
नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल: जांजगीर-चांपा के निजी स्कूलों में स्कूल बसों की जांच जरूरी!
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 16 जून 2026 से होने जा रही है। शिक्षा विभाग द्वारा सत्र प्रारंभ करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जिले में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 400 से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं। राज्य सरकार लगातार शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और स्कूल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है।

अभिभावक भी अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निजी स्कूलों में भारी भरकम फीस देने को तैयार रहते हैं। माता-पिता की यही अपेक्षा रहती है कि उनके बच्चों को बेहतर माहौल, अच्छी शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिले। लेकिन इन सभी महत्वपूर्ण विषयों के बीच एक सबसे अहम पहलू अक्सर नजरअंदाज हो जाता है — बच्चों की सुरक्षा।
शिक्षा के साथ सुरक्षा भी स्कूलों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी
स्कूल केवल शिक्षा देने का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदारी का केंद्र भी होता है। खासकर स्कूल बसों और बच्चों के परिवहन को लेकर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
जांजगीर-चांपा जिले में यातायात पुलिस लगातार सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाती है। यातायात नियमों के पालन, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान, ब्लैक स्पॉट चिन्हांकन और लोगों को जागरूक करने जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं। परिवहन विभाग भी समय-समय पर स्कूल वाहनों की जांच करता है।

लेकिन इसके बावजूद कुछ निजी स्कूलों द्वारा बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरतने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
फिटनेस और इंश्योरेंस के बिना दौड़ रहे स्कूल वाहन?
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार कुछ स्कूलों में ऐसे वाहनों का उपयोग किया जाता है जो परिवहन विभाग के तय मापदंडों पर खरे नहीं उतरते। कई वाहनों में फिटनेस प्रमाण पत्र, बीमा और जरूरी दस्तावेजों की कमी होने के बावजूद उनका उपयोग बच्चों को लाने-ले जाने में किया जाता है।

सबसे गंभीर बात यह है कि जब आरटीओ या यातायात पुलिस द्वारा स्कूल बसों की जांच की जाती है, तब कई बार केवल उन्हीं वाहनों को जांच के लिए भेजा जाता है जो पूरी तरह फिट होते हैं। वहीं अन्य वाहनों को छिपा दिया जाता है, जिनमें जरूरी सुरक्षा मानकों की कमी होती है।
यदि ऐसा होता है तो यह सीधे तौर पर नौनिहालों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
फीस वसूली में आगे, सुरक्षा व्यवस्था में पीछे नहीं होनी चाहिए स्कूल व्यवस्था
निजी स्कूलों द्वारा हर साल प्रवेश उत्सव, सुविधाओं और बेहतर शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से बड़ी फीस ली जाती है। ऐसे में यह आवश्यक है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
कुछ पैसों की बचत या लापरवाही के कारण बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। स्कूल संचालकों को समझना होगा कि ये बच्चे किसी परिवार के सपने और उम्मीद होते हैं।
प्रशासन को सख्त निगरानी की जरूरत
नए शैक्षणिक सत्र के पहले जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को सभी निजी स्कूल वाहनों की गहन जांच करनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी स्कूल बिना फिटनेस, बीमा या सुरक्षा मानकों के वाहन संचालित न करे।

स्कूल संचालकों को भी यह समझना होगा कि सुरक्षा नियमों से समझौता करना भविष्य में बड़ी दुर्घटना और गंभीर जिम्मेदारी का कारण बन सकता है।
सवाल यह है कि हादसे के बाद जिम्मेदारी कौन लेगा?
अगर किसी लापरवाही के कारण कोई बड़ी दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या संबंधित स्कूल प्रबंधन इसकी जवाबदेही लेने के लिए तैयार होंगे? यह एक बड़ा सवाल है।
नए सत्र में स्कूलों को जहां प्रवेश उत्सव और शिक्षा के स्तर को लेकर ध्यान देना चाहिए, वहीं बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी पूरी गंभीरता दिखानी होगी।
क्योंकि बच्चों की सुरक्षा किसी भी फीस, सुविधा या व्यवस्था से ज्यादा महत्वपूर्ण है।