पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण पर नया कानून लागू, कोटा 17% से घटाकर 7% हुआ; 66 वर्गों को मिलेगा लाभ
NTN REPORT// कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को मंजूरी दे दी है। नए कानून के तहत राज्य में ओबीसी आरक्षण की सीमा को 17 प्रतिशत से घटाकर अब 7 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही ओबीसी सूची का पुनर्गठन करते हुए बिना उचित सर्वे के शामिल किए गए 113 वर्गों को सूची से बाहर कर दिया गया है, जबकि सर्वे के आधार पर चिन्हित 66 वर्गों को आरक्षण का लाभ जारी रहेगा।

यह संशोधन तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार के वर्ष 2012 के कानून में बदलाव के रूप में किया गया है। विधानसभा में पारित दोनों विधेयक हैं—
- पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति को छोड़कर) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026
- पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन विधेयक, 2026
विधानसभा में विधेयकों के पक्ष में 186 विधायकों ने मतदान किया, जबकि 17 सदस्यों ने विरोध किया। छह विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुआ बदलाव
कलकत्ता हाईकोर्ट के मई 2024 के फैसले के बाद राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किया है। हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 के बाद जोड़े गए कई समुदायों को ओबीसी सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को अवैध और असंवैधानिक बताया था।
कोर्ट के आदेश के बाद 2010 से जारी किए गए करीब 12 लाख ओबीसी प्रमाणपत्रों पर असर पड़ा था। हालांकि, पहले से नौकरी प्राप्त कर चुके लोगों की सेवाओं को सुरक्षित रखा गया था। इसके बाद सरकार ने पुराने रिकॉर्ड और सर्वे के आधार पर नई सूची तैयार की।
पिछड़ा वर्ग आयोग की भूमिका बढ़ेगी
नए कानून के अनुसार ओबीसी सूची में किसी भी नए वर्ग को शामिल करने या हटाने का निर्णय पिछड़ा वर्ग आयोग की जांच और सिफारिश के आधार पर होगा।
आयोग को नए आवेदनों की जांच कर सरकार को रिपोर्ट देने का अधिकार होगा। किसी वर्ग को गलत तरीके से शामिल किए जाने या किसी योग्य वर्ग को बाहर रखने की शिकायत भी आयोग के सामने की जा सकेगी।
आयोग के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है।
आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी
संशोधित कानून में स्पष्ट किया गया है कि आरक्षण प्रतिशत में भविष्य में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक नहीं होगा।
सरकार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर पिछड़े वर्गों का वर्गीकरण कर सकेगी।
बंगाल में UCC की तैयारी, उच्चस्तरीय समिति बनाएगी ड्राफ्ट
पश्चिम बंगाल सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की है।
यह समिति प्रस्तावित यूसीसी विधेयक का प्रारूप तैयार करेगी और चार सप्ताह में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।
सरकार के अनुसार प्रस्तावित कानून विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियमों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने का प्रयास करेगा।
हालांकि आदिवासी, स्वदेशी, कुड़मी और अन्य मान्यता प्राप्त प्राचीन समुदायों को कानून से छूट देने की बात कही गई है।
असामाजिक गतिविधियों पर रोक के लिए ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ पास
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने असामाजिक गतिविधियों और हिंसा पर नियंत्रण के लिए ‘द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ को भी मंजूरी दे दी है।
इस बिल के पक्ष में 176 वोट पड़े, जबकि 41 विधायकों ने विरोध किया। 20 विधायक मतदान से अनुपस्थित रहे।
कानून में असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत संभावित खतरे को देखते हुए बिना ट्रायल के 12 महीने तक निवारक हिरासत (Preventive Detention) का प्रावधान रखा गया है।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य गुंडागर्दी, दंगे, हिंसा और सार्वजनिक अशांति फैलाने वालों पर नियंत्रण करना है।
पुलिस को मिलेंगे अतिरिक्त अधिकार
नए कानून के तहत पुलिस को तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी जैसे अधिकारों को मजबूत किया गया है। प्रस्तावित अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है।
साथ ही असामाजिक गतिविधियों में मदद करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाएगा, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाएगा।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।