंद्रीय कानून मंत्री, कानून सचिव और मंत्रालय के अन्य सीनियर अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एडवोकेट विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों पर कानूनी बिरादरी की वास्तविक चिंताओं के बारे में पर्याप्त स्पष्टता और सकारात्मक आश्वासन दिया गया।

पत्र में आगे कहा गया कि गतिशील केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री का रुख बहुत सकारात्मक है तथा बैठक के दौरान वे वकीलों के प्रति अपने दृष्टिकोण में सहायक प्रतीत हुए। पत्र में आगे कहा गया कि विधि मंत्री ने BCI अधिकारियों को आश्वासन दिया कि विधिक बिरादरी द्वारा उठाए गए सभी विवादास्पद मुद्दों की सावधानीपूर्वक जांच की जाएगी तथा विधेयक के अधिनियमन से पहले उचित तरीके से उनका समाधान किया जाएगा।

पत्र में आगे कहा गया : “माननीय मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि कोई भी प्रावधान कानून में पारित नहीं किया जाएगा, जो विधिक पेशे के हित या इसकी नियामक स्वायत्तता के विरुद्ध हो। सरकार ने रचनात्मक दृष्टिकोण प्रदर्शित किया तथा हमारे सुझावों को स्वीकार किया। इसलिए समय की मांग है कि हड़ताल/बहिष्कार का सहारा लेने के बजाय बातचीत के माध्यम से बातचीत की जाए।”

इन सकारात्मक घटनाक्रमों के मद्देनजर, BCI ने वकीलों से गंभीरतापूर्वक अपील की तथा निर्देश दिया कि वे हड़ताल या किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन से दूर रहें, जिससे न्याय प्रशासन बाधित हो सकता है।

अंत में पत्र में कहा गया कि सभी राज्य बार काउंसिल की बैठक 23 फरवरी 2025 को होनी है। यदि BCI को लगता है कि किसी मुद्दे पर किसी विरोध या आंदोलन की आवश्यकता है तो वह राष्ट्रव्यापी विरोध के लिए उचित समय पर ऐसा आह्वान करेगी।

बता दें कि दिल्ली के वकीलों सहित देश भर के कानूनी समुदाय ने मसौदा विधेयक और एडवोकेट एक्ट 1961 में प्रस्तावित संशोधनों का विरोध किया।

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जजों की घटती संख्या और मसौदा एडवोकेट (संशोधन) विधेयक 2025 के विरोध में आज (21 फरवरी) न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव पारित किया।

Nilesh Tiwari

Editor- NTN Report 📱+91 93298 23355 📧 tnilesh2711@gmail.com
Back to top button
error: Content is protected !!