2 जून 2026 को कर्क राशि में होगा गुरु का महागोचर, इन 4 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें
NTN REPORT// ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन जब बात देवगुरु बृहस्पति की हो तो इसका प्रभाव और भी व्यापक हो जाता है. बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, संतान, शिक्षा, भाग्य और धन का कारक ग्रह माना गया है. ऐसे में जब गुरु राशि परिवर्तन करते हैं तो उसका असर केवल व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी दिखाई देता है।

इसी क्रम में 2 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति एक बड़ा गोचर करने जा रहे हैं. इस दिन गुरु ग्रह कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कर्क राशि बृहस्पति की उच्च राशि मानी जाती है, इसलिए इस दौरान गुरु अपने सबसे प्रभावशाली और शुभ स्वरूप में रहेंगे. हालांकि जहां कुछ राशियों के लिए यह गोचर अत्यंत लाभकारी रहेगा, वहीं कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी.
क्यों खास माना जा रहा है गुरु का कर्क राशि में गोचर?
ज्योतिष के अनुसार जब कोई ग्रह अपनी उच्च राशि में प्रवेश करता है तो उसकी शक्तियां कई गुना बढ़ जाती हैं. कर्क राशि में गुरु का गोचर आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान, पारिवारिक मूल्यों और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है. इस दौरान कई लोगों के जीवन में बड़े फैसले, करियर परिवर्तन और रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं.
इन 4 राशियों के लिए कठिन माना जा रहा है यह गोचर
मेष राशि
गुरु का यह गोचर मेष राशि के चतुर्थ भाव में होने जा रहा है. इस दौरान पारिवारिक जीवन में तनाव और उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है. घर की मरम्मत, वाहन या माता के स्वास्थ्य पर अचानक खर्च बढ़ने की संभावना रहेगी. नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर बदलाव का सामना करना पड़ सकता है. इस समय भावनात्मक फैसलों से बचने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जाती है.
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए बृहस्पति दूसरे भाव में प्रवेश करेंगे. यह भाव धन और वाणी से जुड़ा माना जाता है. ऐसे में आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी होगी. धन संचय में रुकावट आ सकती है और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं. परिवार के भीतर बोलचाल को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है. निवेश करने से पहले अच्छी तरह विचार करना लाभकारी रहेगा.
तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर दशम भाव में होगा, जो करियर और कार्यक्षेत्र का भाव माना जाता है. इस दौरान नौकरी या व्यवसाय में अचानक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंधों में तनाव बढ़ सकता है. कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है. संयम और समझदारी से लिए गए फैसले ही सफलता दिलाएंगे.
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर छठे भाव में होगा. यह भाव रोग, शत्रु और कानूनी मामलों से संबंधित माना जाता है. ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं. गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता होगी. कोर्ट-कचहरी या विवादित मामलों में लापरवाही भारी पड़ सकती है. खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना जरूरी रहेगा.
क्या करें इस दौरान?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए पीले वस्त्र धारण करना, गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करना और जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है. साथ ही किसी भी बड़े निर्णय को जल्दबाजी में लेने से बचना चाहिए.
डिस्क्लेमर
ज्योतिष और राशिफल से जुड़ी यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है. किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। यह समाचार विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों एवं प्राप्त जानकारी पर आधारित है।