
NTN REPORT// नई दिल्ली 20.05.26। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को लगातार बड़े सुराग मिल रहे हैं। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी का दावा है कि यह सिर्फ साधारण पेपर लीक नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें प्रश्नपत्र तैयार करने वाले एक्सपर्ट्स, कोचिंग संस्थान संचालक, मेडिकल एडमिशन कंसल्टेंसी चलाने वाले लोग और कथित तौर पर NTA से जुड़े कुछ संदिग्ध लोग भी शामिल हो सकते हैं।
CBI की जांच में महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में फैले एक ऐसे रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क
पहली कड़ी बना RCC कोचिंग संचालक शिवराज मोटेगांवकर
CBI ने महाराष्ट्र के लातूर स्थित RCC यानी रेणुकाई केमिस्ट्री क्लासेस के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसके मोबाइल फोन से NEET-UG 2026 के लीक प्रश्नपत्र और उससे जुड़े वीडियो बरामद किए गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि मोटेगांवकर के कोचिंग संस्थान और घर से ऐसा केमिस्ट्री क्वेश्चन बैंक मिला, जिसमें वही सवाल मौजूद थे जो 3 मई 2026 को आयोजित NEET परीक्षा में पूछे गए थे।
सूत्रों के अनुसार, CBI ने शिवराज से कई घंटों तक पूछताछ की, जिसमें उसके कथित संपर्कों, NTA से जुड़े लोगों और अन्य आरोपियों से रिश्तों की जानकारी जुटाई गई।
पेपर तैयार करने वाली टीम पर भी जांच की आंच
असिस्टेंट प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी पर मास्टरमाइंड होने का शक
CBI की जांच में पी.वी. कुलकर्णी का नाम सबसे अहम माना जा रहा है। एजेंसी के मुताबिक, कुलकर्णी उस एक्सपर्ट टीम का हिस्सा थे जो NEET प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी थी।
जांच एजेंसी को शक है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीम के भीतर से ही पेपर बाहर पहुंचाया गया। यही वजह है कि अब जांच सीधे NTA सिस्टम और उससे जुड़े लोगों तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
बायोलॉजी टीचर मनीषा मांधरे की भूमिका संदिग्ध
CBI ने बायोलॉजी की सीनियर टीचर मनीषा गुरुनाथ मांधरे को भी गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि वह प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एक्सपर्ट टीम का हिस्सा थीं और बायोलॉजी से जुड़े प्रश्नों के लीक होने में उनकी भूमिका हो सकती है।
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि केमिस्ट्री और बायोलॉजी के अलावा फिजिक्स के कुछ सवाल भी लीक हुए थे। हालांकि फिजिक्स एक्सपर्ट की पहचान को लेकर CBI ने अभी आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।
विवेक पाटिल तक पहुंची लीक पेपर की कॉपी
CBI के अनुसार, शिवराज मोटेगांवकर ने लीक प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी विवेक पाटिल समेत कई लोगों तक पहुंचाई थी।
एजेंसी ने बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन में लीक पेपर से जुड़े वीडियो और डिजिटल सामग्री मिली है। फिलहाल जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे कैसे बनी नेटवर्क का हिस्सा?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम पुणे की ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे का सामने आया है। CBI जांच में पता चला कि वह मेडिकल एडमिशन काउंसलिंग और कंसल्टेंसी का काम भी करती थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, मनीषा वाघमारे किसी NTA अधिकारी या स्टाफ से सीधे संपर्क में हो सकती थी। उसके बैंक खातों में NEET परीक्षा से पहले और बाद में लगभग 20 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों से कई खातों के जरिए रकम ट्रांसफर की गई थी। एजेंसी को शक है कि मेडिकल एडमिशन कंसल्टेंसी की आड़ में पेपर लीक सिंडिकेट सक्रिय था।
शुभम खैरनार का “असल कारोबार” आया सामने
CBI जांच में गिरफ्तार शुभम खैरनार खुद को मेडिकल फील्ड से जुड़ा बताता था, लेकिन जांच में सामने आया कि वह नासिक में “SR Education Consultancy” नाम से मेडिकल एडमिशन कंसल्टेंसी चला रहा था।
उसकी कंसल्टेंसी की शाखाएं भोपाल, पुणे, अकोला समेत कई शहरों में थीं। छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने और NEET तैयारी में सहायता देने के नाम पर नेटवर्क तैयार किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, शुभम लगातार कोचिंग संस्थानों और मेडिकल एडमिशन एजेंटों के संपर्क में था।
यश यादव और बिंवाल परिवार तक पहुंचा लीक पेपर
जांच में सामने आया कि शुभम खैरनार ने गुरुग्राम में यश यादव को कथित तौर पर लीक पेपर उपलब्ध कराया था। इसके बाद यह पेपर राजस्थान के मांगीलाल बिंवाल तक पहुंचा।
आरोप है कि बिंवाल परिवार ने अपने रिश्तेदारों और अन्य इच्छुक छात्रों को पैसे लेकर पेपर उपलब्ध कराया। इस मामले में विकास बिंवाल और दिनेश बिंवाल के नाम भी सामने आए हैं।
धनंजय लोखंडे बना “गेस पेपर” सप्लाई का अहम लिंक
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से गिरफ्तार धनंजय लोखंडे को जांच एजेंसी “गेस पेपर” सप्लाई करने वाला अहम कड़ी मान रही है। CBI के अनुसार, वह लगातार शुभम खैरनार और मनीषा वाघमारे के संपर्क में था।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) में यह सामने आया कि NEET परीक्षा से पहले और बाद में आरोपियों के बीच लगातार बातचीत हुई थी। कई मैसेज डिलीट किए गए थे, जिन्हें अब डेटा रिकवरी के जरिए वापस लाने की कोशिश की जा रही है।
NTA की भूमिका पर भी उठे सवाल
CBI का मानना है कि बिना अंदरूनी मदद के इतना बड़ा पेपर लीक संभव नहीं हो सकता। इसी वजह से जांच एजेंसी अब NTA से जुड़े संभावित संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
फिलहाल कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जब्त किए गए हैं। देशभर में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जांच के प्रमुख बिंदु
- अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार
- कई राज्यों में फैला नेटवर्क
- कोचिंग संस्थान, कंसल्टेंसी और एक्सपर्ट टीम के लिंक सामने आए
- मोबाइल फोन और डिजिटल डाटा से मिले अहम सबूत
- करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जांच
- NTA के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।