सुशासन तिहार की बढ़ती लोकप्रियता से घबराया विपक्ष?
जनसंवाद और चौपालों को लेकर राजनीति तेज, जनता बोली- अब सरकार पहुंच रही गांव-गांव
NTN REPORT// जांजगीर-चांपा, 16 मई 2026। प्रदेशभर में आयोजित किए जा रहे “सुशासन तिहार” को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक उत्साह देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं गांव-गांव पहुंचकर चौपाल लगा रहे हैं और आम लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। वहीं मंत्री, सांसद, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार शिविरों एवं जनचौपालों के माध्यम से जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का त्वरित निराकरण कर रहे हैं।

प्रदेश के कई इलाकों में लोगों का कहना है कि वर्षों बाद ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है, जब शासन और प्रशासन सीधे गांवों तक पहुंचकर लोगों की बात सुन रहा है। सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं और मौके पर ही कई मामलों का समाधान भी किया जा रहा है।
इसी बीच पामगढ़ जन चौपाल को लेकर लगाए गए विधायक के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। भाजपा के जिला प्रवक्ता विकास शर्मा ने कहा कि सुशासन तिहार को मिल रहा अभूतपूर्व जनसमर्थन विपक्ष को असहज कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गांवों में पहुंचकर सीधे लोगों से संवाद कर रहे हैं और यही कारण है कि जनता इस अभियान से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रही है।
विकास शर्मा ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सुरक्षा कारणों को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार विपक्ष को जनता की समस्याओं और विकास कार्यों पर सहयोगात्मक भूमिका निभानी चाहिए, न कि जनहित के कार्यक्रमों पर अनावश्यक विवाद खड़ा करना चाहिए।
ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा भी है कि मुख्यमंत्री जिस सहजता के साथ चौपालों में बैठकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं, वह लंबे समय बाद देखने को मिल रहा है। कई लोगों का मानना है कि सरकार की यह पहल सीधे तौर पर आम जनता को राहत देने वाली साबित हो रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि जो जनप्रतिनिधि लंबे समय तक जनता से दूर रहे, वे अब सुशासन तिहार की लोकप्रियता को देखकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि जनता अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि विकास, समाधान और संवाद चाहती है।
सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि शासन अब केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करेगा। ऐसे में इस अभियान को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों को लेकर भी आम लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।