NTN REPORT// मुंबई में मंगलवार देर रात हुए एक फोन कॉल ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। बताया जा रहा है कि ‘मातोश्री’ से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक पहुंचे संदेश के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की सुधार समिति के चार अहम प्रस्तावों पर तत्काल रोक लगा दी गई। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में आदित्य ठाकरे की सक्रिय भूमिका मानी जा रही है।

आदित्य ठाकरे ने लगाए गंभीर आरोप
मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि BMC की सुधार समिति कुछ नीतिगत बदलावों के जरिए मुंबई की प्रीमियम जमीनों और महत्वपूर्ण संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही थी। उन्होंने दावा किया कि इसके पीछे शिंदे गुट की राजनीतिक और आर्थिक रणनीति काम कर रही है।
आदित्य ठाकरे ने विशेष रूप से सेवन हिल्स अस्पताल को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर देने का विरोध किया। उनका कहना था कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण आम जनता के हितों के खिलाफ है।
सुधार समिति में शिंदे गुट की मजबूत पकड़
BMC की सुधार समिति नगर निगम की सबसे प्रभावशाली समितियों में मानी जाती है। यह समिति बड़े निर्माण कार्यों, सड़क परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और भूमि उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देती है।
हाल ही में संध्या विपुल दोशी को समिति का अध्यक्ष चुना गया है और समिति में शिंदे गुट की मजबूत उपस्थिति बताई जा रही है। इसी वजह से इन प्रस्तावों को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया।
ये थे BMC के चार बड़े प्रस्ताव
BMC की सुधार समिति जिन चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लेने वाली थी, उनमें शामिल थे—
- सेवन हिल्स अस्पताल का PPP मॉडल पर संचालन
- पांच उपनगरीय ब्लड बैंकों का निजीकरण
- बांद्रा रिक्लेमेशन प्रदर्शनी केंद्र से जुड़ा प्रस्ताव
- मालाबार हिल ग्रीन ज़ोन में बदलाव
शिवसेना UBT ने इन सभी प्रस्तावों में संभावित अनियमितताओं और निजी हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
आधी रात का राजनीतिक ड्रामा
दिन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देर रात राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गईं। सूत्रों के मुताबिक ‘मातोश्री’ से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तक सीधा संपर्क किया गया। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदलता दिखाई दिया।
बताया जा रहा है कि आदित्य ठाकरे के आग्रह पर शिवसेना UBT के विधान परिषद सदस्य मिलिंद नार्वेकर ने मुख्यमंत्री फडणवीस को प्रस्तावों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भाजपा पार्षदों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और चारों प्रस्तावों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए।
शिंदे गुट को लगा झटका
राजनीतिक रूप से सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि शिंदे गुट के एक पार्षद ने भी ब्लड बैंक निजीकरण प्रस्ताव पर पुनर्विचार की जरूरत बताई और आदित्य ठाकरे के रुख का समर्थन किया।
वहीं भाजपा ने सार्वजनिक रूप से ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन पर्दे के पीछे इन प्रस्तावों को रोकने में उसकी अहम भूमिका बताई जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि मातोश्री और मुख्यमंत्री फडणवीस के बीच बढ़ता संवाद आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।
बदलते समीकरणों पर बढ़ी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ संकेत दिए हैं कि महाराष्ट्र में सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक रिश्तों में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। BMC चुनावों से पहले यह मामला और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल करता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई की जमीन, स्वास्थ्य सेवाओं और नगर निगम प्रशासन से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं।
यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।